उत्तर प्रदेश

सील अस्पतालों को नए नाम से खोलने का खेल, ब्रजेश पाठक ने बैठाई जांच

Rajeshwari Nishad
30 Oct 2026 6:16 PM IST
सील अस्पतालों को नए नाम से खोलने का खेल, ब्रजेश पाठक ने बैठाई जांच
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के गंभीर आरोप सामने आने के बाद उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने सख्त रुख अपनाया है। लखनऊ, कानपुर और उन्नाव में पहले से सील किए गए अस्पतालों को कथित तौर पर नए नाम से संचालित करने और मरीजों से अवैध वसूली करने की शिकायतों ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो और खबरों का संज्ञान लेते हुए डिप्टी सीएम ने शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026 को मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रमुख सचिव, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग से कहा है कि स्वास्थ्य महानिदेशालय स्तर पर तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की जाए। इस समिति को एक सप्ताह के भीतर जांच रिपोर्ट के साथ दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के खिलाफ प्रस्तावित कार्रवाई का विवरण प्रस्तुत करना होगा। ब्रजेश पाठक ने स्पष्ट किया है कि मरीजों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ और स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर अवैध वसूली किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
तीन जिलों में अस्पतालों के संचालन पर सवाल
उत्तर प्रदेश के तीन प्रमुख जिलों लखनऊ, कानपुर और उन्नाव में कुछ निजी अस्पतालों के संचालन को लेकर गंभीर शिकायतें सामने आई हैं।आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से पहले जिन अस्पतालों को नियमों का उल्लंघन करने के कारण सील किया गया था, उनमें से कुछ का संचालन नए नाम से दोबारा शुरू कर दिया गया।इस तरह की शिकायतों ने अस्पतालों की निगरानी और स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।शिकायतों में यह भी आरोप लगाया गया है कि मरीजों से अवैध तरीके से पैसे वसूले जा रहे हैं।हालांकि, इन आरोपों की अभी जांच होनी बाकी है। संबंधित अस्पतालों और अधिकारियों की जिम्मेदारी जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने जताई नाराजगी
स्वास्थ्य विभाग से संबंधित शिकायतें और वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने मामले को गंभीरता से लिया।उन्होंने शुक्रवार को प्रमुख सचिव, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग को पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने के निर्देश दिए।डिप्टी सीएम ने स्पष्ट किया कि सरकारी नियमों का उल्लंघन करके अस्पताल चलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।उन्होंने कहा कि मानकों को पूरा नहीं करने वाले अस्पतालों का अवैध संचालन स्वीकार नहीं किया जाएगा।मरीजों की सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता से किसी भी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए।स्वास्थ्य मंत्री ने विभाग की छवि खराब करने और मरीजों के हितों को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों पर भी सख्ती बरतने को कहा है।
तीन सदस्यीय जांच समिति करेगी पड़ताल
डिप्टी सीएम के आदेश के अनुसार, पूरे मामले की जांच के लिए स्वास्थ्य महानिदेशालय स्तर पर तीन सदस्यीय समिति बनाई जाएगी।यह समिति संबंधित अस्पतालों के संचालन, पुराने सीलिंग आदेशों और शिकायतों से जुड़े दस्तावेजों की जांच करेगी।जांच में यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि जिन अस्पतालों को पहले सील किया गया था, वे किन परिस्थितियों में दोबारा संचालित होने लगे।इसके अलावा यह भी देखा जाएगा कि संबंधित अस्पतालों के पास वैध पंजीकरण और संचालन की अनुमति है या नहीं।यदि किसी अस्पताल के नाम में बदलाव किया गया है, तो उसके बाद जारी अनुमति और दस्तावेजों की वैधता की जांच भी आवश्यक होगी।समिति को यह स्पष्ट करना होगा कि नियमों का उल्लंघन हुआ है या नहीं और यदि हुआ है तो इसके लिए कौन जिम्मेदार है।
एक सप्ताह में मांगी पूरी रिपोर्ट
