उत्तराखंड

दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर भारी वाहनों के हादसे बढ़े

Kavita2
7 Oct 2026 3:19 PM IST
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर भारी वाहनों के हादसे बढ़े
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देहरादून। दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे से डाट काली मंदिर की सुरंग पार कर दून में प्रवेश करते ही भारी वाहनों के लिए सड़क की परिस्थितियां अचानक बदल जाती हैं। लंबी ढलान से नीचे उतरते ट्रक पहले ही गति पकड़ चुके होते हैं, जबकि कुछ ही दूरी पर उन्हें चेकपोस्ट, सड़क कट, स्थानीय यातायात और आबादी वाले हिस्सों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में चालक की मामूली चूक भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।

आशारोड़ी और मोहब्बेवाला के बीच लगातार सामने आ रहे भारी वाहन हादसों ने अब केवल वाहनों के ब्रेक फेल होने के सवाल से आगे बढ़कर सड़क की पूरी सुरक्षा संरचना पर चिंता खड़ी कर दी है। मंगलवार को आशारोड़ी चेकपोस्ट के पास सीमेंट से लदे एक ट्रक ने पुलिस बस को पीछे से टक्कर मार दी। हादसे में कई पुलिसकर्मी घायल हो गए।

इस घटना की गंभीरता इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि एक सप्ताह के भीतर इसी क्षेत्र में यह दूसरा बड़ा ट्रक हादसा बताया जा रहा है। लगातार हो रही दुर्घटनाओं के बाद अब इस मार्ग की तकनीकी संरचना, ढलान, गति नियंत्रण और यातायात प्रबंधन की दोबारा समीक्षा की मांग उठने लगी है।

डाट काली मंदिर की सुरंग से दून की ओर उतरते समय सड़क का लंबा हिस्सा ढलान वाला है। भारी सामान लदे ट्रकों के लिए इस हिस्से में वाहन की गति नियंत्रित रखना बड़ी चुनौती बन सकती है। लगातार ब्रेक लगाने की स्थिति में ब्रेक सिस्टम पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और यदि वाहन की तकनीकी स्थिति ठीक न हो तो खतरा और बढ़ सकता है।

इसके बाद आशारोड़ी क्षेत्र में चेकपोस्ट और स्थानीय यातायात शुरू हो जाता है। एक्सप्रेसवे से तेज गति में आने वाले वाहन अचानक ऐसी सड़क व्यवस्था में प्रवेश करते हैं, जहां गति कम करनी पड़ती है और आसपास स्थानीय वाहन भी मौजूद रहते हैं।

ऐसी स्थिति में ट्रक चालक को बहुत कम समय में वाहन की गति नियंत्रित करनी होती है। यदि आगे किसी चेकपोस्ट पर वाहन खड़े हों या ट्रैफिक धीमा हो जाए तो पीछे से तेज गति में आ रहे भारी वाहन के लिए टक्कर से बचना मुश्किल हो सकता है।

मंगलवार की घटना में सीमेंट लदे ट्रक ने पुलिस बस को पीछे से टक्कर मार दी। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और घायल पुलिसकर्मियों को उपचार के लिए भेजा गया। दुर्घटना के बाद एक बार फिर इस पूरे मार्ग की सुरक्षा व्यवस्था पर चर्चा तेज हो गई।

स्थानीय स्तर पर यह सवाल उठ रहा है कि क्या एक्सप्रेसवे से नीचे उतरते भारी वाहनों के लिए पर्याप्त चेतावनी संकेत और गति नियंत्रण व्यवस्था मौजूद है। सड़क पर ऐसे स्थानों पर पहले से स्पष्ट संकेत दिए जाने चाहिए, जहां आगे चेकपोस्ट, आबादी या धीमा यातायात हो।

विशेषज्ञों का मानना है कि किसी एक हादसे को चालक की गलती या ब्रेक फेल होने से जोड़ा जा सकता है, लेकिन यदि एक ही क्षेत्र में लगातार भारी वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हों तो सड़क की तकनीकी जांच जरूरी हो जाती है।

ऐसी जांच में ढलान का कोण, सड़क के मोड़, दृश्यता, सड़क की सतह, वाहनों की वास्तविक गति और यातायात के मिश्रण का संयुक्त अध्ययन किया जाना चाहिए। इससे यह पता लगाया जा सकता है कि सड़क की मौजूदा डिजाइन में किसी सुधार की जरूरत है या नहीं।

भारी वाहनों और स्थानीय यातायात का एक ही हिस्से में अचानक मिलना भी जोखिम बढ़ाता है। एक्सप्रेसवे पर लंबी दूरी से तेज गति में आने वाले ट्रकों को जब शहर के सामान्य ट्रैफिक में प्रवेश करना पड़ता है तो उन्हें अपनी गति में तेजी से बदलाव करना पड़ता है।

