उत्तर प्रदेश

योगी सरकार का बड़ा डिजिटल प्लान, अब एक क्लिक पर मिलेगा न्याय

Rajeshwari Nishad
5 Nov 2026 5:08 PM IST
योगी सरकार का बड़ा डिजिटल प्लान, अब एक क्लिक पर मिलेगा न्याय
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने न्यायिक और पुलिस व्यवस्था के तकनीकी आधुनिकीकरण पर विशेष जोर दिया है। प्रदेश में अपराधों की जांच, फॉरेंसिक साक्ष्यों के संग्रह, अभियोजन और न्यायिक प्रक्रिया को तेज, पारदर्शी तथा प्रभावी बनाने के लिए डिजिटल तकनीक का उपयोग बढ़ाया जा रहा है। इसी दिशा में इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (ICJS 2.0) और क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम्स (CCTNS) को अधिक प्रभावी बनाने का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। इन प्रणालियों का उद्देश्य पुलिस, अदालतों, जेलों, अभियोजन विभाग और फॉरेंसिक प्रयोगशालाओं के बीच सूचनाओं का सुरक्षित आदान-प्रदान सुनिश्चित करना है।
राज्य सरकार का मानना है कि अपराधों की जांच और न्यायिक प्रक्रिया में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से न केवल समय की बचत होगी, बल्कि विभिन्न विभागों के बीच समन्वय भी बेहतर होगा। इससे आपराधिक मामलों के रिकॉर्ड का प्रबंधन आसान बनाने और जांच में देरी कम करने में मदद मिल सकती है।
एक डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़ेंगे न्याय व्यवस्था के पांच प्रमुख अंग
इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम यानी आईसीजेएस एक ऐसी डिजिटल व्यवस्था है, जिसका उद्देश्य आपराधिक न्याय प्रणाली के प्रमुख संस्थानों को आपस में जोड़ना है।इसके अंतर्गत पुलिस का सीसीटीएनएस, अदालतों का ई-कोर्ट्स, जेलों का ई-प्रिजन्स, फॉरेंसिक प्रयोगशालाओं का ई-फॉरेंसिक और अभियोजन विभाग का ई-प्रॉसिक्यूशन सिस्टम शामिल है।इन व्यवस्थाओं के बीच डेटा का आदान-प्रदान होने से किसी आपराधिक मामले से संबंधित आवश्यक जानकारी अधिक आसानी से उपलब्ध कराई जा सकेगी।केंद्रीय गृह मंत्रालय के अनुसार, आईसीजेएस परियोजना का उद्देश्य न्याय प्रदान करने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाना और विभिन्न विभागों के डिजिटल रिकॉर्ड को आपस में जोड़ना है।
पुलिस की जांच में तेजी लाने पर जोर
उत्तर प्रदेश पुलिस में सीसीटीएनएस के माध्यम से अपराध और अपराधियों से संबंधित जानकारी का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाता है।इस प्रणाली के जरिए एफआईआर, अपराध से संबंधित विवरण और अन्य पुलिस रिकॉर्ड को डिजिटल रूप में व्यवस्थित करने में मदद मिलती है।सीसीटीएनएस 2.0 के अंतर्गत मौजूदा व्यवस्थाओं को तकनीकी रूप से उन्नत बनाने और आईसीजेएस 2.0 के साथ बेहतर एकीकरण की दिशा में काम किया जा रहा है।उत्तर प्रदेश पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध निर्देशों में भी सीसीटीएनएस 2.0 एप्लिकेशन और डेटा को आईसीजेएस 2.0 क्लाउड से जोड़ने का उल्लेख किया गया है।इससे अलग-अलग स्थानों पर उपलब्ध अपराध संबंधी जानकारी का अधिक प्रभावी उपयोग संभव हो सकेगा।
फॉरेंसिक जांच को आधुनिक बनाने की तैयारी
योगी सरकार फॉरेंसिक जांच की क्षमता बढ़ाने पर भी विशेष ध्यान दे रही है। आपराधिक मामलों में वैज्ञानिक साक्ष्यों की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है।इसी उद्देश्य से उत्तर प्रदेश में ई-फॉरेंसिक 2.0 प्रणाली को आगे बढ़ाया गया है।राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, 15 जुलाई 2026 को लखनऊ स्थित राज्य फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला में ई-फॉरेंसिक 2.0 वेब एप्लिकेशन लॉन्च किया गया था।यह एप्लिकेशन केंद्रीय गृह मंत्रालय की आईसीजेएस 2.0 परियोजना का हिस्सा है।इस प्रणाली से फॉरेंसिक मामलों का डिजिटल पंजीकरण, रिकॉर्ड प्रबंधन और रिपोर्ट से जुड़ी प्रक्रियाओं को अधिक व्यवस्थित बनाने में सहायता मिलने की उम्मीद है।
अदालतों तक जल्दी पहुंचेगी जरूरी जानकारी
