उत्तर प्रदेश

वैशाली एक्सप्रेस में 30.23 लाख के साथ युवक पकड़ा गया, रकम के स्रोत की जांच शुरू

Kavita2
14 Sept 2026 4:48 PM IST
वैशाली एक्सप्रेस में 30.23 लाख के साथ युवक पकड़ा गया, रकम के स्रोत की जांच शुरू
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देवरिया: वैशाली एक्सप्रेस के जनरल कोच में एक युवक के बैग से 30 लाख 23 हजार 200 रुपये नकद मिलने का मामला सामने आया है। राजकीय रेलवे पुलिस यानी जीआरपी ने चेकिंग के दौरान युवक को पकड़कर रकम अपने कब्जे में ले ली। युवक इतनी बड़ी नकदी से संबंधित कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका। वह यह भी स्पष्ट नहीं कर पाया कि रुपये किसके हैं और गोरखपुर में किस व्यक्ति तक पहुंचाए जाने थे। नकदी का स्रोत संदिग्ध मिलने पर आयकर विभाग को सूचना दी गई है।

पकड़े गए युवक की पहचान मुकेश शर्मा के रूप में हुई है। उसकी उम्र करीब 21 वर्ष बताई गई है और वह राजस्थान के चूरू जिले का रहने वाला है। वर्तमान में वह गोरखपुर के कूड़ाघाट इलाके में काली मंदिर के पास किराये के मकान में रहता था। शुरुआती पूछताछ में उसने बताया कि वह सिवान से रुपये लेकर गोरखपुर जा रहा था। वहां पहुंचने के बाद उसे मोबाइल फोन पर संबंधित व्यक्ति का नाम और स्थान बताया जाना था।

चेकिंग के दौरान युवक की गतिविधि पर हुआ संदेह

जीआरपी के अनुसार, वैशाली एक्सप्रेस के देवरिया सदर रेलवे स्टेशन पहुंचने पर जनरल कोच में नियमित चेकिंग की जा रही थी। इसी दौरान पीठ पर बैग लिए एक युवक पुलिसकर्मियों को देखकर असहज और घबराया हुआ दिखाई दिया। पुलिसकर्मियों ने उससे पूछताछ करने का प्रयास किया, लेकिन तब तक ट्रेन स्टेशन से आगे बढ़ चुकी थी।

संदेह गहराने पर पुलिसकर्मियों ने देवरिया से गोरखपुर के बीच युवक को रोककर उसके बैग की तलाशी ली। बैग खोलते ही उसमें नोटों की कई गड्डियां मिलीं। इतनी बड़ी मात्रा में नकदी देखकर पुलिसकर्मी भी हैरान रह गए। युवक से तत्काल रुपयों के संबंध में सवाल किए गए, लेकिन वह संतोषजनक उत्तर नहीं दे पाया।

इसके बाद युवक को नकदी समेत देवरिया स्थित जीआरपी थाने लाया गया। नोटों की गिनती कराई गई तो कुल रकम 30 लाख 23 हजार 200 रुपये निकली। नकदी को नियमानुसार सुरक्षित रखवाते हुए मामले की सूचना वरिष्ठ अधिकारियों और आयकर विभाग की गोरखपुर इकाई को दी गई।

सिवान से गोरखपुर पहुंचानी थी नकदी

पूछताछ में युवक ने बताया कि उसे यह नकदी सिवान से मिली थी। प्रारंभिक जानकारी में उसने अपने चचेरे भाई गोविंद के कहने पर रकम ले जाने की बात कही है। युवक का दावा है कि गोरखपुर पहुंचने के बाद उसके पास फोन आता और कॉल करने वाला व्यक्ति उसे बताता कि रुपये किसे सौंपने हैं।

मुकेश ने कथित तौर पर यह भी बताया कि उसका काम केवल एक स्थान से रुपये लेकर दूसरे व्यक्ति तक पहुंचाना था। बदले में उसे कमीशन मिलता था। हालांकि, कमीशन की रकम को लेकर सामने आई रिपोर्टों में अंतर है। एक रिपोर्ट में प्रति एक लाख रुपये पर 250 रुपये, जबकि दूसरी में 400 से 500 रुपये मिलने की बात कही गई है। इसकी आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

जीआरपी अब युवक के मोबाइल फोन में मिले नंबरों की जांच कर रही है। खास तौर पर उस व्यक्ति की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है, जिसे गोरखपुर में रकम लेनी थी। युवक के कॉल विवरण, मैसेज और हाल के संपर्कों के आधार पर नकदी भेजने और प्राप्त करने वाले लोगों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।

आयकर विभाग ने की युवक से पूछताछ

मामले की जानकारी मिलने के बाद गोरखपुर से आयकर विभाग की टीम देवरिया पहुंची। टीम ने युवक से कई घंटे तक पूछताछ की और रकम के स्रोत, उसके संभावित मालिक तथा प्रस्तावित लेनदेन के संबंध में जानकारी मांगी। युवक से नकदी की निकासी की पर्ची, बैंक खाते का विवरण, कारोबारी लेनदेन की रसीद या अन्य प्रमाण प्रस्तुत करने को कहा गया, लेकिन वह तत्काल कोई दस्तावेज नहीं दे सका।

जीआरपी प्रभारी निरीक्षक राजेश कुमार पांडेय के अनुसार, रकम कहां से आई और इसे गोरखपुर में किसे दिया जाना था, इसका पता लगाया जा रहा है। जांच एजेंसियां यह भी जानने की कोशिश कर रही हैं कि युवक ने इससे पहले कितनी बार इस तरह नकदी पहुंचाई और इसके पीछे कोई संगठित नेटवर्क सक्रिय है या नहीं।

बड़ी मात्रा में नकदी और उसके समर्थन में दस्तावेज नहीं मिलने के कारण इसके हवाला कारोबार से जुड़े होने का संदेह जताया जा रहा है। हालांकि, जांच पूरी होने से पहले रकम को हवाला की घोषित करना उचित नहीं होगा। केवल नकद धन रखने से अपने आप अपराध साबित नहीं होता, लेकिन संबंधित व्यक्ति को उसका वैध स्रोत और उद्देश्य बताना पड़ सकता है।

तारीख को लेकर रिपोर्टों में अंतर

घटना के समय को लेकर प्रकाशित खबरों में मामूली अंतर सामने आया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक युवक को शनिवार को ट्रेन में पकड़ा गया और रविवार को आयकर विभाग ने पूछताछ की। दूसरी रिपोर्ट में चेकिंग रविवार दोपहर करीब साढ़े तीन बजे होने का उल्लेख है। इसलिए कार्रवाई की सटीक तारीख और समय की अंतिम पुष्टि जीआरपी के आधिकारिक विवरण से होगी। युवक से 30 लाख 23 हजार 200 रुपये मिलने और उसके द्वारा दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जाने की जानकारी दोनों प्रमुख रिपोर्टों में समान है।

जीआरपी और आयकर विभाग की जांच में अब रकम के वास्तविक मालिक की पहचान सबसे महत्वपूर्ण होगी। मोबाइल नंबरों की पुष्टि और बैंकिंग रिकॉर्ड की जांच से स्पष्ट हो सकेगा कि नकदी किसी वैध व्यापारिक लेनदेन का हिस्सा थी या इसे गैरकानूनी माध्यम से एक स्थान से दूसरे स्थान पहुंचाया जा रहा था।

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