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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सड़क हादसों या अन्य दुर्घटनाओं में घायल होने वाले गोवंश को समय पर इलाज उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार नई आपातकालीन व्यवस्था विकसित करने जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के प्रत्येक जिले में गोवंश के लिए इमरजेंसी रेस्क्यू और त्वरित उपचार की व्यवस्था बनाने के निर्देश दिए हैं। सरकार का उद्देश्य घायल गोवंश को जल्द से जल्द बचाव और चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है, ताकि उपचार में देरी के कारण उनकी स्थिति गंभीर न हो।
शनिवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सरकारी आवास पर उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष और अन्य पदाधिकारियों के साथ बैठक हुई। बैठक में प्रदेश में गोवंश संरक्षण, गोशालाओं के प्रबंधन, पशुओं के स्वास्थ्य और भविष्य की कार्ययोजना से जुड़े विषयों पर चर्चा की गई। इसी दौरान हादसों में घायल गोवंश के लिए प्रत्येक जिले में आपातकालीन बचाव एवं त्वरित उपचार व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया गया।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद सड़क दुर्घटना या दूसरी आपात स्थिति में घायल गोवंश तक चिकित्सा सहायता जल्द पहुंचाने का लक्ष्य रहेगा। इसके लिए जिला स्तर पर रेस्क्यू और उपचार तंत्र को व्यवस्थित करने की योजना है। हालांकि उपलब्ध जानकारी में अभी इस सेवा के लिए अलग हेल्पलाइन नंबर, वाहनों की संख्या या संचालन शुरू होने की निश्चित तारीख घोषित नहीं की गई है। इसलिए इसे फिलहाल सरकार की प्रस्तावित व्यवस्था के रूप में देखा जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने बैठक में गोशालाओं के नियमित और प्रभावी निरीक्षण पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिया कि निरीक्षण का उद्देश्य केवल कमियों की पहचान करना नहीं होना चाहिए, बल्कि सामने आने वाली समस्याओं का समयबद्ध समाधान भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए। गोशालाओं में रहने वाले पशुओं को पर्याप्त भोजन, साफ-सफाई, हरा चारा, भूसा, पीने का पानी और उचित आश्रय मिले, इसकी लगातार निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं।
बीमार और कमजोर गोवंश की देखभाल को लेकर भी सरकार ने अधिकारियों को विशेष सतर्कता बरतने को कहा है। मुख्यमंत्री ने लम्पी स्किन डिजीज और खुरपका-मुंहपका जैसी बीमारियों से बचाव के लिए समय पर टीकाकरण और बीमारी की स्थिति में त्वरित उपचार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। गोवंश की देखभाल में लापरवाही पाए जाने पर संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की बात भी कही गई है।
बैठक में गोशालाओं के प्रबंधन को अधिक वैज्ञानिक और परिणाम आधारित बनाने पर भी चर्चा हुई। नर, मादा, बीमार और युवा गोवंश की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए उनकी अलग-अलग देखभाल सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। सरकार का मानना है कि केवल गोवंश को गोशाला तक पहुंचाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि वहां उनके स्वास्थ्य, पोषण और सुरक्षा की उचित व्यवस्था होना भी आवश्यक है।
इसके साथ ही गोवंश संरक्षण को ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़ने की योजना पर भी विचार किया गया। महिला स्वयं सहायता समूहों, किसान उत्पादक संगठनों यानी एफपीओ, किसानों और गोपालकों को गोबर एवं गोमूत्र आधारित उत्पादों के निर्माण से जोड़ने की तैयारी है। इनके निर्माण के साथ पैकेजिंग, मूल्यवर्धन और बाजार तक पहुंच की व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया गया है।
सरकार की योजना गोबर और गोमूत्र को उपयोगी उत्पादों के निर्माण के लिए इस्तेमाल करने की है। बैठक में जैविक खाद, जीवामृत, बीजामृत, प्राकृतिक कीट नियंत्रक और बायोगैस जैसे उत्पादों को बढ़ावा देने का सुझाव सामने आया। इसका उद्देश्य गोवंश संरक्षण के साथ किसानों और गोपालकों के लिए आय के अतिरिक्त अवसर विकसित करना है।
गो सेवा आयोग ने मुख्यमंत्री निराश्रित गोवंश सहभागिता योजना में किसानों और गोपालकों की भागीदारी बढ़ाने के सुझाव भी दिए। इसके तहत 10 गोवंश रखने वाले लाभार्थियों को प्राथमिकता के आधार पर कैटल शेड, बायोगैस संयंत्र और यूरिन टैंक जैसी सुविधाओं से जोड़ने का सुझाव रखा गया। साथ ही वर्षभर हरे चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए गोचर और चारागाह के विकास तथा स्थानीय किसानों के माध्यम से चारा उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया गया।
बैठक में पंचगव्य आधारित चिकित्सा की संभावनाओं पर वैज्ञानिक अध्ययन को आगे बढ़ाने की बात भी हुई। मुख्यमंत्री ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय एवं गो-अनुसंधान संस्थान, मथुरा और राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज, लखनऊ में इस दिशा में शोध एवं अनुसंधान को प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए हैं। इसका उद्देश्य इससे जुड़े दावों और संभावनाओं का वैज्ञानिक अध्ययन करना है।
सरकार की प्रस्तावित इमरजेंसी व्यवस्था विशेष रूप से उन परिस्थितियों के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है, जिनमें सड़क पर घूम रहे निराश्रित पशु वाहनों की चपेट में आकर घायल हो जाते हैं। ऐसे मामलों में समय पर पशु चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध नहीं होने से स्थिति गंभीर हो सकती है। जिला स्तर पर संगठित रेस्क्यू सिस्टम बनने पर घायल पशुओं को सुरक्षित स्थान या उपचार केंद्र तक पहुंचाने की प्रक्रिया को बेहतर तरीके से संचालित किया जा सकेगा।
इस योजना की व्यावहारिक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि जिलों में रेस्क्यू टीम, पशु चिकित्सक, उपचार केंद्र और परिवहन जैसी व्यवस्थाओं को किस स्वरूप में उपलब्ध कराया जाता है। फिलहाल सरकार ने हर जिले में आपातकालीन बचाव एवं त्वरित उपचार की व्यवस्था विकसित करने की दिशा तय की है। सेवा के विस्तृत संचालन नियम और अन्य तकनीकी विवरण सामने आने के बाद इसकी कार्यप्रणाली और स्पष्ट होगी।
बैठक में उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता, उपाध्यक्ष अतुल सिंह और महेश शुक्ल के साथ सदस्य राजेश सिंह सेंगर, रमाकांत उपाध्याय और दीपक गोयल समेत अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे। आयोग ने मुख्यमंत्री के सामने गोवंश संरक्षण और गोशाला प्रबंधन से जुड़े विभिन्न सुझाव रखे।
कुल मिलाकर उत्तर प्रदेश सरकार गोवंश संरक्षण की मौजूदा व्यवस्था में आपातकालीन चिकित्सा को जोड़ने की तैयारी कर रही है। हर जिले में रेस्क्यू और त्वरित उपचार तंत्र विकसित होने पर हादसों में घायल गोवंश को जल्द चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने का रास्ता बन सकता है। इसके साथ सरकार ने गोशालाओं की निगरानी, टीकाकरण, चारा-पानी, वैज्ञानिक प्रबंधन और गोबर-गोमूत्र आधारित ग्रामीण आर्थिक गतिविधियों को भी अपनी कार्ययोजना का हिस्सा बनाया है।
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