उत्तर प्रदेश

दुष्कर्म केस में 2 भाइयों को आजीवन जेल

Rajeshwari Nishad
14 Oct 2026 5:41 PM IST
दुष्कर्म केस में 2 भाइयों को आजीवन जेल
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बक्सर/बलिया। बिहार के बक्सर जिले के सोनबरसा में करीब 13 साल पहले उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के बांसडीह थाना क्षेत्र के एक गांव की किशोरी के साथ हुए दुष्कर्म के मामले में बुधवार को अदालत ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। एडीजे-छह सह पॉक्सो कोर्ट के विशेष न्यायाधीश अमित कुमार शर्मा की अदालत ने मामले में उपलब्ध गवाहों के बयान और साक्ष्यों के आधार पर एक ही परिवार के तीन लोगों को दोषी करार दिया है। दोषियों में पिता-पुत्र भी शामिल हैं। लंबे समय से चल रहे इस मामले में अदालत के फैसले को न्यायिक प्रक्रिया की दिशा में
महत्वपूर्ण
कदम माना जा रहा है।
13 साल पुराने मामले में आया फैसला
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह मामला करीब 13 साल पुराना है। पीड़िता उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के बांसडीह थाना क्षेत्र के एक गांव की रहने वाली थी। उसके साथ बिहार के बक्सर जिले के सोनबरसा में दुष्कर्म की घटना हुई थी। घटना के बाद मामला न्यायिक प्रक्रिया तक पहुंचा और इसके बाद अदालत में सुनवाई शुरू हुई।
इस दौरान मामले से जुड़े तथ्यों, गवाहों के बयानों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर सुनवाई आगे बढ़ी। लंबे समय तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद बुधवार को विशेष न्यायाधीश अमित कुमार शर्मा की अदालत ने अपना फैसला सुनाया। अदालत ने साक्ष्यों के मूल्यांकन के बाद एक ही परिवार के तीन लोगों को दोषी पाया।
मामले में पिता-पुत्र समेत तीन लोगों का दोषी करार दिया जाना इस बात को रेखांकित करता है कि अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों को सुनवाई के दौरान महत्वपूर्ण माना। हालांकि, दोषियों को किस-किस अपराध के तहत दोषी ठहराया गया है, इसकी विस्तृत जानकारी उपलब्ध होने पर ही कानूनी धाराओं के बारे में स्पष्ट रूप से बताया जा सकता है।
गवाहों के बयान और साक्ष्य बने फैसले का आधार
अदालत में किसी भी आपराधिक मामले की सुनवाई के दौरान गवाहों के बयान और प्रस्तुत साक्ष्यों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इस मामले में भी अदालत ने उपलब्ध गवाही और साक्ष्यों के आधार पर आरोपित लोगों की भूमिका का मूल्यांकन किया।
पॉक्सो अदालतों में बच्चों के विरुद्ध यौन अपराधों से जुड़े मामलों की सुनवाई की जाती है। ऐसे मामलों में पीड़ित की सुरक्षा, पहचान की गोपनीयता और न्यायिक प्रक्रिया की संवेदनशीलता का विशेष ध्यान रखा जाता है।
इस मामले में भी किशोरी से जुड़े अपराध के आरोपों पर सुनवाई के बाद अदालत ने अपना निर्णय दिया। करीब 13 साल पुराने मामले में फैसला आने से यह स्पष्ट हुआ कि न्यायिक प्रक्रिया में साक्ष्यों के परीक्षण और गवाहों की गवाही के आधार पर दोष निर्धारित किया गया।
पॉक्सो कोर्ट में हुई सुनवाई
पॉक्सो अधिनियम यानी बच्चों को लैंगिक अपराधों से संरक्षण देने वाले कानून के तहत बच्चों के विरुद्ध यौन अपराधों से संबंधित मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालतों का प्रावधान है। इन अदालतों का उद्देश्य ऐसे मामलों की सुनवाई को प्रभावी बनाना और पीड़ित बच्चों के हितों की रक्षा करना है।
बक्सर की एडीजे-छह सह पॉक्सो कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान मामले से संबंधित गवाहों के बयान और साक्ष्यों पर विचार किया गया। विशेष न्यायाधीश अमित कुमार शर्मा की अदालत ने इसके बाद एक ही
परिवार
के तीन लोगों को दोषी करार दिया।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी में दोषियों के नाम, घटना की पूरी परिस्थितियों, मुकदमे के दौरान पेश किए गए साक्ष्यों के विस्तृत विवरण और अदालत द्वारा निर्धारित सजा की जानकारी नहीं दी गई है। इसलिए इन तथ्यों के संबंध में बिना आधिकारिक जानकारी के कोई दावा करना उचित नहीं होगा।
सजा पर फैसले की जानकारी का इंतजार
आपराधिक मामलों में दोषसिद्धि और सजा सुनाए जाने की प्रक्रिया अलग-अलग चरणों में हो सकती है। अदालत द्वारा आरोपियों को दोषी करार दिए जाने के बाद सजा से संबंधित आदेश भी महत्वपूर्ण होता है। इस मामले में फिलहाल उपलब्ध विवरण के अनुसार, बुधवार को अदालत ने तीनों आरोपियों को दोषी पाया है।
दोषियों को कितनी सजा सुनाई गई, उन पर कितना जुर्माना लगाया गया या सजा के संबंध में अदालत ने क्या निर्देश दिए, इसकी जानकारी उपलब्ध विवरण में नहीं है। ऐसे में सजा के बारे में पुष्टि के लिए अदालत के विस्तृत आदेश का इंतजार करना होगा।
न्यायिक प्रक्रिया में महत्वपूर्ण पड़ाव
करीब 13 साल पुराने इस मामले में अदालत का फैसला पीड़िता को न्याय दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। यौन अपराधों से जुड़े मामलों में निष्पक्ष जांच, साक्ष्यों का उचित मूल्यांकन और अदालत में प्रभावी सुनवाई न्याय व्यवस्था के महत्वपूर्ण हिस्से हैं।
इस मामले में अदालत ने गवाहों के बयान और साक्ष्यों के आधार पर पिता-पुत्र समेत एक ही परिवार के तीन लोगों को दोषी करार दिया है। अब मामले में सजा से संबंधित आदेश की जानकारी सामने आने पर फैसले के अन्य पहलुओं की भी स्पष्टता होगी।
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