
देहरादून/चमोली। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सावन मास के पावन अवसर पर श्रद्धालुओं से चमोली जिले के गोपेश्वर स्थित प्राचीन श्री गोपीनाथ मंदिर में भगवान शिव के दर्शन करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यह मंदिर उत्तराखंड की आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत का महत्वपूर्ण केंद्र है, जहां दर्शन करने से श्रद्धालुओं को आत्मिक शांति और महादेव का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर साझा अपने संदेश में कहा कि गोपेश्वर स्थित श्री गोपीनाथ मंदिर भगवान शिव के प्रति अटूट आस्था का अनुपम केंद्र है। हिमालय की गोद में स्थित यह पवित्र धाम प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम है। उन्होंने श्रद्धालुओं से कहा कि सावन माह में यदि वे चमोली आएं तो देवाधिदेव महादेव के दर्शन कर उनका आशीर्वाद अवश्य प्राप्त करें।
श्री गोपीनाथ मंदिर उत्तराखंड के सबसे प्राचीन शिव मंदिरों में गिना जाता है। यह मंदिर अपनी ऐतिहासिक महत्ता के साथ-साथ अनूठी वास्तुकला के लिए भी प्रसिद्ध है। मंदिर का विशाल शिखर, प्राचीन शैली में निर्मित गर्भगृह और पत्थरों पर की गई बारीक नक्काशी इसे विशेष पहचान देती है। मंदिर का लगभग 30 वर्ग फुट का गर्भगृह और उससे जुड़ा स्थापत्य पर्यटकों और श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है।
मंदिर परिसर का सबसे बड़ा आकर्षण यहां स्थापित करीब 5 मीटर ऊंचा अष्टधातु का त्रिशूल है, जिसे 12वीं शताब्दी का माना जाता है। यह विशाल त्रिशूल मंदिर की ऐतिहासिक पहचान का प्रतीक है और देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहता है।
चमोली जनपद के गोपेश्वर में स्थित प्राचीन श्री गोपीनाथ मंदिर भगवान शिव के प्रति अटूट आस्था का अनुपम केंद्र है। प्रकृति की गोद में स्थित इस पावन धाम में महादेव के दर्शन मन को असीम शांति और एक अद्भुत आध्यात्मिक अनुभूति से भर देते हैं।
— Pushkar Singh Dhami (@pushkardhami) August 7, 2026
पवित्र सावन मास में चमोली आगमन पर श्री गोपीनाथ… pic.twitter.com/ELcnySLQlj
गोपेश्वर अपनी प्राकृतिक सुंदरता, शांत वातावरण और धार्मिक महत्व के कारण लंबे समय से पर्यटन और तीर्थाटन का प्रमुख केंद्र रहा है। श्री गोपीनाथ मंदिर के अलावा यहां वैतरणी कुंड, बिना प्रतिमाओं वाले प्राचीन मंदिर समूह तथा बांज के घने वृक्ष भी प्रमुख दर्शनीय स्थलों में शामिल हैं। यही कारण है कि हर वर्ष सावन और अन्य धार्मिक अवसरों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।
राज्य सरकार धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री धामी का कहना है कि उत्तराखंड के प्राचीन मंदिर केवल आस्था के केंद्र ही नहीं, बल्कि राज्य की सांस्कृतिक पहचान भी हैं। सरकार इन धार्मिक स्थलों तक पहुंच आसान बनाने और श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए विभिन्न योजनाओं पर काम कर रही है।
कैसे पहुंचें गोपीनाथ मंदिर?
श्री गोपीनाथ मंदिर चमोली जिले के गोपेश्वर नगर में स्थित है। यहां का निकटतम हवाई अड्डा जॉली ग्रांट एयरपोर्ट, देहरादून है, जो मंदिर से लगभग 225 किलोमीटर दूर है। निकटतम रेलवे स्टेशन ऋषिकेश है, जिसकी दूरी लगभग 205 किलोमीटर है। ऋषिकेश से राष्ट्रीय राजमार्ग-58 के माध्यम से सड़क मार्ग द्वारा गोपेश्वर आसानी से पहुंचा जा सकता है। ऋषिकेश, श्रीनगर, रुद्रप्रयाग और चमोली से नियमित बस और टैक्सी सेवाएं उपलब्ध रहती हैं।
सावन के दौरान मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना, रुद्राभिषेक और जलाभिषेक का आयोजन किया जाता है। प्रशासन श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं भी करता है। मुख्यमंत्री ने श्रद्धालुओं से स्वच्छता बनाए रखने, स्थानीय संस्कृति का सम्मान करने और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की भी अपील की है।
सरकार का मानना है कि श्री गोपीनाथ मंदिर जैसे प्राचीन धार्मिक स्थलों के प्रति लोगों की बढ़ती आस्था से न केवल धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि स्थानीय व्यापार, होटल, परिवहन और रोजगार के अवसरों में भी वृद्धि होगी। यही कारण है कि उत्तराखंड सरकार देवभूमि की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयासरत है।





