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उत्तर प्रदेश
UP विधानसभा चुनाव को लेकर आयोग सक्रिय डीएम को मिला खास प्रशिक्षण
Ratna Netam
14 Sept 2026 3:19 PM IST

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर निर्वाचन आयोग ने तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी क्रम में सोमवार को राजधानी लखनऊ में 33 जिलों के जिला निर्वाचन अधिकारियों यानी डीएम समेत चुनाव प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों की महत्वपूर्ण प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला का मुख्य फोकस इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी EVM और वोटर वेरिफाएबल पेपर ऑडिट ट्रेल यानी VVPAT की फर्स्ट लेवल चेकिंग (FLC) को निर्धारित मानकों के अनुसार पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण तरीके से कराने पर रहा।
कार्यशाला में 33 जिलों के जिला निर्वाचन अधिकारी, उप जिला निर्वाचन अधिकारी और FLC सुपरवाइजर शामिल हुए। अधिकारियों को चुनाव से पहले EVM और VVPAT की जांच से जुड़ी तकनीकी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि जिलों में होने वाली फर्स्ट लेवल चेकिंग की प्रक्रिया चुनाव आयोग द्वारा तय मानकों के अनुसार पूरी की जाए। इसके साथ ही राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को भी प्रक्रिया के प्रत्येक चरण की जानकारी दी जाए ताकि पूरी व्यवस्था में पारदर्शिता बनी रहे।
EVM-VVPAT की जांच पर सबसे ज्यादा फोकस
विधानसभा चुनाव से पहले EVM और VVPAT की तकनीकी जांच एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया होती है। फर्स्ट लेवल चेकिंग के दौरान मशीनों की तकनीकी स्थिति की जांच की जाती है। इसका उद्देश्य चुनाव में इस्तेमाल से पहले यह सुनिश्चित करना होता है कि मशीनें निर्धारित मानकों के मुताबिक काम कर रही हैं।
निर्वाचन आयोग इसी प्रक्रिया को लेकर जिलों के अधिकारियों को प्रशिक्षण दे रहा है। इसमें मशीनों की जांच के दौरान अपनाई जाने वाली प्रक्रिया, रिकॉर्ड रखने, सुरक्षा व्यवस्था और राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी से जुड़े नियमों की जानकारी दी जा रही है।
अधिकारियों से कहा गया है कि FLC की पूरी प्रक्रिया में आयोग के दिशा-निर्देशों का पालन किया जाए।
राजनीतिक दलों को भी दी जाएगी जानकारी
निर्वाचन आयोग ने पारदर्शिता पर विशेष जोर दिया है। जिलों में EVM और VVPAT की फर्स्ट लेवल चेकिंग के दौरान प्रक्रिया के अलग-अलग चरणों की जानकारी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को दी जाएगी।
इसका उद्देश्य यह है कि राजनीतिक दलों को मशीनों की जांच और चुनावी तैयारियों से जुड़ी प्रक्रिया की जानकारी रहे।
आयोग के निर्देशों के अनुसार जिलों के अधिकारी FLC से संबंधित कार्यक्रम की सूचना राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को देंगे और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार जांच कराई जाएगी।
लखनऊ में हुई महत्वपूर्ण कार्यशाला
33 जिलों के अधिकारियों के लिए यह कार्यशाला लखनऊ स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया प्रशिक्षण एवं प्रबंध अकादमी में आयोजित की गई। इसमें अधिकारियों को FLC से जुड़ी तकनीकी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं का प्रशिक्षण दिया गया।
विधानसभा चुनाव में अभी समय है लेकिन निर्वाचन आयोग मशीनों की जांच से लेकर अधिकारियों के प्रशिक्षण तक की तैयारियों को पहले ही व्यवस्थित करना चाहता है।
यूपी जैसे बड़े राज्य में विधानसभा चुनाव कराना प्रशासनिक दृष्टि से बड़ी प्रक्रिया होती है। प्रदेश में कुल 403 विधानसभा सीटें हैं। ऐसे में चुनाव से काफी पहले अलग-अलग स्तर पर तैयारियां शुरू की जाती हैं।
पहले भी अधिकारियों को दिया जा चुका प्रशिक्षण
लखनऊ की कार्यशाला चुनाव आयोग के प्रशिक्षण कार्यक्रम का पहला चरण नहीं है। इससे पहले गौतमबुद्ध नगर और वाराणसी में भी जिलों के अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा के मुताबिक गौतमबुद्ध नगर में 21 जिलों और वाराणसी में 21 जिलों के अधिकारियों का प्रशिक्षण कराया जा चुका है। अब बाकी 33 जिलों के अधिकारियों को लखनऊ में प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
इस तरह प्रदेश के सभी जिलों को EVM-VVPAT की फर्स्ट लेवल चेकिंग से संबंधित प्रशिक्षण कार्यक्रम से जोड़ा जा रहा है।
वाराणसी में भी हुई थी कार्यशाला
इससे पहले वाराणसी में आयोजित कार्यशाला में पूर्वांचल के कई जिलों के जिला निर्वाचन अधिकारी, उप जिला निर्वाचन अधिकारी और EVM सुपरवाइजर शामिल हुए थे।
वाराणसी की कार्यशाला में भारत निर्वाचन आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों ने FLC की प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी थी। अधिकारियों को बताया गया था कि मशीनों की जांच के दौरान पारदर्शिता और निर्धारित प्रक्रिया का पालन सबसे महत्वपूर्ण है।
इसमें जौनपुर, गाजीपुर, चंदौली, सोनभद्र, भदोही, प्रयागराज, प्रतापगढ़, फतेहपुर, कौशाम्बी, आजमगढ़, बलिया, मऊ, गोरखपुर, देवरिया और अन्य जिलों के अधिकारी शामिल हुए थे।
क्या होती है फर्स्ट लेवल चेकिंग?
