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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले युवाओं को केंद्र में रखकर योगी आदित्यनाथ सरकार नई रणनीति पर काम शुरू कर चुकी है। राज्य सरकार ने प्रदेश के 16 से 35 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं की जरूरतों, अपेक्षाओं और आकांक्षाओं के अनुरूप नई राज्य युवा नीति तैयार करने का फैसला किया है। इसके साथ ही युवाओं से जुड़े कार्यक्रमों की निगरानी, मूल्यांकन और सुझाव देने के लिए स्वतंत्र राज्य युवा आयोग के गठन की दिशा में भी पहल की जा रही है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को युवा कल्याण विभाग और विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर एकीकृत युवा नीति पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने निर्देश दिए कि नीति तैयार करते समय विद्यार्थियों, खिलाड़ियों, शोधार्थियों, स्टार्टअप उद्यमियों, युवा पेशेवरों और ग्रामीण युवाओं की आवश्यकताओं को प्राथमिकता दी जाए। सरकार का उद्देश्य ऐसी नीति तैयार करना है, जो युवाओं के समग्र विकास के साथ उन्हें रोजगार, कौशल और आधुनिक तकनीकों से जोड़ सके।
बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि युवा नीति केवल दस्तावेज न होकर भविष्य की जरूरतों के अनुरूप कार्ययोजना होनी चाहिए। इसके लिए शिक्षा, कौशल विकास, रोजगार, उद्यमिता, डिजिटल सशक्तीकरण, स्वास्थ्य, खेल, नेतृत्व विकास, संस्कृति और विरासत जैसे विषयों को शामिल किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), रोबोटिक्स, साइबर सुरक्षा, ड्रोन, सेमीकंडक्टर और अन्य उभरती तकनीकों में प्रशिक्षण की व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश भी दिए।
सरकार राज्य युवा आयोग के माध्यम से युवाओं से जुड़े कार्यक्रमों की नियमित समीक्षा कराएगी। आयोग विभिन्न योजनाओं के प्रभाव का आकलन करेगा और समय-समय पर सरकार को सुझाव देगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी विभाग यह सुनिश्चित करें कि युवाओं के लिए संचालित योजनाओं का लाभ प्रत्येक पात्र लाभार्थी तक पहुंचे।
बैठक में रोजगार और स्वरोजगार को लेकर भी कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने सरदार वल्लभभाई पटेल इंडस्ट्रियल एंड एम्प्लॉयमेंट जोन की स्थापना का कार्य शीघ्र शुरू करने के निर्देश दिए। साथ ही मुख्यमंत्री अभ्युदय कोचिंग योजना का विस्तार प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों तक करने को कहा। उन्होंने सुझाव दिया कि इस योजना में युवा आईएएस, आईपीएस अधिकारियों और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों को भी जोड़ा जाए, ताकि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों को बेहतर मार्गदर्शन मिल सके।
खेल अधोसंरचना को मजबूत करने के लिए मुख्यमंत्री ने प्रत्येक ग्राम पंचायत में खेल मैदान, प्रत्येक विकास खंड में मिनी स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, प्रत्येक जिले में खेल उत्कृष्टता केंद्र तथा प्रत्येक मंडल में हाई परफॉर्मेंस सेंटर विकसित करने के कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। उनका कहना था कि खेल गतिविधियां युवाओं को नशे जैसी सामाजिक बुराइयों से दूर रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
सरकार युवाओं के लिए यूथ इन्क्यूबेशन सेंटर स्थापित करने की भी योजना बना रही है। इसके अलावा करियर मार्गदर्शन, छात्रवृत्ति, रोजगार संबंधी जानकारी और सरकारी योजनाओं का लाभ एक ही स्थान पर उपलब्ध कराने के लिए एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित किया जाएगा। इससे युवाओं को विभिन्न सेवाओं के लिए अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
उत्तर प्रदेश देश का सबसे अधिक युवा आबादी वाला राज्य माना जाता है। निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के अनुसार राज्य में मतदाताओं की संख्या 13 करोड़ से अधिक हो चुकी है, जिनमें बड़ी संख्या पहली बार मतदान करने वाले युवाओं और Gen-Z वर्ग की है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि रोजगार, शिक्षा, डिजिटल अवसर और कौशल विकास जैसे मुद्दे इस वर्ग के लिए सबसे महत्वपूर्ण हैं।
हालांकि सरकार की इस पहल को विपक्ष चुनावी रणनीति से जोड़कर देख रहा है, लेकिन राज्य सरकार का कहना है कि नई युवा नीति का उद्देश्य युवाओं को बेहतर अवसर उपलब्ध कराना और उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करना है। यदि प्रस्तावित नीति समयबद्ध तरीके से लागू होती है तो इसका असर शिक्षा, कौशल विकास, रोजगार और उद्यमिता के क्षेत्र में व्यापक रूप से देखने को मिल सकता है।