ब्रजेश पाठक ने इस मामले में जांच के लिए एक सप्ताह की समयसीमा निर्धारित की है।उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि जांच रिपोर्ट के साथ कार्रवाई का प्रस्ताव भी उपलब्ध कराया जाए।इसका मतलब है कि समिति को केवल आरोपों की पड़ताल ही नहीं करनी होगी, बल्कि आरोप सही पाए जाने की स्थिति में संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की अनुशंसा भी करनी होगी।जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर विभागीय या अन्य कानूनी कार्रवाई का निर्णय लिया जा सकेगा।हालांकि, अभी किसी विशेष अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ रिश्वतखोरी का आरोप प्रमाणित होने या इस मामले में गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई है।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की भूमिका की भी जांच
इस पूरे मामले में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की संभावित भूमिका भी महत्वपूर्ण है।यदि कोई अस्पताल सरकारी आदेश से सील किया गया था, तो उसके दोबारा संचालन की जानकारी संबंधित अधिकारियों को थी या नहीं, यह जांच का विषय हो सकता है।साथ ही यह भी पता लगाना जरूरी होगा कि अस्पताल का पंजीकरण किस नाम से किया गया था और उसे किन शर्तों पर संचालन की अनुमति मिली थी।यदि किसी स्तर पर लापरवाही, मिलीभगत या अवैध आर्थिक लाभ लेने की बात सामने आती है, तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।हालांकि, फिलहाल किसी अधिकारी या कर्मचारी को दोषी घोषित करना उचित नहीं होगा।जांच समिति के निष्कर्ष ही आगे की कार्रवाई का आधार बनेंगे।
मरीजों से अवैध वसूली के आरोपों की होगी जांच
शिकायतों का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू मरीजों से कथित अवैध वसूली का है।निजी अस्पतालों में उपचार के दौरान मरीजों को चिकित्सा शुल्क, जांच और दवाइयों के खर्च के संबंध में स्पष्ट जानकारी मिलना महत्वपूर्ण है।आरोप है कि कुछ अस्पतालों में नियमों का पालन किए बिना मरीजों से पैसे लिए जा रहे थे।यदि ये आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित अस्पताल प्रबंधन की जवाबदेही तय की जा सकती है।स्वास्थ्य विभाग के लिए यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि अस्पतालों में उपलब्ध सुविधाएं निर्धारित मानकों के अनुरूप हों।किसी भी मरीज को उपचार के दौरान अनावश्यक आर्थिक दबाव या नियमों के विरुद्ध वसूली का सामना नहीं करना पड़े।
पहले भी स्वास्थ्य विभाग में हुई है कार्रवाई
उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग से जुड़े अनियमितताओं और लापरवाही के मामलों में इससे पहले भी कार्रवाई की गई है।मई 2026 में राज्य सरकार ने पांच चिकित्सकों को सेवा से बर्खास्त करने और कई अन्य चिकित्सा अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए थे।उस दौरान अंबेडकर नगर में निजी अस्पतालों, नर्सिंग होम और अल्ट्रासाउंड केंद्रों के पंजीकरण तथा नवीनीकरण से जुड़ी अनियमितताओं का मामला भी सामने आया था।जांच के आधार पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई थी।हालांकि, वह मामला वर्तमान में लखनऊ, कानपुर और उन्नाव से जुड़ी शिकायतों से अलग था।
अस्पतालों की निगरानी मजबूत करने की जरूरत
निजी अस्पतालों का पंजीकरण, नवीनीकरण और निरीक्षण मरीजों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण प्रक्रिया है।किसी अस्पताल में निर्धारित चिकित्सा सुविधाएं, प्रशिक्षित कर्मचारी और आवश्यक उपकरण उपलब्ध हैं या नहीं, इसकी नियमित जांच की आवश्यकता होती है।यदि कोई अस्पताल नियमों का उल्लंघन करता है तो उसके खिलाफ कानूनी प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है।लेकिन सीलिंग जैसी कार्रवाई के बाद अस्पतालों की स्थिति पर निगरानी बनाए रखना भी जरूरी है।इस मामले में जांच समिति के सामने यह देखने की चुनौती होगी कि पहले की कार्रवाई के बाद निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन हुआ था या नहीं।
रिपोर्ट के बाद तय होगी आगे की कार्रवाई
फिलहाल स्वास्थ्य विभाग की तीन सदस्यीय जांच समिति की रिपोर्ट का इंतजार है।डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि मरीजों का शोषण करने और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए।जांच में यदि किसी अधिकारी, कर्मचारी या अस्पताल प्रबंधन की भूमिका सामने आती है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कदम उठाए जा सकेंगे।इस मामले ने एक बार फिर अस्पतालों की निगरानी और स्वास्थ्य विभाग में जवाबदेही सुनिश्चित करने की आवश्यकता को उजागर किया है।अब सभी की नजर एक सप्ताह के भीतर आने वाली जांच रिपोर्ट पर है, जिससे आरोपों की वास्तविक स्थिति और जिम्मेदार व्यक्तियों की भूमिका स्पष्ट होने की उम्मीद है।
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