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दिव्यांग छात्राओं को मुफ्त ई-ट्राईसाइकिल देगी योगी सरकार, पढ़ें अपडेट

बांदा। उत्तर प्रदेश सरकार ने बुंदेलखंड क्षेत्र की दिव्यांग छात्राओं को शिक्षा से जोड़ने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में संचालित इस योजना के तहत स्कूल, कॉलेज तथा तकनीकी एवं व्यावसायिक प्रशिक्षण संस्थानों में अध्ययनरत पात्र दिव्यांग छात्राओं को निःशुल्क मोटराइज्ड ई-ट्राईसाइकिल उपलब्ध कराई जाएगी। योजना का उद्देश्य आवागमन की समस्या को दूर कर दिव्यांग छात्राओं की शिक्षा को निर्बाध बनाना और उन्हें स्वतंत्र रूप से अपने शिक्षण संस्थानों तक पहुंचने में सक्षम बनाना है।
योजना के प्रथम चरण में बुंदेलखंड क्षेत्र के जिलों को शामिल किया गया है। बांदा जिले की चारों विधानसभा क्षेत्रों सदर, तिंदवारी, बबेरू और नरैनी से 20-20 छात्राओं का चयन किया जाएगा। इस प्रकार जिले की कुल 80 पात्र दिव्यांग छात्राओं को ई-ट्राईसाइकिल प्रदान की जाएगी। दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग ने पात्र लाभार्थियों की पहचान और आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है।
सरकार का कहना है कि कई दिव्यांग छात्राएं केवल परिवहन की कठिनाइयों के कारण नियमित रूप से विद्यालय या कॉलेज नहीं पहुंच पाती हैं। ऐसे में ई-ट्राईसाइकिल मिलने से उनकी पढ़ाई बाधित नहीं होगी, समय की बचत होगी और उन्हें दूसरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। इससे उनकी शिक्षा के साथ-साथ रोजगार और कौशल विकास के अवसर भी बढ़ेंगे।
योजना के तहत 16 वर्ष या उससे अधिक आयु की ऐसी छात्राएं आवेदन कर सकती हैं, जो किसी मान्यता प्राप्त विद्यालय, महाविद्यालय या तकनीकी एवं व्यावसायिक प्रशिक्षण संस्थान में नियमित रूप से अध्ययनरत हों। आवेदक के पास वैध दिव्यांगता प्रमाण पत्र या यूडीआईडी (UDID) कार्ड होना अनिवार्य है। आर्थिक रूप से कमजोर तथा गरीबी रेखा (BPL) से नीचे जीवनयापन करने वाले परिवारों की छात्राओं को प्राथमिकता दी जाएगी।
आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन रखी गई है। इच्छुक छात्राएं उत्तर प्रदेश दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर आवेदन कर सकती हैं। आवेदन के साथ आधार कार्ड, आय प्रमाण पत्र, दिव्यांगता प्रमाण पत्र या यूडीआईडी कार्ड, अध्ययन प्रमाण पत्र, पासपोर्ट आकार का फोटो तथा अन्य आवश्यक दस्तावेज अपलोड करने होंगे। दस्तावेजों के सत्यापन के बाद पात्र छात्राओं का चयन किया जाएगा।
यदि किसी छात्रा को ऑनलाइन आवेदन में कठिनाई आती है तो वह जिला दिव्यांगजन सशक्तिकरण अधिकारी कार्यालय से संपर्क कर सहायता प्राप्त कर सकती है। विभाग ने आवेदन प्रक्रिया को सरल बनाने और पात्र छात्राओं तक योजना का लाभ पहुंचाने के लिए स्थानीय स्तर पर भी जागरूकता अभियान शुरू किया है।
सरकार का मानना है कि यह योजना केवल परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि दिव्यांग छात्राओं को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास भी है। ई-ट्राईसाइकिल मिलने के बाद छात्राएं बिना किसी सहायता के विद्यालय, कॉलेज, प्रशिक्षण केंद्र और अन्य आवश्यक स्थानों तक आसानी से पहुंच सकेंगी। इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे उच्च शिक्षा तथा रोजगार के अवसरों का बेहतर लाभ उठा सकेंगी।
दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के अधिकारियों के अनुसार, चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद पात्र छात्राओं को चरणबद्ध तरीके से ई-ट्राईसाइकिल वितरित की जाएगी। सरकार का लक्ष्य है कि बुंदेलखंड के अधिक से अधिक दिव्यांग विद्यार्थियों को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जाए और शिक्षा के क्षेत्र में उनकी भागीदारी बढ़ाई जाए।
यह पहल समावेशी शिक्षा और समान अवसर की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि परिवहन सुविधा मिलने से दिव्यांग छात्राओं की स्कूल और कॉलेज में उपस्थिति बढ़ेगी, पढ़ाई बीच में छोड़ने की समस्या कम होगी और वे भविष्य में अपने करियर को नई दिशा दे सकेंगी।





