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उत्तर प्रदेश
शस्त्र लाइसेंस की जांच में फंसा पेंच, 200 से अधिक मामलों पर संशय
nidhi
3 Oct 2026 9:49 AM IST

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अलीगढ़ में हथियार लाइसेंस की जांच अटकी
अलीगढ़: उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में 200 से अधिक शस्त्र लाइसेंस का मामला सत्यापन प्रक्रिया में अटक गया है। इन लाइसेंसों से संबंधित अनापत्ति प्रमाण पत्र यानी NOC जम्मू-कश्मीर से नहीं मिलने के कारण प्रशासन अंतिम निर्णय नहीं ले पा रहा है। दस्तावेजों के सत्यापन में हो रही देरी के बीच कुछ लाइसेंसों के फर्जी होने की आशंका भी जताई जा रही है, जिसके चलते पूरे मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है।
जानकारी के मुताबिक ये ऐसे शस्त्र लाइसेंस हैं जिनका संबंध जम्मू-कश्मीर से बताया जा रहा है। नियमानुसार दूसरे राज्य या क्षेत्र से जारी दस्तावेजों की पुष्टि संबंधित प्रशासन से कराई जाती है। इसी प्रक्रिया के तहत अलीगढ़ प्रशासन की ओर से जम्मू-कश्मीर से NOC और लाइसेंसों से जुड़ी जानकारी मांगी गई है।
200 से अधिक मामले लंबित होने के कारण संबंधित लाइसेंस धारकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जब तक संबंधित क्षेत्र से दस्तावेजों की पुष्टि नहीं हो जाती, तब तक प्रशासन इनके संबंध में आगे की प्रक्रिया पूरी नहीं कर सकता। अधिकारियों के लिए यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि प्रस्तुत किए गए लाइसेंस वास्तव में सक्षम प्राधिकारी द्वारा ही जारी किए गए हैं।
मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू फर्जी लाइसेंस की आशंका है। अगर किसी लाइसेंस का रिकॉर्ड संबंधित प्राधिकरण के पास नहीं मिलता है या उसमें दर्ज जानकारी आधिकारिक रिकॉर्ड से मेल नहीं खाती है तो उसकी वैधता पर सवाल खड़े हो सकते हैं। इसी वजह से बिना सत्यापन किसी भी मामले को अंतिम रूप नहीं दिया जा रहा है।
शस्त्र लाइसेंस संवेदनशील दस्तावेज माना जाता है। हथियार रखने की अनुमति देने से पहले आवेदक और दस्तावेजों की जांच की जाती है। अगर लाइसेंस किसी दूसरे राज्य से जारी हुआ है तो उसका रिकॉर्ड सत्यापित करना और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। इससे यह पता लगाया जा सकता है कि लाइसेंस वास्तविक है या दस्तावेजों में किसी तरह की गड़बड़ी की गई है।
अलीगढ़ में लंबित मामलों को लेकर प्रशासन अब जम्मू-कश्मीर से जवाब मिलने का इंतजार कर रहा है। NOC मिलने के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि कितने लाइसेंस पूरी तरह सही हैं और कितने मामलों में अतिरिक्त जांच की जरूरत है। अगर किसी दस्तावेज के फर्जी होने की पुष्टि होती है तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है।
जांच के दौरान लाइसेंस नंबर, धारक का नाम, जारी करने की तारीख और संबंधित प्राधिकारी के रिकॉर्ड का मिलान किया जा सकता है। किसी तरह का अंतर सामने आने पर संबंधित दस्तावेज को संदिग्ध मानते हुए विस्तृत जांच की जाती है।
200 से अधिक शस्त्र लाइसेंस एक साथ सत्यापन में अटकने से मामला प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण हो गया है। हथियारों से जुड़ा मामला होने के कारण इसमें किसी भी तरह की लापरवाही सुरक्षा के लिहाज से गंभीर हो सकती है। इसलिए अधिकारी दस्तावेजों की आधिकारिक पुष्टि के बाद ही आगे बढ़ रहे हैं। फिलहाल जम्मू-कश्मीर से NOC नहीं मिलने के कारण सभी संबंधित मामलों की प्रक्रिया लंबित है। जवाब आने के बाद लाइसेंसों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। इसके बाद वैध लाइसेंसों की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी, जबकि संदिग्ध या फर्जी पाए जाने वाले दस्तावेजों के मामलों में नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
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