डिजिटल न्याय व्यवस्था का एक प्रमुख उद्देश्य अदालतों तक आपराधिक मामलों से संबंधित जानकारी समय पर उपलब्ध कराना है।कई मामलों में पुलिस रिकॉर्ड, मेडिकल रिपोर्ट और फॉरेंसिक जांच से जुड़े दस्तावेज अलग-अलग विभागों के पास होते हैं। इनके आदान-प्रदान में देरी होने से न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।आईसीजेएस 2.0 जैसी प्रणालियों के माध्यम से इन रिकॉर्ड को जोड़ने की दिशा में काम किया जा रहा है।इलाहाबाद हाईकोर्ट भी आपराधिक मामलों में अदालतों तक मेडिकल और फॉरेंसिक रिकॉर्ड की सीधी डिजिटल पहुंच सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दे चुका है।अदालत ने संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के माध्यम से
डिजिटल
व्यवस्थाओं को प्रभावी बनाने के निर्देश दिए थे।
मुख्य सचिव ने की थी परियोजना की समीक्षा
उत्तर प्रदेश में आईसीजेएस 2.0 परियोजना के क्रियान्वयन को लेकर प्रशासनिक स्तर पर भी समीक्षा की जा रही है।सितंबर 2026 में मुख्य सचिव एसपी गोयल की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय शीर्ष समिति की बैठक आयोजित हुई थी।बैठक में परियोजना की तकनीकी आवश्यकताओं, उपलब्ध संसाधनों, उपकरणों की खरीद और भविष्य की कार्ययोजना पर चर्चा की गई थी।मुख्य सचिव ने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने और परियोजना के क्रियान्वयन में तेजी लाने के निर्देश दिए थे।उन्होंने आईसीजेएस 2.0 डैशबोर्ड पर प्रदेश की प्रगति की नियमित निगरानी करने पर भी जोर दिया था, ताकि कार्यों की स्थिति स्पष्ट रहे और आवश्यक सुधार समय पर किए जा सकें।
डिजिटल साक्ष्यों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान
आधुनिक आपराधिक न्याय व्यवस्था में डिजिटल साक्ष्यों की सुरक्षा भी महत्वपूर्ण विषय है।मोबाइल फोन, सीसीटीवी फुटेज, इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेज और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड कई मामलों में जांच का महत्वपूर्ण आधार बनते हैं।ऐसे साक्ष्यों का सुरक्षित संग्रह, संरक्षण और अदालत में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार प्रस्तुतीकरण आवश्यक होता है।उत्तर प्रदेश सरकार ने वर्ष 2026 में ई-साक्ष्य प्रबंधन और इलेक्ट्रॉनिक आदेशिकाओं से संबंधित नियमों को भी स्वीकृति दी थी।इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य साक्ष्यों के प्रबंधन और कानूनी दस्तावेजों की प्रक्रिया में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाना है।इससे दस्तावेजों की सुरक्षा और न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है।
पुलिसकर्मियों को तकनीकी प्रशिक्षण भी जरूरी
डिजिटल व्यवस्था का प्रभावी संचालन तभी संभव होगा, जब उससे जुड़े कर्मचारी और अधिकारी तकनीकी रूप से प्रशिक्षित हों।इसी को ध्यान में रखते हुए पुलिसकर्मियों को सीसीटीएनएस, साइबर सुरक्षा, डिजिटल दस्तावेजों और आधुनिक जांच तकनीकों का प्रशिक्षण देने पर जोर दिया जा रहा है।उत्तर प्रदेश पुलिस ने जनवरी 2026 में डिजिटल कौशल, कंप्यूटर नेटवर्किंग और साइबर सुरक्षा से संबंधित प्रशिक्षण कार्यक्रम भी
आयोजित
किया था।अधिकारियों का मानना है कि तकनीकी प्रशिक्षण से पुलिसकर्मियों की कार्यक्षमता बढ़ेगी और डिजिटल प्रणालियों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा।
आम जनता को क्या होगा फायदा?
सरकार की इन पहलों से आम नागरिकों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है।आपराधिक मामलों में दस्तावेजों का बेहतर प्रबंधन होने से संबंधित विभागों के बीच सूचना भेजने में लगने वाला समय कम हो सकता है।इसके अलावा अदालतों, पुलिस और अभियोजन विभाग के बीच समन्वय बेहतर होने से मामलों की प्रगति पर निगरानी रखना आसान होगा।हालांकि, डिजिटल प्रणाली से जुड़ने का अर्थ यह नहीं है कि सभी मुकदमों का निस्तारण तत्काल हो जाएगा। न्यायिक प्रक्रिया की गति साक्ष्यों, सुनवाई, उपलब्ध संसाधनों और अन्य कानूनी प्रक्रियाओं पर भी निर्भर करती है।योगी सरकार की डिजिटल पहल का मुख्य उद्देश्य अपराधों की जांच को वैज्ञानिक आधार देना, प्रशासनिक दक्षता बढ़ाना और न्यायिक प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना है।
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