उत्तर प्रदेश

हापुड़ में साइबर फ्रॉड का खुलासा, 'म्यूल अकाउंट' चलाने के आरोप में युवक पर मुकदमा

nidhi
14 July 2026 8:26 AM IST
हापुड़ में साइबर फ्रॉड का खुलासा, म्यूल अकाउंट चलाने के आरोप में युवक पर मुकदमा
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साइबर ठगी में इस्तेमाल हो रहा था 'म्यूल अकाउंट
Hapur: देशभर में बढ़ते साइबर अपराधों के बीच उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने बैंक खातों के दुरुपयोग को लेकर नई चिंता खड़ी कर दी है। पुलिस ने एक युवक के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है, जिस पर आरोप है कि उसका बैंक खाता साइबर ठगी से प्राप्त रकम के लेनदेन के लिए 'म्यूल अकाउंट' (Mule Account) के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था। जांच एजेंसियों का कहना है कि ऐसे खाते साइबर अपराधियों के लिए ठगी की रकम को एक जगह से दूसरी जगह भेजने और उसका स्रोत छिपाने का अहम जरिया बन चुके हैं।
पुलिस के अनुसार मामला उस समय सामने आया जब राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) के माध्यम से एक शिकायत प्राप्त हुई। शिकायत में बताया गया कि साइबर ठगी के जरिए पीड़ित से ठगे गए पैसे अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर किए गए, जिनमें हापुड़ निवासी युवक का बैंक खाता भी शामिल था। तकनीकी जांच और बैंकिंग ट्रांजेक्शन का विश्लेषण करने पर यह स्पष्ट हुआ कि खाते में संदिग्ध लेनदेन हुए हैं।
जांच में सामने आया कि आरोपी युवक के खाते में ठगी की रकम आने के तुरंत बाद उसे अन्य खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता था। इस तरह का पैटर्न साइबर अपराधों में इस्तेमाल होने वाले तथाकथित म्यूल अकाउंट की पहचान माना जाता है। पुलिस का कहना है कि ऐसे खाते अपराधियों को अपनी पहचान छिपाने और जांच एजेंसियों को भ्रमित करने में मदद करते हैं।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, म्यूल अकाउंट ऐसा बैंक खाता होता है जिसका उपयोग साइबर अपराधी ठगी से हासिल रकम को इधर-उधर भेजने के लिए करते हैं। कई मामलों में खाता धारक जानबूझकर अपना खाता किराए पर देता है, जबकि कुछ मामलों में लोग लालच या अनजाने में अपने बैंक खाते, एटीएम कार्ड, चेकबुक या इंटरनेट बैंकिंग की जानकारी दूसरों को उपलब्ध करा देते हैं।
साइबर अपराधी पहले किसी व्यक्ति को निवेश, नौकरी, लोन, केवाईसी अपडेट, डिजिटल अरेस्ट, फर्जी कस्टमर केयर, ऑनलाइन शॉपिंग या अन्य तरीकों से ठगी का शिकार बनाते हैं। इसके बाद ठगी की रकम सीधे अपने खाते में न मंगाकर म्यूल अकाउंट में डलवाते हैं। वहां से रकम कई खातों में घुमाई जाती है, जिससे धन के वास्तविक स्रोत तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।
कैसे हुआ खुलासा?
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक शिकायत मिलने के बाद संबंधित बैंक से खाते का विवरण मांगा गया। बैंक स्टेटमेंट, आईपी एड्रेस, मोबाइल नंबर और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच में कई संदिग्ध लेनदेन सामने आए। खाते में अल्प अवधि में बड़ी संख्या में रकम आने और तुरंत निकलने का पैटर्न मिला। इसके बाद युवक की भूमिका संदिग्ध मानते हुए उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया।
जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि युवक स्वयं साइबर गिरोह का सदस्य है या उसने अपना बैंक खाता किसी अन्य व्यक्ति को उपयोग के लिए उपलब्ध कराया था। पुलिस उन लोगों की भी पहचान कर रही है जिनके खातों में इस खाते से रकम भेजी गई।
साइबर गिरोह कैसे करते हैं ऐसे खातों का इस्तेमाल?
साइबर अपराधी सोशल मीडिया, टेलीग्राम, व्हाट्सएप और अन्य ऑनलाइन माध्यमों पर ऐसे लोगों की तलाश करते हैं जो कुछ हजार रुपये के लालच में अपना बैंक खाता इस्तेमाल करने दें। कई बार बेरोजगार युवाओं, छात्रों या आर्थिक तंगी से जूझ रहे लोगों को "कमीशन" देने का झांसा देकर उनके बैंक खाते हासिल कर लिए जाते हैं।
कुछ मामलों में अपराधी नकली कंपनियों के नाम पर नौकरी का ऑफर देते हैं और वेतन खाते के नाम पर बैंक विवरण मांग लेते हैं। इसके बाद वही खाता साइबर ठगी में इस्तेमाल होने लगता है। कई लोगों को यह भी पता नहीं होता कि उनके खाते से अपराध किया जा रहा है, लेकिन कानून की नजर में खाता धारक की जिम्मेदारी भी तय हो सकती है।
पुलिस ने क्या कहा?
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि आरोपी के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और मामले की विस्तृत जांच की जा रही है। यदि जांच में यह साबित होता है कि उसने जानबूझकर अपना खाता साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराया था, तो उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही जिन अन्य खातों में रकम भेजी गई है, उनकी भी जांच जारी है।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, चेकबुक, यूपीआई आईडी, ओटीपी, इंटरनेट बैंकिंग पासवर्ड या अन्य वित्तीय जानकारी किसी भी व्यक्ति के साथ साझा न करें। यदि कोई व्यक्ति खाते के बदले कमीशन या किराए का प्रस्ताव देता है, तो तुरंत इसकी सूचना पुलिस या साइबर हेल्पलाइन 1930 पर दें।
बैंक खाताधारकों के लिए महत्वपूर्ण सलाह
विशेषज्ञों का कहना है कि बैंक खाता केवल व्यक्तिगत उपयोग के लिए होता है। किसी भी अनजान व्यक्ति को खाते का उपयोग करने देना या खाते के माध्यम से पैसे ट्रांसफर कराने की अनुमति देना गंभीर कानूनी परेशानी का कारण बन सकता है। यदि किसी खाते में बिना जानकारी के संदिग्ध राशि आती है तो तुरंत बैंक और पुलिस को इसकी सूचना दें।
साइबर अपराधों से बचाव के लिए समय-समय पर बैंकिंग अलर्ट पढ़ें, मोबाइल पर आने वाले संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें और केवल आधिकारिक वेबसाइट या ऐप के माध्यम से ही वित्तीय लेनदेन करें। जागरूकता ही साइबर अपराधों से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय मानी जाती है।
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