उत्तराखंड
कांग्रेस में उमेश कुमार की एंट्री की चर्चा पर गरमाई सियासत
Ratna Netam
7 Oct 2026 2:58 PM IST

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देहरादून। उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के भीतर सियासी खींचतान तेज होती दिखाई दे रही है। पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत ने खानपुर से निर्दलीय विधायक उमेश कुमार को लेकर पार्टी के कुछ नेताओं पर निशाना साधा है। रावत ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बिना नाम लिए कहा कि जिस व्यक्ति की वजह से कांग्रेस को उत्तराखंड की सत्ता से लंबे समय तक बाहर रहना पड़ा, आज उसी व्यक्ति को कुछ लोग “हीरो” बनाने में जुटे हैं। उमेश कुमार के कांग्रेस में शामिल होने की चर्चाओं के बीच रावत का यह बयान सामने आया है।
हरीश रावत ने अपनी पोस्ट में वर्ष 2016 के राजनीतिक घटनाक्रम का जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय कांग्रेस सरकार को गिराने में जिस व्यक्ति की अहम भूमिका रही, आज हरिद्वार और आसपास के कांग्रेस के कुछ नेता उसी व्यक्ति का महिमामंडन कर रहे हैं। रावत ने कहा कि ऐसी कोशिश पहले लोकसभा चुनाव के दौरान भी की गई थी और अब यह प्रयास और तेज हो गया है। हालांकि उन्होंने अपनी पोस्ट में उमेश कुमार का सीधे नाम नहीं लिया। मौजूदा राजनीतिक संदर्भ और सार्वजनिक चर्चाओं में उनके बयान को खानपुर विधायक से जोड़कर देखा जा रहा है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि जो व्यक्ति कांग्रेस सरकार गिराने का “जरिया” बना, वही अब कुछ लोगों को सम्माननीय नजर आ रहा है। रावत ने उसके पास मौजूद संपत्ति को लेकर भी आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि संबंधित व्यक्ति ने अपनी संपत्ति का बड़ा हिस्सा 2016 के बाद हासिल किया। यह हरीश रावत का राजनीतिक आरोप है और उपलब्ध जानकारी में इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है।
रावत ने अपनी पोस्ट में कहा कि जिस व्यक्ति ने सरकार बचाने के लिए संघर्ष किया, उसे अब कुछ लोग “विलेन” की तरह देखते हैं, जबकि जिस व्यक्ति को वह अपनी सरकार के पतन के लिए जिम्मेदार मानते हैं, उसे “हीरो” बनाया जा रहा है। उन्होंने इसे कांग्रेस के लिए चिंताजनक स्थिति बताया। रावत के बयान से साफ है कि उमेश कुमार को लेकर उत्तराखंड कांग्रेस के भीतर चल रही चर्चा से वह नाराज हैं।
इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि वर्ष 2016 के उत्तराखंड राजनीतिक संकट से जुड़ी है। उस समय हरीश रावत राज्य के मुख्यमंत्री थे और उनकी सरकार गंभीर राजनीतिक संकट में आ गई थी। इसी दौर में एक कथित स्टिंग ऑपरेशन सामने आया था, जिसमें तत्कालीन मुख्यमंत्री से जुड़ी बातचीत को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हुआ था। उमेश कुमार उस समय पत्रकारिता से जुड़े थे और बाद के वर्षों में उन्होंने सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया। वर्ष 2022 के उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में वह खानपुर सीट से निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर जीतकर विधायक बने।
अब आगामी विधानसभा चुनाव से पहले उमेश कुमार के कांग्रेस में शामिल होने की अटकलों ने पार्टी के भीतर नया विवाद खड़ा कर दिया है। रिपोर्टों के मुताबिक, इसी संभावित राजनीतिक घटनाक्रम को लेकर हरीश रावत ने खुलकर अपनी नाराजगी जताई है। रावत खुद भी हाल के दिनों में हरिद्वार क्षेत्र में राजनीतिक रूप से सक्रिय हुए हैं और खानपुर सीट से चुनाव लड़ने की इच्छा जता चुके हैं। ऐसे में खानपुर और उमेश कुमार से जुड़ा मामला राजनीतिक रूप से और महत्वपूर्ण हो गया है।
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब उत्तराखंड कांग्रेस पहले से ही अंदरूनी खींचतान से गुजर रही है। हरीश रावत की हालिया ‘धन्यवाद एवं जनसंवाद यात्रा’ को लेकर पार्टी नेतृत्व और प्रदेश संगठन के बीच मतभेद सामने आए हैं। कांग्रेस नेतृत्व की ओर से सामूहिक अभियान पर जोर दिया गया है, जबकि रावत अपने स्तर पर जनता से संवाद के कार्यक्रम चला रहे थे। पार्टी के कुछ नेताओं ने इस तरह के अलग-अलग कार्यक्रमों पर सवाल भी उठाए हैं।
हरीश रावत को कांग्रेस आलाकमान की ओर से दिल्ली बुलाए जाने की खबरें भी सामने आई हैं। पार्टी के भीतर चुनाव से पहले संगठनात्मक एकजुटता बनाए रखने और नेताओं के बीच समन्वय स्थापित करने की कोशिश की जा रही है। रावत ने भी संकेत दिया है कि वह पार्टी नेतृत्व के सामने अपनी बात रखेंगे। उमेश कुमार को लेकर उठी नई बहस के बाद यह बातचीत और अहम मानी जा रही है।
उत्तराखंड की राजनीति में 2016 का घटनाक्रम आज भी कांग्रेस के भीतर एक संवेदनशील मुद्दा है। हरीश रावत कई बार उस राजनीतिक संकट का जिक्र करते हुए इसे अपने कार्यकाल और पार्टी के लिए बड़ा झटका बता चुके हैं। अब उसी दौर से जुड़े व्यक्ति के कांग्रेस में संभावित प्रवेश की चर्चा ने पुरानी राजनीतिक कड़वाहट को दोबारा सतह पर ला दिया है।
फिलहाल उमेश कुमार के कांग्रेस में शामिल होने को लेकर आधिकारिक रूप से कोई अंतिम घोषणा सामने नहीं आई है। इसे लेकर मीडिया और राजनीतिक हलकों में चर्चाएं चल रही हैं। हरीश रावत की पोस्ट ने जरूर संकेत दिया है कि यदि इस दिशा में पार्टी कोई कदम उठाती है तो संगठन के भीतर विरोध और तेज हो सकता है।
आगामी विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के लिए यह मामला केवल किसी एक नेता के पार्टी में आने या न आने तक सीमित नहीं है। इसके साथ वर्ष 2016 की राजनीतिक घटनाएं, संगठन के भीतर पुराने मतभेद और हरिद्वार क्षेत्र की चुनावी राजनीति भी जुड़ गई है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि कांग्रेस नेतृत्व इस विवाद को किस तरह संभालता है और उमेश कुमार को लेकर पार्टी का आधिकारिक रुख क्या रहता है।
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