उत्तराखंड

बद्रीनाथ हादसे के बाद DGCA सख्त, चारधाम हेलीकॉप्टर उड़ानों के लिए नए नियम लागू

Ratna Netam
2 Nov 2026 9:04 PM IST
बद्रीनाथ हादसे के बाद DGCA सख्त, चारधाम हेलीकॉप्टर उड़ानों के लिए नए नियम लागू
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देहरादून। उत्तराखंड में बद्रीनाथ से देहरादून लौट रहे हेलीकॉप्टर के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) ने चारधाम यात्रा के दौरान संचालित होने वाली चार्टर हेलीकॉप्टर सेवाओं के लिए सुरक्षा नियम कड़े कर दिए हैं। नए निर्देशों के तहत 2 नवंबर 2026 से चारधाम क्षेत्र में संचालित सभी चार्टर हेलीकॉप्टर उड़ानों में दो पायलट रखना अनिवार्य कर दिया गया है। इसके साथ ही प्रत्येक उड़ान से पहले निर्धारित नियंत्रण कक्ष से अनुमति लेना और उड़ान पूरी होने के बाद रिपोर्ट जमा करना भी जरूरी होगा। हालांकि, इस फैसले के विरोध में निजी हेलीकॉप्टर ऑपरेटरों ने अपनी चार्टर सेवाएं अस्थायी रूप से बंद कर दी हैं, जिससे हवाई मार्ग से चारधाम यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
30 अक्टूबर को हुए हादसे में छह लोगों की मौत
उत्तराखंड के चमोली जिले में 30 अक्टूबर को एक दर्दनाक हेलीकॉप्टर हादसा हुआ था। ट्रांस भारत एविएशन का एक निजी हेलीकॉप्टर बद्रीनाथ धाम से देहरादून लौट रहा था। इसी दौरान जोशीमठ क्षेत्र के चाई गांव के पास हेलीकॉप्टर पहाड़ी से टकराकर दुर्घटनाग्रस्त हो गया।इस हादसे में पायलट सहित हेलीकॉप्टर में सवार सभी छह लोगों की मौत हो गई थी। घटना के बाद चारधाम क्षेत्र में हेलीकॉप्टर सेवाओं की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे।हादसे की जांच के लिए DGCA और विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) की टीमें घटनास्थल पर पहुंचीं। जांच अधिकारियों ने स्थानीय लोगों से जानकारी जुटाई और दुर्घटना के कारणों का पता लगाने की प्रक्रिया शुरू की।हादसे का अंतिम कारण जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
अब हर चार्टर हेलीकॉप्टर में दो पायलट जरूरी
हादसे के बाद DGCA और उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (UCADA) के अधिकारियों की उच्चस्तरीय बैठक हुई। इसमें चारधाम हेलीकॉप्टर सेवाओं की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की गई।बैठक के बाद निर्णय लिया गया कि चारधाम क्षेत्र में संचालित होने वाली सभी चार्टर उड़ानों में दो पायलट मौजूद रहेंगे। विशेष बात यह है कि दूसरे पायलट के पास भी पहाड़ी क्षेत्रों में उड़ान भरने की आवश्यक योग्यता होनी चाहिए।इसका उद्देश्य कठिन मौसम, पहाड़ी रास्तों और आपात परिस्थितियों में उड़ान संचालन को अधिक सुरक्षित बनाना हैविशेषज्ञों का मानना है कि दो पायलट होने से उड़ान के दौरान निर्णय लेने में अतिरिक्त सहायता मिल सकती है। खराब मौसम या अचानक सामने आने वाली बाधाओं के दौरान दोनों पायलट परिस्थितियों का आकलन कर सकते हैं।हालांकि, दो पायलटों की मौजूदगी अकेले दुर्घटनाओं को रोकने की गारंटी नहीं है। इसके साथ मौसम की सही जानकारी, विमान की तकनीकी स्थिति और सुरक्षा प्रक्रियाओं का पालन भी जरूरी है।
हर उड़ान से पहले लेनी होगी अनुमति
DGCA ने दो पायलटों की अनिवार्यता के अलावा उड़ान संचालन से जुड़े अन्य नियम भी लागू किए हैं।अब चारधाम क्षेत्र में प्रत्येक उड़ान शुरू करने से पहले देहरादून के सहस्रधारा स्थित नियंत्रण कक्ष से मार्ग और गंतव्य की स्पष्ट अनुमति प्राप्त करनी होगी।इसके अतिरिक्त प्रत्येक गंतव्य हेलीपैड पर उतरने के बाद चालक दल को पायलट रिपोर्ट यानी PIREP जमा करनी होगी। इस रिपोर्ट में रास्ते के मौसम, दृश्यता और उड़ान के दौरान सामने आई महत्वपूर्ण परिस्थितियों की जानकारी शामिल होगी।इस व्यवस्था का उद्देश्य अगली उड़ान भरने वाले पायलटों को ताजा जानकारी उपलब्ध कराना है, ताकि वे मौसम और अन्य संभावित जोखिमों का बेहतर आकलन कर सकें।UCADA को इन अनुमतियों और रिपोर्टों का रिकॉर्ड व्यवस्थित रूप से रखने की जिम्मेदारी भी दी गई है।
