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सैलाब श्रद्धालुओं का आंकड़ा 49 लाख पार
देहरादून: उत्तराखंड में चारधाम यात्रा 2026 को लेकर श्रद्धालुओं का उत्साह बरकरार है। मानसून की चुनौतियों और पहाड़ी क्षेत्रों में खराब मौसम के बावजूद बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री के साथ हेमकुंड साहिब पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की कुल संख्या 49 लाख के पार पहुंच गई है। अब मानसून के बाद यात्रा के दूसरे चरण में यात्रियों की संख्या बढ़ने की संभावना को देखते हुए सरकार और बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) ने तैयारियां तेज कर दी हैं।
बदरीनाथ-केदारनाथ में 31.62 लाख श्रद्धालु
ताजा आंकड़ों के अनुसार गुरुवार तक बदरीनाथ धाम में 16,86,438 श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। वहीं बाबा केदारनाथ के दर्शन करने वाले यात्रियों की संख्या 14,75,679 पहुंच चुकी है। इस तरह अकेले बदरीनाथ और केदारनाथ धाम में अब तक कुल 31,62,117 श्रद्धालु पहुंच चुके हैं। चारों धाम और हेमकुंड साहिब को मिलाकर यात्रियों का आंकड़ा 49 लाख से अधिक हो गया है। इससे कुछ दिन पहले 31 अगस्त तक बदरीनाथ में 16,78,008 और केदारनाथ में 14,73,325 श्रद्धालु दर्शन कर चुके थे। मानसून के बावजूद दोनों धामों में यात्रा लगातार जारी रहने से यह संख्या और बढ़ी है।
दूसरे चरण के लिए तैयारियां तेज
मानसून के बाद चारधाम यात्रा का दूसरा चरण शुरू होने जा रहा है। 15 सितंबर से यात्रा के दूसरे चरण को लेकर गतिविधियां तेज होने की उम्मीद है। बारिश कम होने और मौसम अनुकूल होने पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु धामों का रुख कर सकते हैं। इसी संभावित यात्री दबाव को देखते हुए व्यवस्थाओं को दुरुस्त किया जा रहा है। बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात कर बदरीनाथ और केदारनाथ में की जा रही तैयारियों की जानकारी दी है। मुख्यमंत्री को मंदिर परिसरों और यात्रियों की सुविधाओं से जुड़े कार्यों के बारे में भी अवगत कराया गया।
लाखों श्रद्धालुओं ने कराया पंजीकरण
यात्रा के लिए पंजीकरण के आंकड़े भी श्रद्धालुओं के उत्साह को दिखा रहे हैं। बदरीनाथ धाम के लिए करीब 19 लाख श्रद्धालुओं ने पंजीकरण कराया है, जबकि केदारनाथ के लिए पंजीकरण की संख्या 20.50 लाख से अधिक बताई गई है। दूसरे चरण में पंजीकृत श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या धामों तक पहुंच सकती है। इसे देखते हुए प्रशासन और मंदिर समिति का जोर भीड़ प्रबंधन और सुगम दर्शन पर है। खासकर केदारनाथ जैसे उच्च हिमालयी क्षेत्र में मौसम और पैदल मार्ग की स्थिति यात्रा संचालन के लिए महत्वपूर्ण रहती है।
पेयजल से स्वच्छता तक व्यवस्थाओं की समीक्षा
बीकेटीसी दूसरे चरण से पहले मंदिर परिसरों में दर्शन व्यवस्था, स्वच्छता, पेयजल, बिजली और आवास जैसी आवश्यक सुविधाओं की समीक्षा कर रही है। संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को समय पर तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। मंदिर समिति का कहना है कि श्रद्धालुओं को सुरक्षित और सुगम दर्शन उपलब्ध कराना प्राथमिकता है। यात्रियों की संख्या बढ़ने पर मंदिर परिसर में कतार प्रबंधन, पेयजल और साफ-सफाई जैसी व्यवस्थाओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
मानसून में मौसम बना बड़ी चुनौती
चारधाम यात्रा के लिए मानसून का समय हमेशा चुनौतीपूर्ण रहता है। उत्तराखंड के पर्वतीय इलाकों में भारी बारिश के दौरान भूस्खलन, सड़क पर मलबा आने और पत्थर गिरने जैसी घटनाओं का खतरा रहता है। इसी वजह से श्रद्धालुओं से मौसम की जानकारी लेकर ही यात्रा पर निकलने की अपील की जाती रही है। इसके बावजूद इस वर्ष श्रद्धालुओं की आस्था पर मौसम का ज्यादा असर नहीं दिखाई दिया। अगस्त के अंतिम हिस्से में भी प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु चारधाम और हेमकुंड साहिब पहुंच रहे थे। 23 अगस्त तक कुल यात्रियों की संख्या 48 लाख के पार पहुंच चुकी थी, जो अब 49 लाख का आंकड़ा पार कर गई है।
यात्रियों से दिशा-निर्देश मानने की अपील
बीकेटीसी ने देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं से प्रशासन, मौसम विभाग और मंदिर समिति की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है। पर्वतीय क्षेत्रों में मौसम अचानक बदल सकता है, इसलिए यात्रा शुरू करने से पहले मार्ग और मौसम की स्थिति की जानकारी लेना महत्वपूर्ण है। अब प्रशासन का पूरा ध्यान सितंबर से बढ़ने वाले यात्री दबाव को संभालने पर है। 49 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं के दर्शन के बाद यात्रा का दूसरा चरण भी व्यस्त रहने की संभावना है। मौसम अनुकूल रहा तो आने वाले सप्ताहों में श्रद्धालुओं की संख्या में और तेजी से बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
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