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- मिशन 2027 की तैयारी...

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में मिशन 2027 की तैयारियों के बीच प्रदेश सरकार की नजरें अब पूर्वांचल पर केंद्रित होती दिखाई दे रही हैं। पिछले विधानसभा और लोकसभा चुनावों में इस क्षेत्र में हुए राजनीतिक नुकसान को देखते हुए सरकार पूर्वांचल में विकास की रफ्तार बढ़ाने और बड़ी परियोजनाओं के जरिए अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है। हाल ही में पेश किए गए अनुपूरक बजट में विकास योजनाओं का बड़ा हिस्सा पूर्वांचल को दिए जाने को इसी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
पूर्वांचल उत्तर प्रदेश की राजनीति में लंबे समय से बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र रहा है। यहां की बड़ी संख्या में विधानसभा सीटें किसी भी दल के सत्ता तक पहुंचने के समीकरण को प्रभावित करती हैं। यही वजह है कि सभी राजनीतिक दल चुनावों से पहले इस क्षेत्र पर विशेष ध्यान देते हैं। भाजपा के लिए भी पूर्वांचल की भूमिका काफी अहम रही है, लेकिन पिछले चुनावों में यहां सीटों के नुकसान ने पार्टी की रणनीति को प्रभावित किया है।
आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा और उसके सहयोगी दलों ने पूर्वांचल की 41 सीटों पर जीत दर्ज की थी। इसमें भाजपा का अपना प्रदर्शन भी काफी मजबूत रहा था और पार्टी ने अकेले 34 सीटों पर कब्जा किया था। उस समय पूर्वांचल भाजपा के लिए सबसे मजबूत क्षेत्रों में शामिल था। इसी जनसमर्थन के आधार पर पार्टी ने प्रदेश में प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बनाई थी।
हालांकि, वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में राजनीतिक समीकरण बदले। समाजवादी पार्टी ने अपने सहयोगी दलों के साथ मिलकर पूर्वांचल में बेहतर प्रदर्शन किया और क्षेत्र की 31 सीटों पर जीत हासिल की। इसके मुकाबले भाजपा अपने सहयोगी दलों के साथ मिलकर कुल 29 सीटों तक ही सीमित रह गई। इस बदलाव ने भाजपा के लिए पूर्वांचल में अपनी स्थिति को और मजबूत करने की जरूरत पैदा कर दी।
इसके बाद लोकसभा चुनावों में भी पूर्वांचल की सीटों पर भाजपा को अपेक्षित सफलता नहीं मिली। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, रोजगार, स्थानीय विकास, किसानों से जुड़े मुद्दे और क्षेत्रीय आकांक्षाओं जैसे विषयों ने चुनावी माहौल को प्रभावित किया। अब सरकार विकास योजनाओं के माध्यम से क्षेत्र में विश्वास मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
अनुपूरक बजट में पूर्वांचल के लिए बड़ी परियोजनाओं का प्रावधान इसी दिशा में एक कदम माना जा रहा है। सरकार का जोर बुनियादी ढांचे, सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, उद्योग और रोजगार से जुड़ी योजनाओं को गति देने पर है। माना जा रहा है कि बेहतर सुविधाओं और बड़े निवेश के जरिए क्षेत्र के लोगों को सीधे लाभ पहुंचाने की रणनीति बनाई गई है।
पूर्वांचल में लंबे समय से औद्योगिक विकास और रोजगार के अवसरों की कमी एक बड़ा मुद्दा रहा है। सरकार अब निवेश और उद्योगों को बढ़ावा देकर युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करने पर जोर दे रही है। इसके अलावा धार्मिक और पर्यटन स्थलों के विकास को भी प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सके।
वाराणसी, गोरखपुर, अयोध्या, प्रयागराज और आसपास के जिलों में पहले से चल रही बड़ी परियोजनाओं को भी सरकार अपनी उपलब्धियों के रूप में पेश कर रही है। इन क्षेत्रों में सड़क, परिवहन, पर्यटन और शहरी विकास से जुड़े कार्यों को तेज किया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि विकास का प्रभाव गांवों और छोटे कस्बों तक दिखाई दे।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि 2027 विधानसभा चुनाव से पहले पूर्वांचल में सरकार की सक्रियता केवल विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके राजनीतिक उद्देश्य भी हैं। भाजपा इस क्षेत्र में दोबारा मजबूत जनाधार बनाने की कोशिश कर रही है। वहीं, विपक्ष भी सरकार की योजनाओं और विकास कार्यों को लेकर जनता के बीच अपनी रणनीति तैयार कर रहा है।
सरकार के सामने चुनौती यह भी है कि विकास योजनाओं का लाभ जमीनी स्तर तक पहुंचे और लोगों को उसका प्रत्यक्ष अनुभव हो। केवल घोषणाओं के बजाय परियोजनाओं के समय पर पूरा होने और रोजगार जैसे मुद्दों पर परिणाम दिखाना चुनावी दृष्टि से महत्वपूर्ण होगा।
पूर्वांचल की राजनीति में जातीय समीकरण, स्थानीय मुद्दे और विकास की भूमिका हमेशा अहम रही है। ऐसे में भाजपा सरकार की नजरें इस क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत करने पर हैं। अनुपूरक बजट में पूर्वांचल को प्राथमिकता देना इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
मिशन 2027 की ओर बढ़ते हुए उत्तर प्रदेश सरकार अब पूर्वांचल में विकास की नई तस्वीर पेश करने की तैयारी में है। आने वाले समय में इन योजनाओं का क्रियान्वयन और उनका असर ही तय करेगा कि क्षेत्र की जनता का रुझान किस दिशा में जाता है। फिलहाल सरकार ने विकास के जरिए पूर्वांचल में अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कवायद तेज कर दी है।