नए नियमों के विरोध में उतरीं हेलीकॉप्टर कंपनियां
DGCA के फैसले के बाद चारधाम क्षेत्र में सेवाएं देने वाली निजी हेलीकॉप्टर कंपनियों ने विरोध जताया है।जानकारी के अनुसार, 13 चार्टर ऑपरेटरों में से 11 ने 31 अक्टूबर को DGCA को संयुक्त पत्र भेजकर दो पायलटों की अनिवार्यता पर आपत्ति दर्ज कराई।कंपनियों का कहना है कि प्रत्येक उड़ान में दो पायलट रखने से परिचालन लागत काफी बढ़ जाएगी। इसके अलावा अतिरिक्त पायलटों की उपलब्धता, आवास और अन्य व्यवस्थाओं पर भी खर्च बढ़ेगा।ऑपरेटरों ने तर्क दिया कि मौजूदा किराया व्यवस्था और सीमित लाभ के कारण अतिरिक्त खर्च उठाना उनके लिए मुश्किल होगा।कंपनियों ने सुरक्षा संबंधी चिंताओं को स्वीकार करते हुए नियामक से ऐसा वैकल्पिक समाधान तैयार करने का आग्रह किया है, जो सुरक्षित होने के साथ व्यावहारिक और आर्थिक रूप से टिकाऊ भी हो।
2 नवंबर से चार्टर हेलीकॉप्टर सेवाएं बंद
नए नियमों को लेकर सहमति नहीं बनने के बाद निजी ऑपरेटरों ने सोमवार, 2 नवंबर से चारधाम की चार्टर हेलीकॉप्टर सेवाएं अस्थायी रूप से बंद कर दीं।इस फैसले का असर देहरादून के सहस्रधारा से चारधाम यात्रा के लिए संचालित चार्टर सेवाओं पर पड़ा है। कुछ कंपनियों ने पहले से की गई बुकिंग भी रद्द कर दी हैं।हालांकि, केदारनाथ धाम के लिए नियमित शटल हेलीकॉप्टर सेवाएं पहले की तरह जारी रहने की जानकारी सामने आई है।चार्टर सेवाओं के बंद होने से उन यात्रियों को परेशानी हो सकती है, जिन्होंने कम समय में कई धामों के दर्शन करने के लिए हेलीकॉप्टर बुक कराया था।फिलहाल चार्टर सेवाएं दोबारा कब शुरू होंगी, इस संबंध में कोई निश्चित तारीख सामने नहीं आई है।
पहाड़ी क्षेत्रों में हेलीकॉप्टर उड़ान बड़ी चुनौती
उत्तराखंड के चारधाम क्षेत्र में हेलीकॉप्टर संचालन कई कारणों से चुनौतीपूर्ण माना जाता है। ऊंचे पहाड़, संकरी घाटियां, अचानक बदलता मौसम और सीमित दृश्यता उड़ान सुरक्षा को प्रभावित कर सकते हैं।विशेष रूप से बादल और कोहरे के कारण पायलट को आगे का रास्ता स्पष्ट दिखाई नहीं देने की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।ऐसी परिस्थितियों में मौसम की निगरानी, उड़ान से पहले जोखिम का आकलन और प्रशिक्षित पायलटों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।विमानन विशेषज्ञों ने पहाड़ी क्षेत्रों में उड़ान भरने वाले पायलटों के लिए नियमित प्रशिक्षण और सिम्युलेटर अभ्यास की आवश्यकता भी बताई है।
चारधाम यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता
DGCA के नए निर्देशों के बाद अब विमानन नियामक और निजी ऑपरेटरों के बीच समाधान निकालना महत्वपूर्ण हो गया है।एक ओर DGCA यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कड़े नियम लागू कर रहा है, वहीं दूसरी ओर कंपनियां परिचालन लागत और व्यावहारिक कठिनाइयों का हवाला दे रही हैं।चारधाम यात्रा के शीतकालीन समापन की तारीखें भी नजदीक हैं। उपलब्ध कार्यक्रम के अनुसार, गंगोत्री धाम के कपाट 10 नवंबर, केदारनाथ और यमुनोत्री के 11 नवंबर तथा बद्रीनाथ धाम के 16 नवंबर को बंद होने हैं। ऐसे में हेलीकॉप्टर सेवाओं में व्यवधान यात्रियों की योजनाओं को प्रभावित कर सकता है।फिलहाल सभी की नजर DGCA, UCADA और हेलीकॉप्टर ऑपरेटरों के बीच होने वाली आगे की बातचीत पर है। बद्रीनाथ हादसे के बाद लागू किए गए नए नियमों का उद्देश्य भविष्य में दुर्घटनाओं के जोखिम को कम करना और श्रद्धालुओं की हवाई यात्रा को अधिक सुरक्षित बनाना है।
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