यदि चालक को पर्याप्त दूरी पहले से चेतावनी मिल जाए तो वह वाहन की गति धीरे-धीरे कम कर सकता है। इसके लिए स्पीड लिमिट बोर्ड, चेतावनी संकेत, फ्लैशिंग लाइट और सड़क पर रंबल स्ट्रिप जैसी व्यवस्थाएं उपयोगी हो सकती हैं।

विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि ढलान वाले मार्गों पर भारी वाहनों के लिए अलग सुरक्षा व्यवस्था की जरूरत होती है। जहां जोखिम अधिक हो वहां आपात स्थिति में वाहन रोकने के लिए विशेष स्थान या एस्केप लेन जैसी व्यवस्था पर विचार किया जा सकता है।

आशारोड़ी चेकपोस्ट की स्थिति भी इस पूरे मामले में महत्वपूर्ण है। यदि भारी वाहन सीधे ढलान से उतरते हुए चेकपोस्ट के पास पहुंचते हैं तो उन्हें पहले ही गति कम करने के स्पष्ट निर्देश और पर्याप्त दूरी मिलनी चाहिए।

सड़क सुरक्षा के लिए केवल वाहन की तकनीकी जांच पर्याप्त नहीं है। चालक की थकान, वाहन पर लदा वजन और ब्रेक की स्थिति जैसे पहलुओं के साथ सड़क के डिजाइन की भी समान रूप से समीक्षा जरूरी होती है।

सीमेंट जैसे भारी माल से लदे ट्रक का वजन ज्यादा होने के कारण उसे रोकने के लिए सामान्य वाहन से अधिक दूरी चाहिए होती है। ढलान पर यह दूरी और बढ़ जाती है।

यदि आगे अचानक कोई वाहन धीमा हो जाए या खड़ा मिले तो भारी ट्रक के चालक के पास प्रतिक्रिया के लिए बेहद कम समय बचता है। इसी कारण ऐसे मार्गों पर गति नियंत्रण सबसे महत्वपूर्ण उपाय माना जाता है।

लगातार हादसों के बाद इस क्षेत्र में भारी वाहनों के लिए निर्धारित गति सीमा के पालन की भी जांच की जा सकती है। जरूरत पड़ने पर स्पीड कैमरे और अतिरिक्त निगरानी व्यवस्था लागू की जा सकती है।

इसके अलावा भारी वाहनों की फिटनेस और ब्रेक सिस्टम की जांच भी बढ़ाई जा सकती है। लंबे ढलान वाले मार्गों पर खराब ब्रेक वाले वाहन बड़े खतरे का कारण बन सकते हैं।

स्थानीय यातायात और एक्सप्रेसवे यातायात को अलग-अलग करने की संभावना भी तकनीकी जांच का हिस्सा हो सकती है। जहां संभव हो, भारी वाहनों के लिए अलग लेन या नियंत्रित प्रवेश व्यवस्था से जोखिम कम किया जा सकता है।

एक सप्ताह के भीतर दो बड़े ट्रक हादसे सामने आने के बाद अब दुर्घटनाओं के पैटर्न को भी समझना जरूरी हो गया है। यदि दोनों घटनाएं लगभग समान परिस्थितियों में हुई हैं तो यह सड़क के किसी विशेष हिस्से में मौजूद खतरे की ओर संकेत कर सकता है।

सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों की राय है कि केवल दुर्घटना के बाद वाहन और चालक की जांच करने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। पूरे क्षेत्र का रोड सेफ्टी ऑडिट कर यह देखा जाना चाहिए कि किस स्थान पर वाहन सबसे अधिक गति पकड़ते हैं और कहां उन्हें अचानक धीमा होना पड़ता है।

मंगलवार के हादसे के बाद पुलिस और संबंधित एजेंसियों के सामने यह चुनौती है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए तत्काल और दीर्घकालिक दोनों उपाय किए जाएं।

तत्काल उपायों में चेतावनी बोर्ड, अतिरिक्त बैरिकेड, गति सीमा का सख्त पालन और रात के समय बेहतर प्रकाश व्यवस्था शामिल हो सकती है। वहीं दीर्घकालिक समाधान के लिए सड़क डिजाइन और यातायात प्रवाह की तकनीकी समीक्षा जरूरी होगी।

फिलहाल आशारोड़ी और मोहब्बेवाला के बीच लगातार हो रहे भारी वाहन हादसों ने सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मंगलवार को सीमेंट लदे ट्रक द्वारा पुलिस बस को टक्कर मारने और कई पुलिसकर्मियों के घायल होने की घटना ने इस चिंता को और बढ़ा दिया है।

अब नजर इस बात पर है कि संबंधित विभाग इस मार्ग की तकनीकी जांच कराते हैं या नहीं और भारी वाहनों के लिए सुरक्षा व्यवस्था में क्या बदलाव किए जाते हैं। लगातार दुर्घटनाओं के बीच यह साफ है कि केवल ‘ब्रेक फेल’ को कारण मानना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि सड़क की पूरी सुरक्षा संरचना की समीक्षा जरूरी है।

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