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गंगा में अब इलेक्ट्रिक नावों से सफर, पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कदम

वाराणसी: गंगा नदी में स्वच्छ और पर्यावरण अनुकूल जल परिवहन की नई शुरुआत हुई है। नमो घाट पर वाराणसी विकास प्राधिकरण (वीडीए) और गेल (इंडिया) लिमिटेड के सहयोग से इलेक्ट्रिक बोट कन्वर्जन पायलट परियोजना के तहत पांच इलेक्ट्रिक यात्री नौकाओं का लोकार्पण किया गया। इस पहल का उद्देश्य गंगा में प्रदूषण कम करना और जल परिवहन को आधुनिक व हरित बनाना है।
महापौर अशोक कुमार तिवारी ने नमो घाट पर आयोजित कार्यक्रम में इलेक्ट्रिक नौकाओं को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस मौके पर अपनी पारंपरिक नावों को इलेक्ट्रिक प्रणाली में परिवर्तित कराने वाले पांच नाविकों को सम्मानित भी किया गया। सम्मान पाने वालों में दीपक साहनी, राकेश साहनी, ज्योतीलाल निषाद, दीपक कुमार साहनी और शुभम साहनी शामिल रहे।
वीडीए उपाध्यक्ष पूर्ण बोरा ने बताया कि यह परियोजना अभी पायलट चरण में शुरू की गई है। पहले चरण में कुल 20 यात्री नौकाओं को धीरे-धीरे इलेक्ट्रिक प्रणाली में बदला जाएगा। यदि यह प्रयोग सफल रहता है तो इसका विस्तार किया जाएगा। इससे वाराणसी देश के अन्य नदी शहरों के लिए भी स्वच्छ जल परिवहन का मॉडल बन सकता है।
महापौर अशोक कुमार तिवारी ने कहा कि इलेक्ट्रिक नौकाओं के संचालन से गंगा में प्रदूषण कम करने में मदद मिलेगी। पारंपरिक डीजल और पेट्रोल से चलने वाली नावों की तुलना में इलेक्ट्रिक नौकाएं वायु, ध्वनि और जल प्रदूषण को काफी हद तक कम करेंगी। इसके साथ ही नाविकों को आर्थिक लाभ भी मिलेगा।
उन्होंने बताया कि इलेक्ट्रिक प्रणाली अपनाने के बाद नाविकों की संचालन लागत में करीब 80 प्रतिशत तक कमी आने की संभावना है। ईंधन खर्च कम होने से नाविकों की आय में वृद्धि होगी और उन्हें लंबे समय तक आर्थिक मजबूती मिलेगी। पर्यटकों को भी गंगा में शांत, सुरक्षित और प्रदूषण मुक्त यात्रा का अनुभव मिलेगा।
परियोजना के तहत तैयार की गई इलेक्ट्रिक नौकाओं में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। आयरा इलेक्ट्रिक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी गगन कुमार मेहता के अनुसार, प्रत्येक नौका में 15 किलोवाट की इलेक्ट्रिक आउटबोर्ड मोटर, 20 किलोवाट-घंटे की लिथियम बैटरी, जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम, डिजिटल डिस्प्ले और रिमोट मॉनिटरिंग जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।
एक बार पूरी तरह चार्ज होने के बाद ये नौकाएं अस्सी घाट और नमो घाट के बीच कम से कम तीन राउंड ट्रिप कर सकेंगी। यात्रियों की सुविधा और संचालन को आसान बनाने के लिए चयनित घाटों पर चार्जिंग स्टेशन भी विकसित किए गए हैं। इससे नाविकों को बार-बार बैटरी चार्ज करने में परेशानी नहीं होगी।
कार्यक्रम के बाद जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और नाविकों ने इलेक्ट्रिक नौका से नमो घाट से भदैनी घाट तक जल भ्रमण किया और इस नई सुविधा का अनुभव लिया। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले समय में गंगा में इलेक्ट्रिक नौकाओं की संख्या बढ़ाई जाएगी।
काशी में हर साल लाखों पर्यटक और श्रद्धालु गंगा घाटों का भ्रमण करने आते हैं। ऐसे में इलेक्ट्रिक नौकाओं की शुरुआत पर्यटन क्षेत्र के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इससे पर्यटकों को बेहतर सुविधा मिलेगी और गंगा को प्रदूषण मुक्त बनाने के प्रयासों को मजबूती मिलेगी।
गंगा संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय नाविकों की आजीविका को बेहतर बनाने की दिशा में यह परियोजना अहम भूमिका निभा सकती है। प्रशासन का लक्ष्य है कि भविष्य में ज्यादा से ज्यादा पारंपरिक नावों को इलेक्ट्रिक तकनीक से जोड़ा जाए, जिससे वाराणसी में स्वच्छ, सुरक्षित और आधुनिक जल परिवहन व्यवस्था विकसित हो सके।





