उत्तराखंड

उत्तराखंड आदि रंगोत्सव का आगाज CM धामी ने किया उद्घाटन

Ratna Netam
4 Oct 2026 7:36 PM IST
उत्तराखंड आदि रंगोत्सव का आगाज CM धामी ने किया उद्घाटन
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खटीमा। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को खटीमा में तीन दिवसीय ‘उत्तराखंड आदि रंगोत्सव’ का उद्घाटन किया। इस अवसर पर केंद्रीय जनजातीय मामलों के मंत्री जुएल ओराम और केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू भी मौजूद रहे। नवीन मंडी परिसर में आयोजित इस महोत्सव में देश के 15 से अधिक राज्यों के जनजातीय कलाकार, कारीगर और निर्माता हिस्सा ले रहे हैं। आयोजन के माध्यम से देश की विविध जनजातीय कला, संस्कृति, हस्तशिल्प, पारंपरिक उत्पादों और खान-पान को एक साझा मंच उपलब्ध कराया गया है।
रंगोत्सव के उद्घाटन से पहले खटीमा में भव्य रोड शो का आयोजन किया गया। इसमें मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के साथ केंद्रीय मंत्री जुएल ओराम और किरेन रिजिजू शामिल हुए। रोड शो के दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और जनजातीय समुदाय के सदस्य सड़कों पर नजर आए। लोगों ने मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्रियों का स्वागत किया। आयोजन को लेकर खटीमा में उत्सव जैसा माहौल दिखाई दिया।
तीन दिनों तक चलने वाले ‘उत्तराखंड आदि रंगोत्सव’ का मुख्य उद्देश्य देश के अलग-अलग राज्यों में रहने वाले जनजातीय समुदायों की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को एक मंच पर प्रस्तुत करना है। इसमें जनजातीय कलाकार अपनी पारंपरिक लोककला और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से अपनी विशिष्ट पहचान से लोगों को परिचित करा रहे हैं।
नवीन मंडी परिसर में विभिन्न राज्यों से पहुंचे कारीगरों और निर्माताओं के लिए भी विशेष व्यवस्था की गई है। यहां पारंपरिक हस्तशिल्प, जनजातीय उत्पाद और स्थानीय स्तर पर तैयार की जाने वाली वस्तुओं को प्रदर्शित किया जा रहा है। इससे कारीगरों को अपनी कला और उत्पादों को लोगों के सामने पेश करने का अवसर मिल रहा है।
रंगोत्सव की खासियत यह है कि यहां देश के अलग-अलग क्षेत्रों की जनजातीय संस्कृति एक ही स्थान पर देखने को मिल रही है। विभिन्न राज्यों से आए कलाकार अपने पारंपरिक नृत्य, संगीत और लोक परंपराओं के माध्यम से अपनी सांस्कृतिक विरासत का प्रदर्शन कर रहे हैं। इससे लोगों को देश की जनजातीय विविधता को करीब से समझने का अवसर मिल रहा है।
हस्तशिल्प भी इस आयोजन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। जनजातीय समुदायों में पीढ़ियों से चली आ रही पारंपरिक कला और शिल्प केवल उनकी आजीविका का साधन नहीं हैं, बल्कि उनकी सांस्कृतिक पहचान से भी जुड़े हुए हैं। रंगोत्सव जैसे आयोजनों के जरिए इन उत्पादों को नया बाजार और कारीगरों को सीधे लोगों से जुड़ने का अवसर मिल सकता है।
कार्यक्रम में पारंपरिक खान-पान को भी स्थान दिया गया है। अलग-अलग राज्यों से आए प्रतिभागियों के माध्यम से विभिन्न जनजातीय समुदायों के भोजन और स्थानीय व्यंजनों की झलक देखने को मिल रही है। इससे यह आयोजन केवल कला और हस्तशिल्प तक सीमित नहीं रहकर संस्कृति के विभिन्न पहलुओं को एक साथ सामने लाने वाला मंच बन गया है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की मौजूदगी में हुए उद्घाटन कार्यक्रम में जनजातीय संस्कृति के संरक्षण और प्रचार-प्रसार पर विशेष जोर रहा। उत्तराखंड में भी कई जनजातीय समुदाय रहते हैं, जिनकी अपनी अलग परंपराएं, लोककला, वेशभूषा, खान-पान और सामाजिक-सांस्कृतिक पहचान है। ऐसे में खटीमा में आयोजित यह महोत्सव स्थानीय जनजातीय समुदायों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