फर्स्ट लेवल चेकिंग यानी FLC चुनाव से पहले EVM और VVPAT मशीनों की तकनीकी जांच की प्रक्रिया है। इसमें यह देखा जाता है कि चुनाव में इस्तेमाल की जाने वाली मशीनें ठीक तरीके से काम कर रही हैं या नहीं।
इस प्रक्रिया का उद्देश्य तकनीकी रूप से सही मशीनों को चुनावी प्रक्रिया के लिए तैयार करना होता है। जिन मशीनों में तकनीकी समस्या मिलती है उन्हें निर्धारित प्रक्रिया के तहत अलग किया जाता है।
FLC इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि मतदान के दिन मशीनों के संचालन में किसी तरह की तकनीकी समस्या की संभावना को कम करने के लिए पहले से उनकी जांच जरूरी होती है।
चुनावी मशीनरी को किया जा रहा तैयार
निर्वाचन आयोग की मौजूदा कवायद को उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की शुरुआती प्रशासनिक तैयारियों के तौर पर देखा जा रहा है। आयोग केवल EVM-VVPAT की जांच पर ही ध्यान नहीं दे रहा बल्कि जिलों में चुनाव कराने वाले अधिकारियों को भी प्रक्रियाओं से परिचित कराया जा रहा है।
जिला निर्वाचन अधिकारी चुनाव के दौरान जिले में पूरी निर्वाचन प्रक्रिया के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनके साथ उप जिला निर्वाचन अधिकारियों और मशीनों की जांच से जुड़े सुपरवाइजरों को प्रशिक्षण देने से जिलों में एक समान प्रक्रिया लागू करने में मदद मिलती है।
यूपी में 403 विधानसभा सीटों पर होगा चुनाव
उत्तर प्रदेश में कुल 403 विधानसभा सीटें हैं। देश में सबसे अधिक विधानसभा सीटों वाले राज्यों में यूपी सबसे आगे है। राज्य के आकार और मतदाताओं की बड़ी संख्या को देखते हुए यहां चुनाव कराने के लिए व्यापक स्तर पर प्रशासनिक और तकनीकी तैयारियां करनी पड़ती हैं।
पिछला उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 में हुआ था। अगला नियमित विधानसभा चुनाव 2027 में होना है।
राजनीतिक दलों ने भी अपने स्तर पर आगामी चुनाव की तैयारियां शुरू कर दी हैं। दूसरी तरफ निर्वाचन आयोग निष्पक्ष और सुचारू चुनाव कराने के लिए अपनी प्रशासनिक मशीनरी तैयार करने में जुटा है।
EVM की पारदर्शिता पर आयोग का जोर
EVM को लेकर राजनीतिक दलों के बीच समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में निर्वाचन आयोग फर्स्ट लेवल चेकिंग की प्रक्रिया में राजनीतिक दलों की जानकारी और भागीदारी पर विशेष जोर दे रहा है।
आयोग चाहता है कि मशीनों की शुरुआती जांच से जुड़ी प्रक्रिया तय नियमों के अनुसार हो और संबंधित राजनीतिक दलों को इसकी जानकारी रहे।
इसके लिए जिलों के अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को FLC कार्यक्रम और उसके अलग-अलग चरणों के बारे में निर्धारित प्रक्रिया के तहत सूचित किया जाए।
चुनाव से पहले आगे भी जारी रहेंगी तैयारियां
EVM और VVPAT की फर्स्ट लेवल चेकिंग चुनावी तैयारियों के कई चरणों में से एक है। आने वाले महीनों में मतदाता सूची, मतदान केंद्रों, चुनाव कर्मचारियों के प्रशिक्षण, सुरक्षा और अन्य व्यवस्थाओं से जुड़ी गतिविधियां भी आगे बढ़ेंगी।
फिलहाल निर्वाचन आयोग का फोकस EVM-VVPAT की जांच प्रक्रिया को व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने पर है। लखनऊ में 33 जिलों के अधिकारियों की कार्यशाला इसी दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है।
कुल मिलाकर उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की प्रशासनिक तैयारियों ने रफ्तार पकड़ ली है। पहले गौतमबुद्ध नगर और वाराणसी तथा अब लखनऊ में अधिकारियों को प्रशिक्षण दिए जाने के साथ निर्वाचन आयोग जिला स्तर की मशीनरी को तैयार कर रहा है। 33 जिलों के डीएम और अन्य चुनाव अधिकारियों की लखनऊ कार्यशाला में EVM-VVPAT की फर्स्ट लेवल चेकिंग सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा रही। आने वाले समय में चुनाव की तारीख करीब आने के साथ आयोग की तैयारियां और व्यापक होती जाएंगी।
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