उत्तराखंड

जनजातीय रंगों से सजा खटीमा CM धामी ने बताया ‘मिनी इंडिया’

Ratna Netam
4 Oct 2026 7:44 PM IST
जनजातीय रंगों से सजा खटीमा CM धामी ने बताया ‘मिनी इंडिया’
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खटीमा। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को खटीमा को ‘मिनी इंडिया’ बताते हुए कहा कि यहां अलग-अलग समुदायों और संस्कृतियों के लोग एक साथ रहते हैं। मुख्यमंत्री ने ‘उत्तराखंड आदि रंगोत्सव-2026 खटीमा’ में भाग लेते हुए क्षेत्र की सामाजिक और सांस्कृतिक विविधता का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि खटीमा में विभिन्न समुदायों की भागीदारी इसकी खास पहचान है।
राज्य जनजातीय अनुसंधान संस्थान की ओर से आयोजित तीन दिवसीय ‘उत्तराखंड आदि रंगोत्सव-2026’ का आयोजन खटीमा में पीलीभीत रोड स्थित नवीन मंडी परिसर में किया जा रहा है। यह महोत्सव 4 से 6 अक्टूबर तक चलेगा। आयोजन में जनजातीय कला, लोक संस्कृति, हस्तशिल्प, पारंपरिक उत्पादों और खान-पान की विविधता देखने को मिल रही है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए खटीमा की विविधता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि अलग-अलग पृष्ठभूमि और समुदायों से जुड़े लोग यहां मिल-जुलकर रहते हैं। यही वजह है कि खटीमा को ‘मिनी इंडिया’ के रूप में देखा जा सकता है। उन्होंने रंगोत्सव में विभिन्न समुदायों के लोगों की भागीदारी का भी जिक्र किया।
आदि रंगोत्सव का उद्देश्य जनजातीय समुदायों की कला, संस्कृति और परंपराओं को व्यापक मंच उपलब्ध कराना है। महोत्सव के माध्यम से कलाकारों और कारीगरों को अपनी प्रतिभा और पारंपरिक कौशल प्रदर्शित करने का अवसर मिल रहा है। इसके साथ ही आम लोगों को भी देश के अलग-अलग हिस्सों की जनजातीय संस्कृति को करीब से जानने का मौका मिल रहा है।
तीन दिवसीय आयोजन में सांस्कृतिक प्रस्तुतियां प्रमुख आकर्षण हैं। पारंपरिक लोकनृत्य, लोकगीत और विभिन्न जनजातीय समुदायों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से उनकी विशिष्ट जीवनशैली और परंपराओं की झलक दिखाई जा रही है। इस तरह रंगोत्सव केवल मनोरंजन का आयोजन न होकर सांस्कृतिक विरासत को सामने लाने का मंच भी बना है।
जनजातीय समुदायों की पहचान उनकी विशिष्ट कला और हस्तशिल्प से भी जुड़ी हुई है। पीढ़ियों से चली आ रही कारीगरी में स्थानीय संसाधनों और पारंपरिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है। आदि रंगोत्सव में ऐसे उत्पादों को प्रदर्शित करने से कारीगरों को अपनी कला लोगों तक पहुंचाने का अवसर मिल रहा है।
मुख्यमंत्री धामी ने जनजातीय संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण के महत्व पर भी जोर दिया। जनजातीय समाज की परंपराएं, कला, संगीत, नृत्य और जीवनशैली देश की सांस्कृतिक विविधता का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ऐसे आयोजनों के जरिए इन परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के साथ उनके संरक्षण को भी बढ़ावा मिलता है।
खटीमा और आसपास के क्षेत्रों में जनजातीय समुदायों की महत्वपूर्ण मौजूदगी है। ऐसे में यहां आदि रंगोत्सव का आयोजन स्थानीय स्तर पर विशेष महत्व रखता है। महोत्सव में स्थानीय लोगों के साथ अलग-अलग क्षेत्रों से आए प्रतिभागियों की भागीदारी सांस्कृतिक संवाद को बढ़ावा दे रही है।
मुख्यमंत्री द्वारा खटीमा को ‘मिनी इंडिया’ कहे जाने के पीछे भी इसी सामाजिक विविधता को प्रमुख कारण माना जा रहा है। क्षेत्र में अलग-अलग भाषाई, सामाजिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि के लोग रहते हैं। मुख्यमंत्री ने इसी विविधता में एकता को खटीमा की ताकत के रूप में प्रस्तुत किया।
महोत्सव में जनजातीय खान-पान को भी प्रमुखता दी गई है। विभिन्न समुदायों के पारंपरिक व्यंजन लोगों को उनकी जीवनशैली और स्थानीय खाद्य परंपराओं से परिचित करा रहे हैं। इसके साथ हस्तनिर्मित वस्तुएं और पारंपरिक उत्पाद भी आयोजन का हिस्सा हैं।
इस तरह के आयोजनों का आर्थिक पहलू भी महत्वपूर्ण है। जनजातीय कलाकारों और कारीगरों के लिए अपने उत्पादों को सीधे लोगों के सामने प्रस्तुत करना बाजार तक पहुंच बनाने का अवसर देता है। इससे पारंपरिक कला और हस्तशिल्प से जुड़े लोगों के लिए आजीविका के नए अवसर तैयार करने में भी मदद मिल सकती है।
राज्य जनजातीय अनुसंधान संस्थान की ओर से आयोजित रंगोत्सव जनजातीय संस्कृति के अध्ययन, संरक्षण और प्रचार-प्रसार की दिशा में भी महत्वपूर्ण मंच है। जनजातीय समाज से जुड़े इतिहास, परंपराओं और सांस्कृतिक विशेषताओं को व्यापक समाज तक पहुंचाने में ऐसे कार्यक्रम उपयोगी भूमिका निभाते हैं।
मुख्यमंत्री धामी की मौजूदगी में आयोजित कार्यक्रम में जनजातीय संस्कृति के साथ उत्तराखंड की सामाजिक विविधता भी प्रमुख रूप से सामने आई। मुख्यमंत्री ने विभिन्न समुदायों के बीच आपसी सहयोग और सांस्कृतिक जुड़ाव को महत्वपूर्ण बताया। उनका कहना था कि खटीमा की यही विशेषता इसे एक छोटे भारत जैसी पहचान देती है।
आदि रंगोत्सव में युवाओं की भागीदारी भी महत्वपूर्ण है। नई पीढ़ी जब पारंपरिक नृत्य, संगीत, हस्तशिल्प और अन्य सांस्कृतिक गतिविधियों को करीब से देखती है, तो उसे अपनी विरासत को समझने का अवसर मिलता है। इससे जनजातीय परंपराओं को भविष्य तक पहुंचाने में सहायता मिल सकती है।
तीन दिनों तक चलने वाले इस महोत्सव में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ जनजातीय कलाकारों और कारीगरों की प्रतिभा को सामने लाने पर विशेष जोर दिया गया है। नवीन मंडी परिसर इस दौरान विभिन्न संस्कृतियों, परंपराओं और कलाओं के संगम का केंद्र बना हुआ है।
‘उत्तराखंड आदि रंगोत्सव-2026 खटीमा’ में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की भागीदारी और खटीमा को ‘मिनी इंडिया’ बताने वाला उनका बयान आयोजन का प्रमुख आकर्षण रहा। 4 से 6 अक्टूबर तक चलने वाला यह रंगोत्सव जनजातीय कला और संस्कृति को मंच देने के साथ सामाजिक विविधता और सांस्कृतिक एकता का संदेश भी दे रहा है।
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