केंद्रीय जनजातीय मामलों के मंत्री जुएल ओराम की मौजूदगी ने आयोजन में जनजातीय विकास से जुड़े पहलुओं को भी प्रमुखता दी। जनजातीय समुदायों के कारीगरों और कलाकारों के लिए बाजार तक पहुंच, उनके पारंपरिक कौशल का संरक्षण और नई पीढ़ी को संस्कृति से जोड़ना इस तरह के आयोजनों के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है।
वहीं केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू भी उद्घाटन कार्यक्रम और इससे पहले आयोजित रोड शो में शामिल हुए। विभिन्न राज्यों से आए प्रतिभागियों की मौजूदगी के कारण रंगोत्सव राष्ट्रीय स्तर पर सांस्कृतिक संवाद का भी माध्यम बना है। पूर्वोत्तर से लेकर उत्तर और देश के अन्य हिस्सों की जनजातीय परंपराओं को एक ही मंच पर देखने का अवसर लोगों को मिल रहा है।
आयोजन का एक महत्वपूर्ण पहलू जनजातीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराना भी है। छोटे कारीगरों के सामने अक्सर अपने उत्पादों को बड़े बाजार तक पहुंचाने की चुनौती रहती है। प्रदर्शनी और सांस्कृतिक महोत्सव उन्हें सीधे ग्राहकों तक पहुंचने तथा अपने उत्पादों की विशेषताओं के बारे में जानकारी देने का अवसर प्रदान करते हैं।
जनजातीय हस्तशिल्प में पारंपरिक तकनीक, प्राकृतिक संसाधनों और स्थानीय कला का विशेष महत्व होता है। कई उत्पाद पूरी तरह हाथ से तैयार किए जाते हैं और उनके डिजाइन संबंधित समुदाय की परंपराओं से जुड़े होते हैं। आधुनिक बाजार में इन उत्पादों की पहचान बढ़ने से कारीगरों के लिए रोजगार और आय के नए अवसर भी तैयार हो सकते हैं।
‘उत्तराखंड आदि रंगोत्सव’ में युवाओं और नई पीढ़ी को भी जनजातीय संस्कृति से परिचित होने का अवसर मिल रहा है। लोक नृत्य, संगीत, हस्तशिल्प और पारंपरिक उत्पादों के जरिए युवा देश की सांस्कृतिक विविधता को समझ सकते हैं। इस तरह के आयोजन परंपरागत ज्ञान को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने में भी उपयोगी भूमिका निभाते हैं।
खटीमा का क्षेत्र जनजातीय समुदायों और उनकी सांस्कृतिक परंपराओं के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में यहां राष्ट्रीय स्तर के जनजातीय महोत्सव का आयोजन स्थानीय पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों के लिए भी अवसर पैदा कर सकता है। बड़ी संख्या में कलाकारों, कारीगरों और आगंतुकों की मौजूदगी से स्थानीय बाजार और छोटे कारोबारियों को भी लाभ मिलने की संभावना रहती है।
तीन दिवसीय रंगोत्सव के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ हस्तशिल्प और पारंपरिक उत्पादों की प्रदर्शनी प्रमुख आकर्षण बनी हुई है। आयोजन के जरिए कला, संस्कृति, परंपरा और आजीविका को एक मंच पर जोड़ने का प्रयास किया गया है।
‘उत्तराखंड आदि रंगोत्सव’ का उद्घाटन जहां जनजातीय संस्कृति के उत्सव के रूप में सामने आया, वहीं इससे पहले आयोजित रोड शो ने पूरे कार्यक्रम को व्यापक स्वरूप दिया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, केंद्रीय मंत्री जुएल ओराम और किरेन रिजिजू की मौजूदगी में शुरू हुआ यह तीन दिवसीय आयोजन देश के विभिन्न हिस्सों की जनजातीय विरासत, कला और पारंपरिक कौशल को खटीमा में एक साथ प्रस्तुत कर रहा है।
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