उत्तर प्रदेश

साइबर ठगों के जाल में फंसी डॉक्टर, एक महीने में गंवाए 1.78 करोड़

nidhi
3 Oct 2026 8:56 AM IST
साइबर ठगों के जाल में फंसी डॉक्टर, एक महीने में गंवाए 1.78 करोड़
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प्रयागराज में डिजिटल अरेस्ट का बड़ा मामला
प्रयागराज: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में साइबर ठगी का एक बड़ा मामला सामने आया है। साइबर अपराधियों ने एक महिला डॉक्टर को करीब एक महीने तक कथित रूप से डिजिटल अरेस्ट रखकर 1.78 करोड़ रुपये की ठगी कर ली। आरोपियों ने महिला डॉक्टर को कानूनी कार्रवाई और गिरफ्तारी का डर दिखाकर अपने जाल में फंसाया और अलग-अलग तरीके से उनसे बड़ी रकम ट्रांसफर करा ली।
मामले का खुलासा होने के बाद साइबर अपराधियों की तलाश शुरू कर दी गई है। ठगी में इस्तेमाल किए गए बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और ऑनलाइन लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।
डिजिटल अरेस्ट साइबर ठगों द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला ऐसा तरीका है, जिसमें पीड़ित को फोन या वीडियो कॉल के जरिए डराया जाता है। अपराधी खुद को पुलिस, जांच एजेंसी या किसी सरकारी विभाग का अधिकारी बताकर पीड़ित पर गंभीर आरोप लगाते हैं। इसके बाद गिरफ्तारी या कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर उसे लगातार ऑनलाइन संपर्क में रहने के लिए मजबूर किया जाता है। प्रयागराज के इस मामले में भी महिला डॉक्टर को लंबे समय तक भय के माहौल में रखा गया। करीब एक महीने तक साइबर अपराधियों ने उन्हें अपने प्रभाव में बनाए रखा। इसी दौरान अलग-अलग बहाने बनाकर उनसे रुपये ट्रांसफर कराए गए। जब तक महिला डॉक्टर को ठगी का एहसास हुआ, तब तक कुल 1.78 करोड़ रुपये की बड़ी रकम उनके हाथ से निकल चुकी थी।
इतनी बड़ी रकम की साइबर ठगी सामने आने के बाद मामले को गंभीरता से लिया गया है। अब यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि महिला डॉक्टर द्वारा भेजी गई रकम किन-किन बैंक खातों में पहुंची और वहां से उसे आगे कहां ट्रांसफर किया गया। साइबर अपराध के मामलों में ठग अक्सर रकम को कई खातों में भेजकर जांच एजेंसियों से बचने का प्रयास करते हैं।
डिजिटल अरेस्ट के मामलों में अपराधी पीड़ित को मानसिक दबाव में रखने के लिए लगातार कॉल या वीडियो कॉल पर बने रहते हैं। कई बार पीड़ित को यह भी कहा जाता है कि वह मामले की जानकारी अपने परिवार, दोस्तों या किसी अन्य व्यक्ति को न दे। इसी डर और गोपनीयता का फायदा उठाकर ठग धीरे-धीरे बड़ी रकम अपने खातों में ट्रांसफर करा लेते हैं।
महिला डॉक्टर के साथ हुई इस घटना ने एक बार फिर साइबर ठगी के बदलते तरीकों को लेकर चिंता बढ़ा दी है। पढ़े-लिखे और पेशेवर लोग भी डर और दबाव के कारण इस तरह के अपराधियों के जाल में फंस रहे हैं। साइबर ठग वीडियो कॉल, फर्जी दस्तावेज और सरकारी एजेंसियों जैसे दिखने वाले प्रोफाइल का इस्तेमाल कर अपनी बात को विश्वसनीय बनाने की कोशिश करते हैं।
किसी भी सरकारी जांच एजेंसी या पुलिस की ओर से फोन अथवा वीडियो कॉल पर किसी व्यक्ति को इस तरह “डिजिटल अरेस्ट” रखने की कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं होती। संदिग्ध कॉल आने पर बैंक खाते, ओटीपी, पासवर्ड या अन्य गोपनीय जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए और बिना सत्यापन किसी खाते में रकम ट्रांसफर नहीं करनी चाहिए। फिलहाल महिला डॉक्टर से हुई 1.78 करोड़ रुपये की ठगी के मामले में साइबर अपराधियों की पहचान और रकम के लेनदेन की कड़ियां खंगाली जा रही हैं। मामले की जांच के साथ ठगी की रकम को ट्रैक करने की कोशिश भी जारी है।
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