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UP : गैस सिलिंडर बिक्री में बड़ी गिरावट, डिजिटल सिस्टम से काला बाजार पर लगी रोक

Uttar Pradesh उत्तर प्रदेश: देश में घरेलू गैस सिलिंडर की बिक्री में अचानक गिरावट दर्ज की गई है, जिससे सप्लाई चेन पर भी असर पड़ने लगा है। सामान्य दिनों में बाटलिंग प्लांट में जहां रोजाना लगभग 60 हजार सिलिंडरों की रीफिलिंग होती थी, वहीं अब यह संख्या घटकर करीब 35 हजार तक पहुंच गई है। इस गिरावट के कारण कई जगहों पर खाली सिलिंडरों की उपलब्धता प्रभावित हो रही है और बाटलिंग प्लांट में बार-बार काम रोकना पड़ रहा है।
यह स्थिति उत्तर प्रदेश के गीडा स्थित इंडियन ऑयल और हिंदुस्तान पेट्रोलियम के बाटलिंग प्लांट में देखने को मिल रही है, जहां से रीफिलिंग के बाद सिलिंडर पूर्वांचल के कई जिलों में भेजे जाते हैं। इसके अलावा भारत पेट्रोलियम की गैस एजेंसियों को भी इसी नेटवर्क से सिलिंडर की सप्लाई की जाती है।
सिलिंडर बिक्री में आई इस गिरावट को लेकर एजेंसी संचालक भी परेशान हैं। उनका कहना है कि पहले सिलिंडरों का एक बड़ा हिस्सा कथित तौर पर ब्लैक मार्केट में चला जाता था, जिससे खपत अधिक दिखाई देती थी। लेकिन अब डिजिटल ऑथेंटिकेशन कोड (DAC) आधारित व्यवस्था लागू होने के बाद स्थिति में बड़ा बदलाव आया है।
नई प्रणाली के तहत अब केवल वही उपभोक्ता सिलिंडर प्राप्त कर पा रहे हैं, जिनके पास वैध कनेक्शन और सत्यापित पहचान है। इससे डुप्लीकेट और अनधिकृत वितरण पर रोक लगी है, जिसके परिणामस्वरूप रिकॉर्डेड बिक्री में गिरावट देखी जा रही है।
बाटलिंग प्लांट के अधिकारियों के अनुसार, डिजिटल सिस्टम लागू होने से पारदर्शिता बढ़ी है, लेकिन शुरुआती दौर में सप्लाई और मांग के बीच असंतुलन भी सामने आ रहा है। खाली सिलिंडरों की समय पर वापसी न होने से रीफिलिंग प्रक्रिया प्रभावित हो रही है, जिससे उत्पादन क्षमता पर दबाव बढ़ गया है।
एजेंसी संचालकों का कहना है कि पहले जहां कई सिलिंडर एक बार में बाजार में अतिरिक्त रूप से पहुंच जाते थे, वहीं अब हर सिलिंडर की ट्रैकिंग होने से वितरण प्रणाली अधिक नियंत्रित हो गई है। हालांकि इससे अस्थायी रूप से बिक्री के आंकड़े कम दिखाई दे रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल ऑथेंटिकेशन कोड प्रणाली लंबे समय में गैस वितरण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाएगी। इससे उपभोक्ताओं को सही मात्रा में और निर्धारित दर पर गैस सिलिंडर उपलब्ध हो सकेगा।
हालांकि, फिलहाल बाटलिंग प्लांट पर खाली सिलिंडरों की कमी और रीफिलिंग प्रक्रिया में बाधा एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आई है। यदि समय पर सिलिंडर रोटेशन सिस्टम को संतुलित नहीं किया गया तो सप्लाई चेन पर और दबाव बढ़ सकता है।
प्रशासन और तेल कंपनियां स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और वितरण प्रणाली को सामान्य करने के प्रयास किए जा रहे हैं। आने वाले दिनों में स्थिति में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है, लेकिन फिलहाल गैस सप्लाई नेटवर्क में यह बदलाव एक महत्वपूर्ण संक्रमणकालीन दौर माना जा रहा है।





