उत्तर प्रदेश

Up News: चलती बाइक पर बाघ ने किया हमला, दो युवक बाल-बाल बचे

Sarita
20 Sept 2025 8:44 AM IST
Up News:  चलती बाइक पर बाघ ने किया हमला, दो युवक बाल-बाल बचे
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Up News: कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग के कतर्नियाघाट रेंज अंतर्गत बिछिया-गिरिजापुरी मार्ग पर शुक्रवार दोपहर एक ही स्थान और एक ही समय पर बाइक सवारों पर बाघ के हमले की दो घटनाएं हुईं। दोनों बाइक सवार घायल हो गए और बाल-बाल बच गए।
वन निगम की जिप्सी चालक सुशील उर्फ ​​पप्पू (29) पुत्र सुकई, निवासी बिछिया गांव शुक्रवार दोपहर 12:30 बजे अपनी मोटरसाइकिल से गांव से सीतारामपुरवा अपने छोटे भाई का हालचाल जानने जा रहा था, जिसे इलाज के लिए एक निजी चिकित्सक के यहां भर्ती कराया गया था। तभी बिछिया और गिरिजापुरी के बीच सड़क किनारे झाड़ियों में छिपे एक बाघ ने उसकी चलती बाइक पर झपट्टा मारा। बाघ के पंजे बाइक की डिक्की में रखे बैग और युवक की चप्पलों से टकरा गए, जिससे बाइक अनियंत्रित होकर झाड़ियों में जा गिरी और युवक भी सड़क पर गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गया।
जैसे ही बाघ ने युवक पर दोबारा हमला करने की कोशिश की, बाइक से बिछिया जा रहे दीपक गुप्ता और सिंचाई कर्मचारी तारिक फारूकी समेत अन्य राहगीरों ने शोर मचाया, जिसके बाद बाघ युवक को छोड़कर जंगल में घुस गया। सड़क पर बाघ के हमले की खबर सुनकर राहगीरों की भारी भीड़ जमा हो गई और उन्होंने वन विभाग को सूचना दी। युवक के हाथ, पैर और कंधे में चोटें आईं और उसे इलाज के लिए सुजौली के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया।
घटना के कुछ देर बाद ही, बिछिया से नमाज पढ़कर गिरिजापुरी लौट रहे हाथी महावत के सहयोगी 26 वर्षीय इरशाद अली पर बाघ ने हमला कर दिया। इरशाद अपनी बाइक की गति बढ़ाकर भाग गया, लेकिन बाघ के पंजे ने उसके पैर में काट लिया, जिससे वह घायल हो गया। उसका इलाज चफरिया के एक निजी चिकित्सक के यहाँ कराया गया।
गौरतलब है कि पिछले छह महीनों में बिछिया-गिरिजापुरी मार्ग पर बाइक सवारों पर बाघों द्वारा आधा दर्जन हमले हो चुके हैं। इसका मुख्य कारण सड़क पर फैली झाड़ियाँ हैं। सड़क पर झाड़ियाँ इतनी बढ़ गई हैं कि अक्सर बाघ, तेंदुआ और अन्य हिंसक जंगली जानवर उनमें छिपकर लोगों की बाइक और गाड़ियों के सामने आ जाते हैं, कई बार तो हमला भी कर देते हैं। सुजौली क्षेत्र के इस मुख्य मार्ग पर झाड़ियों की सफ़ाई न होने से राहगीरों की जान जोखिम में है। लोगों का कहना है कि वन विभाग इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। जबकि इसी रास्ते से रोज़ाना सौ से ज़्यादा आदिवासी छात्र स्कूल जाते हैं। अगर वन विभाग ने झाड़ियों की सफ़ाई नहीं की, तो कभी भी कोई बड़ी घटना हो सकती है।
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