उत्तर प्रदेश

कुंडवासिनी देवी मंदिर में चल रही शादी रुकी, जांच में नाबालिग निकली दुल्हन

Kavita2
19 Aug 2026 5:32 PM IST
कुंडवासिनी देवी मंदिर में चल रही शादी रुकी, जांच में नाबालिग निकली दुल्हन
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सोनभद्र। जिले के जुगैल थाना क्षेत्र में बुधवार को चाइल्ड हेल्पलाइन यूनिट की सक्रियता से एक बाल विवाह होने से रोक दिया गया। कुंडवासिनी देवी मंदिर परिसर में मंडप में बैठी किशोरी की शादी कराई जा रही थी। सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंची टीम ने जांच की और किशोरी के नाबालिग पाए जाने पर विवाह की प्रक्रिया को तत्काल रुकवा दिया।

जानकारी के अनुसार, चाइल्ड हेल्पलाइन यूनिट को सूचना मिली थी कि जुगैल थाना क्षेत्र के कुंडवासिनी देवी मंदिर में एक नाबालिग लड़की का विवाह कराया जा रहा है। सूचना मिलते ही टीम सक्रिय हुई और स्थानीय पुलिस से संपर्क कर मौके पर पहुंची।

मौके पर पहुंचने के बाद चाइल्ड हेल्पलाइन की टीम ने विवाह स्थल पर मौजूद लोगों से जानकारी ली। टीम ने किशोरी के परिजनों से उसकी उम्र से संबंधित दस्तावेज मांगे। दस्तावेजों की जांच के दौरान पता चला कि लड़की की उम्र विवाह योग्य नहीं है और वह नाबालिग है।

इसके बाद टीम ने परिजनों को समझाते हुए विवाह रोक दिया। चाइल्ड हेल्पलाइन के अधिकारियों ने मौके पर मौजूद लोगों को बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के प्रावधानों की जानकारी दी।

चाइल्ड हेल्पलाइन की सुपरवाइजर सुधा गिरी ने बताया कि जांच में किशोरी नाबालिग पाई गई, जिसके बाद नियमानुसार कार्रवाई की गई। उन्होंने कहा कि कम उम्र में विवाह बच्चों के अधिकारों का उल्लंघन है और कानून के तहत ऐसा करना अपराध है।

परियोजना समन्वयक मुकेश सिंह ने बताया कि किशोरी को सुरक्षा की दृष्टि से बाल गृह बालिका भेज दिया गया है। उन्होंने बताया कि आगे की प्रक्रिया नियमानुसार पूरी की जा रही है।

केस वर्कर सीमा शर्मा ने बताया कि किशोरी की आवश्यक काउंसलिंग कराई गई। इसके बाद उसे बाल कल्याण समिति सोनभद्र के समक्ष प्रस्तुत किया गया। समिति के निर्देश के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

अधिकारियों ने बताया कि बाल विवाह समाज में बच्चों के विकास और भविष्य पर नकारात्मक प्रभाव डालता है। कम उम्र में शादी होने से बच्चों की शिक्षा प्रभावित होती है और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का खतरा भी बढ़ जाता है।

चाइल्ड हेल्पलाइन टीम ने लोगों को जागरूक करते हुए बताया कि बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के अनुसार लड़की की शादी की न्यूनतम आयु 18 वर्ष और लड़के की न्यूनतम आयु 21 वर्ष निर्धारित है। इससे कम उम्र में विवाह कराना कानूनन अपराध है।

अधिकारियों ने कहा कि बाल विवाह की जानकारी मिलने पर कोई भी व्यक्ति संबंधित विभाग या चाइल्ड हेल्पलाइन को सूचना दे सकता है। सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान गोपनीय रखी जाती है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि जागरूकता की कमी के कारण कई ग्रामीण क्षेत्रों में अब भी कम उम्र में विवाह की घटनाएं सामने आती हैं। ऐसे मामलों को रोकने के लिए प्रशासन और सामाजिक संगठनों की भूमिका महत्वपूर्ण है।

प्रशासन लगातार अभियान चलाकर बाल विवाह जैसी कुरीतियों को रोकने का प्रयास कर रहा है। अधिकारियों का कहना है कि बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए कानून का सख्ती से पालन कराया जाएगा।

इस मामले में चाइल्ड हेल्पलाइन और पुलिस की त्वरित कार्रवाई से एक नाबालिग किशोरी का विवाह समय रहते रोक दिया गया। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे बाल विवाह जैसी घटनाओं की जानकारी तुरंत दें, ताकि बच्चों का भविष्य सुरक्षित किया जा सके।

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