उत्तर प्रदेश

UP : 15 लाख से ज्यादा बिजली उपभोक्ताओं को राहत की उम्मीद

Kavita2
14 July 2026 9:15 AM IST
UP : 15 लाख से ज्यादा बिजली उपभोक्ताओं को राहत की उम्मीद
x

लखनऊ : उत्तर प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं को राहत देने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है। राज्य के 47 लाख से अधिक बिजली उपभोक्ताओं का बिना उनकी सहमति के बिजली भार बढ़ाए जाने के आदेश को अब उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग में चुनौती दी गई है। इसके साथ ही गरीब और जरूरतमंद उपभोक्ताओं को रियायती बिजली योजना का लाभ जारी रखने के लिए कानून में संशोधन का प्रस्ताव भी दाखिल किया गया है।

बिजली भार बढ़ने के कारण बड़ी संख्या में ऐसे उपभोक्ता प्रभावित हुए हैं, जो पहले कम बिजली खपत के आधार पर रियायती बिजली के पात्र थे। जानकारी के अनुसार, 47 लाख उपभोक्ताओं में से करीब 15 लाख उपभोक्ता बिजली भार बढ़ने की वजह से रियायती बिजली के दायरे से बाहर हो गए हैं। इससे इन उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

मामले को लेकर उपभोक्ता संगठनों ने विद्युत नियामक आयोग का दरवाजा खटखटाया है। शिकायत में कहा गया है कि उपभोक्ताओं की सहमति लिए बिना बिजली भार में वृद्धि करना उचित प्रक्रिया के खिलाफ है। उनका तर्क है कि बिजली कनेक्शन लेते समय उपभोक्ता अपनी जरूरत के अनुसार भार निर्धारित कराते हैं, ऐसे में बिना सूचना और सहमति के भार बढ़ाना उपभोक्ताओं के अधिकारों का उल्लंघन है।

उपभोक्ता संगठनों का कहना है कि बिजली भार बढ़ने का सीधा असर बिजली बिल पर पड़ता है। बिजली बिल में फिक्स चार्ज और अन्य शुल्क भार के आधार पर तय होते हैं। ऐसे में जिन उपभोक्ताओं का भार बढ़ा दिया गया है, उन्हें हर महीने अतिरिक्त भुगतान करना पड़ सकता है। खासतौर पर गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों पर इसका ज्यादा असर पड़ने की संभावना है।

बताया जा रहा है कि प्रदेश में बड़ी संख्या में घरेलू उपभोक्ताओं का बिजली भार स्वत: बढ़ा दिया गया था। इसके पीछे विभागीय स्तर पर बिजली खपत के आंकड़ों और कनेक्शन क्षमता के आधार पर प्रक्रिया अपनाने की बात सामने आई थी। हालांकि, उपभोक्ता पक्ष का कहना है कि किसी भी बदलाव से पहले उन्हें जानकारी देना और उनकी सहमति लेना जरूरी था।

इस मामले में अब नियामक आयोग में दाखिल याचिका के जरिए मांग की गई है कि बिजली भार बढ़ाने के आदेश की समीक्षा की जाए और प्रभावित उपभोक्ताओं को राहत दी जाए। साथ ही यह भी मांग की गई है कि जिन गरीब उपभोक्ताओं का भार बढ़ने के कारण रियायती बिजली योजना का लाभ समाप्त हो गया है, उन्हें दोबारा इस योजना के दायरे में शामिल किया जाए।

इसके लिए कानून में बदलाव का प्रस्ताव भी रखा गया है। प्रस्ताव में कहा गया है कि बिजली भार बढ़ने जैसी तकनीकी प्रक्रिया के कारण गरीब उपभोक्ताओं को सरकारी राहत योजनाओं से बाहर नहीं किया जाना चाहिए। रियायती बिजली का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को राहत देना है, इसलिए पात्रता तय करने के नियमों में उपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखना जरूरी है।

विशेषज्ञों का कहना है कि बिजली व्यवस्था में सुधार के लिए उपभोक्ताओं की वास्तविक खपत और जरूरत के अनुसार भार तय करना आवश्यक है, लेकिन इसके लिए पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए। यदि किसी उपभोक्ता का भार बढ़ाना जरूरी हो तो उसे पहले सूचना देकर आपत्ति दर्ज कराने का अवसर मिलना चाहिए।

उपभोक्ता संगठनों ने उम्मीद जताई है कि विद्युत नियामक आयोग इस मामले में उपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखते हुए फैसला करेगा। उनका कहना है कि बिजली जैसी मूलभूत सुविधा में ऐसे फैसले नहीं लिए जाने चाहिए, जिनसे आम लोगों पर अचानक आर्थिक बोझ बढ़ जाए।

फिलहाल, 47 लाख उपभोक्ताओं के बिजली भार बढ़ाने के मामले पर आयोग में सुनवाई का इंतजार है। अगर आयोग उपभोक्ताओं के पक्ष में फैसला देता है तो लाखों परिवारों को राहत मिल सकती है। खासतौर पर वे 15 लाख से अधिक उपभोक्ता, जो भार बढ़ने के कारण रियायती बिजली योजना से बाहर हो गए हैं, उन्हें दोबारा लाभ मिलने की उम्मीद है।

Next Story