उत्तराखंड

धामी ने वंदे मातरम पर कांग्रेस के फैसले को बताया राष्ट्र-विरोधी

Kavita2
21 Aug 2026 10:45 AM IST
धामी ने वंदे मातरम पर कांग्रेस के फैसले को बताया राष्ट्र-विरोधी
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देहरादून। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को कांग्रेस के उस फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया दी, जिसमें पार्टी कार्यक्रमों के दौरान राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ के केवल दो पद गाने की बात कही गई है। धामी ने कांग्रेस के इस निर्णय को “राष्ट्र-विरोधी” बताते हुए आरोप लगाया कि पार्टी ने पहले भी तुष्टिकरण की राजनीति के चलते ‘वंदे मातरम’ को लेकर इसी तरह का रुख अपनाया था।

पत्रकारों से बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस कार्यसमिति का ‘वंदे मातरम’ को आंशिक रूप से गाने का फैसला उन स्वतंत्रता सेनानियों और शहीदों के बलिदान का अपमान है, जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपना जीवन न्योछावर कर दिया। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने देश के लिए खुशी-खुशी फांसी का फंदा स्वीकार किया, उनके सपनों और भावनाओं को इस तरह के फैसले से ठेस पहुंचती है।

कांग्रेस के फैसले पर धामी का हमला

मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस ने पहले भी ‘वंदे मातरम’ को लेकर ऐसा रुख अपनाया था और अब एक बार फिर पार्टी की ओर से इसके गायन को सीमित करने का फैसला किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस की राजनीति में तुष्टिकरण का प्रभाव लंबे समय से रहा है।

धामी ने कहा कि ‘वंदे मातरम’ केवल एक गीत नहीं है, बल्कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान इसने देशवासियों में राष्ट्रभक्ति की भावना को मजबूत करने का काम किया था। उनके मुताबिक, स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान इस गीत ने लोगों को एकजुट करने और अंग्रेजी शासन के खिलाफ संघर्ष के लिए प्रेरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

उन्होंने कांग्रेस के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी को यह स्पष्ट करना चाहिए कि वह राष्ट्रगीत के सभी पदों को गाने से क्यों बचना चाहती है। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि इसके पीछे राजनीतिक सोच और वोट बैंक की राजनीति का प्रभाव हो सकता है।

‘शहीदों के सपनों को ठेस’

धामी ने कहा कि देश के स्वतंत्रता संग्राम में बड़ी संख्या में युवाओं और क्रांतिकारियों ने अपने प्राणों का बलिदान दिया। ‘वंदे मातरम’ उस दौर में राष्ट्रीय चेतना का एक महत्वपूर्ण प्रतीक बन गया था। ऐसे में इसके गायन को सीमित करने का निर्णय उन शहीदों की भावनाओं के विपरीत है, जिन्होंने देश की स्वतंत्रता के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रभक्ति से जुड़े प्रतीकों को राजनीतिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कांग्रेस से इस मुद्दे पर अपने फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग करते हुए कहा कि देश के स्वतंत्रता आंदोलन और उसके इतिहास से जुड़े प्रतीकों का सम्मान सभी राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी है।

देवी-देवताओं के मुद्दे पर कांग्रेस से सवाल

मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी को लगता है कि ‘वंदे मातरम’ के पूरे स्वरूप में भारत के देवी-देवताओं का आह्वान और गुणगान होता है, इसलिए वह इसके पूर्ण गायन को लेकर आपत्ति कर रही है। धामी ने इस तर्क को कांग्रेस की तुष्टिकरण की राजनीति से जोड़ते हुए पार्टी पर निशाना साधा।

उन्होंने उत्तराखंड के कांग्रेस नेताओं पर भी सवाल उठाया। धामी ने कहा कि राज्य को ‘देवभूमि’ के रूप में जाना जाता है और यहां धार्मिक एवं आध्यात्मिक परंपराओं का गहरा महत्व है। ऐसे में कांग्रेस के राज्य नेताओं को अपने केंद्रीय नेतृत्व से पूछना चाहिए कि क्या देवभूमि उत्तराखंड में देवी-देवताओं की पूजा नहीं की जानी चाहिए।

उत्तराखंड की राजनीति में भी बयान के मायने

मुख्यमंत्री का यह बयान उत्तराखंड की राजनीति में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राज्य में भाजपा और कांग्रेस के बीच विभिन्न मुद्दों पर लगातार राजनीतिक टकराव देखने को मिलता रहा है। राष्ट्रवाद, धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक पहचान से जुड़े मुद्दे अक्सर दोनों दलों के बीच राजनीतिक बहस का हिस्सा बनते हैं।

धामी ने ‘वंदे मातरम’ के मुद्दे को शहीदों के बलिदान और राष्ट्रभक्ति से जोड़ते हुए कांग्रेस पर वैचारिक हमला किया है। उनके बयान से संकेत मिलता है कि भाजपा इस मुद्दे को कांग्रेस की राजनीतिक विचारधारा और तुष्टिकरण की नीति के खिलाफ व्यापक बहस के रूप में पेश कर सकती है।

‘वंदे मातरम’ का ऐतिहासिक महत्व

‘वंदे मातरम’ भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन से गहराई से जुड़ा हुआ है। बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की रचना के रूप में सामने आए इस गीत ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान राष्ट्रवादी भावना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। समय के साथ यह भारतीय राष्ट्रीय चेतना और स्वतंत्रता संघर्ष के प्रमुख प्रतीकों में शामिल हो गया।

इसी ऐतिहासिक महत्व को आधार बनाते हुए धामी ने कहा कि राष्ट्रगीत के गायन को सीमित करना उचित नहीं है। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह राजनीतिक कारणों से इस मुद्दे पर ऐसा रुख अपना रही है।

कांग्रेस से जवाब की मांग

धामी के बयान के बाद अब इस मुद्दे पर कांग्रेस की प्रतिक्रिया का इंतजार है। मुख्यमंत्री ने कांग्रेस के फैसले को राष्ट्र-विरोधी बताते हुए पार्टी के नेतृत्व और राज्य नेताओं से स्पष्टीकरण की मांग की है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को यह बताना चाहिए कि राष्ट्रगीत के केवल दो पद गाने का फैसला किन कारणों से लिया गया।

फिलहाल ‘वंदे मातरम’ को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज होने के संकेत हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसे शहीदों के सम्मान, राष्ट्रभक्ति और सांस्कृतिक आस्था से जोड़ते हुए कांग्रेस पर तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया है। वहीं, इस मुद्दे पर कांग्रेस का पक्ष सामने आने के बाद राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है।

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