उत्तर प्रदेश

कम उम्र में हाई कोलेस्ट्रॉल का खतरनाक मामला इलाज बना जीवनदान

Ratna Netam
1 Sept 2026 4:49 PM IST
कम उम्र में हाई कोलेस्ट्रॉल का खतरनाक मामला इलाज बना जीवनदान
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लखनऊ : आमतौर पर जब भी कोलेस्ट्रॉल बढ़ने की बात होती है तो लोगों के मन में बुजुर्ग या उम्रदराज लोगों की तस्वीर आती है, लेकिन एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है जिसमें सिर्फ 3 साल के बच्चे के शरीर में कोलेस्ट्रॉल इतना ज्यादा बढ़ गया कि उसकी जान पर संकट आ गया। डॉक्टरों को बच्चे के खून से अतिरिक्त कोलेस्ट्रॉल निकालने की जरूरत पड़ी। इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि बच्चों में बढ़ती ऐसी स्वास्थ्य समस्याओं को लेकर कितनी सतर्कता जरूरी है।
छोटे बच्चे में कोलेस्ट्रॉल का इतना अधिक स्तर सामान्य स्थिति नहीं मानी जाती। विशेषज्ञों के अनुसार बच्चों में भी हाई कोलेस्ट्रॉल की समस्या हो सकती है, जिसका कारण आनुवांशिक बीमारी, परिवार में कोलेस्ट्रॉल का इतिहास, गलत खानपान या कुछ अन्य स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।
अचानक सामने आई गंभीर बीमारी
जानकारी के मुताबिक बच्चे की तबीयत खराब रहने लगी थी। जांच के दौरान डॉक्टरों ने जब उसका ब्लड टेस्ट कराया तो रिपोर्ट देखकर हैरान रह गए। बच्चे के खून में फैट यानी कोलेस्ट्रॉल का स्तर बेहद ज्यादा पाया गया था। स्थिति इतनी गंभीर थी कि सामान्य इलाज से बात नहीं बन रही थी और डॉक्टरों को विशेष प्रक्रिया अपनानी पड़ी।
डॉक्टरों ने बच्चे की हालत को देखते हुए खून से अतिरिक्त कोलेस्ट्रॉल हटाने की प्रक्रिया शुरू की। इस तरह की स्थिति में समय पर इलाज नहीं मिलने पर रक्त वाहिकाओं और दिल पर गंभीर असर पड़ सकता है।
बच्चों में भी हो सकता है हाई कोलेस्ट्रॉल
कई लोगों को लगता है कि कोलेस्ट्रॉल केवल बड़े लोगों की बीमारी है, लेकिन ऐसा नहीं है। बच्चों में भी यह समस्या हो सकती है। खासकर अगर परिवार में किसी को बहुत ज्यादा कोलेस्ट्रॉल की समस्या रही हो तो बच्चों में इसका खतरा बढ़ सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि शरीर में कोलेस्ट्रॉल की कुछ मात्रा जरूरी होती है क्योंकि यह कोशिकाओं, हार्मोन और शरीर के विकास में भूमिका निभाता है, लेकिन इसकी अधिक मात्रा नुकसान पहुंचा सकती है। ज्यादा एलडीएल यानी खराब कोलेस्ट्रॉल रक्त वाहिकाओं में जमा होकर भविष्य में दिल से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ा सकता है।
आनुवांशिक बीमारी हो सकती है कारण
इतनी कम उम्र में कोलेस्ट्रॉल का खतरनाक स्तर तक पहुंचना अक्सर किसी गंभीर कारण की ओर इशारा करता है। कई मामलों में फैमिलियल हाइपरकोलेस्ट्रोलेमिया जैसी आनुवांशिक बीमारी इसका कारण हो सकती है। इसमें शरीर खराब कोलेस्ट्रॉल को सही तरीके से नियंत्रित नहीं कर पाता।
अगर माता-पिता या परिवार के किसी सदस्य को कम उम्र में हार्ट संबंधी बीमारी या बहुत ज्यादा कोलेस्ट्रॉल की समस्या रही हो तो बच्चों की जांच कराना जरूरी हो सकता है।
माता-पिता को किन बातों का रखना चाहिए ध्यान
बच्चों के खानपान और स्वास्थ्य पर ध्यान देना बेहद जरूरी है। ज्यादा तला-भुना खाना, पैकेट वाले खाद्य पदार्थ और शारीरिक गतिविधि की कमी बच्चों के स्वास्थ्य पर असर डाल सकती है।
हालांकि हर बच्चे में कोलेस्ट्रॉल बढ़ने का कारण केवल खानपान नहीं होता। कई बार आनुवांशिक कारण भी बड़ी भूमिका निभाते हैं। इसलिए बिना डॉक्टर की सलाह के किसी निष्कर्ष पर पहुंचना सही नहीं है।
समय पर जांच से बच सकती है बड़ी परेशानी
डॉक्टरों के अनुसार अगर बच्चे में असामान्य वजन, परिवार में हाई कोलेस्ट्रॉल का इतिहास या किसी तरह की स्वास्थ्य समस्या दिखाई दे तो विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है। लिपिड प्रोफाइल जैसे टेस्ट से शरीर में कोलेस्ट्रॉल के स्तर की जानकारी मिल सकती है।
इस मामले में समय पर बीमारी की पहचान होने से बच्चे का इलाज संभव हो सका। डॉक्टरों की टीम ने सही समय पर कदम उठाकर गंभीर खतरे को टाल दिया।
बच्चों की सेहत को लेकर बढ़ी चिंता
यह मामला उन माता-पिता के लिए भी एक चेतावनी है जो बच्चों की छोटी-छोटी स्वास्थ्य समस्याओं को नजरअंदाज कर देते हैं। बदलती जीवनशैली में बच्चों की सेहत पर पहले से ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है।
विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों को संतुलित आहार, पर्याप्त खेलकूद और नियमित स्वास्थ्य निगरानी की जरूरत होती है। अगर परिवार में किसी बीमारी का इतिहास है तो समय-समय पर जांच कराना और डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर विकल्प है।
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