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उत्तर प्रदेश
2047 तक शिक्षक जन-जन तक पहुंचाएं विकसित भारत का संकल्प: CM योगी
Alisha
4 Oct 2026 4:49 PM IST

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उत्तर प्रदेश : के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिक्षकों को समाज की चेतना और राष्ट्र के भविष्य के निर्माण में महत्वपूर्ण कड़ी बताते हुए कहा कि युवा पीढ़ी को सही दिशा देने में उनकी भूमिका बेहद अहम है। उन्होंने शिक्षकों से विद्यार्थियों में कर्तव्यबोध, सामाजिक समरसता, भारतीय विरासत के प्रति सम्मान और राष्ट्र निर्माण की भावना विकसित करने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षक जागरूक होकर अपनी जिम्मेदारी निभाएं तो युवा पीढ़ी 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रविवार को लखनऊ स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के डॉ. बीआर आंबेडकर सभागार में आयोजित प्रांतीय शिक्षक गरिमा कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में शिक्षा, संस्कृति, सामाजिक चेतना और राष्ट्र निर्माण में शिक्षकों की भूमिका पर चर्चा हुई। योगी ने कहा कि शिक्षक का काम केवल विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम पढ़ाना नहीं है, बल्कि उनके व्यक्तित्व और विचारों को दिशा देना भी है।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में सामाजिक एकता पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत को जाति, क्षेत्र और भाषा के आधार पर अलग-अलग खेमों में बांटने के बजाय ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की भावना को मजबूत करने की आवश्यकता है। उनके मुताबिक समाज में विभाजन पैदा करने वाली प्रवृत्तियों को रोकने में शिक्षक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं, क्योंकि विद्यार्थियों के विचारों और व्यवहार पर शिक्षक का गहरा प्रभाव होता है।
योगी ने कहा कि शिक्षक विद्यार्थियों को प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करने के साथ-साथ उनमें राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी और कर्तव्य का भाव भी पैदा करें। उन्होंने भारत की प्राचीन गुरु-शिष्य और ज्ञान परंपरा का उल्लेख करते हुए चाणक्य-चंद्रगुप्त, महर्षि वशिष्ठ-श्रीराम और महर्षि सांदीपनि-श्रीकृष्ण जैसे उदाहरणों का जिक्र किया। मुख्यमंत्री के अनुसार भारत की ज्ञान परंपरा ने दुनिया को दिशा दी है और वर्तमान पीढ़ी को इस विरासत के बारे में जानकारी देना जरूरी है।
मुख्यमंत्री ने 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य का भी जिक्र किया। उन्होंने शिक्षकों से इस संकल्प को जन-जन तक पहुंचाने और खासकर विद्यार्थियों को इससे जोड़ने की अपील की। वर्ष 2047 में भारत अपनी स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे करेगा। योगी ने कहा कि वर्तमान युवा पीढ़ी ही उस समय देश के विभिन्न क्षेत्रों में नेतृत्वकारी जिम्मेदारियां निभा रही होगी, इसलिए आज उसे मिलने वाली शिक्षा और मार्गदर्शन भविष्य के भारत की दिशा तय करने में भूमिका निभाएगा।
उन्होंने अधिकारों के साथ नागरिक कर्तव्यों को भी महत्व देने की बात कही। मुख्यमंत्री का कहना था कि विकसित भारत का लक्ष्य केवल सरकार की योजनाओं से पूरा नहीं हो सकता, बल्कि इसके लिए नागरिकों की सक्रिय भागीदारी और जिम्मेदारी भी जरूरी है। उन्होंने विद्यार्थियों में यह भावना विकसित करने की जिम्मेदारी शिक्षकों से निभाने का आह्वान किया।
कार्यशाला में योगी आदित्यनाथ ने अखिल विश्व गायत्री परिवार के सौ वर्ष पूरे होने का उल्लेख भी किया। उन्होंने पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य और माता भगवती देवी के योगदान को याद किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज में विचार लंबे समय तक प्रभाव छोड़ते हैं और संस्थाएं उन्हीं विचारों को आगे बढ़ाकर जनचेतना का निर्माण करती हैं। उन्होंने 1923 में गीता प्रेस, 1925 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और 1926 में अखिल विश्व गायत्री परिवार की स्थापना का उल्लेख करते हुए कहा कि इन संस्थाओं ने अलग-अलग तरीकों से समाज में जनचेतना जगाने का काम किया।
योगी ने परिवार और सामाजिक व्यवस्था पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने सामाजिक समरसता को मजबूत करने की आवश्यकता बताते हुए कहा कि लोगों को आपस में जोड़ने की दिशा में काम होना चाहिए। उनके अनुसार जाति, क्षेत्र या दूसरे आधारों पर समाज में दूरी बढ़ाने के बजाय समानता और एकता की भावना को बढ़ावा देना जरूरी है।
पर्यावरण संरक्षण का मुद्दा भी मुख्यमंत्री के संबोधन में शामिल रहा। उन्होंने नदियों को स्वच्छ और अविरल बनाए रखने तथा पौधों के संरक्षण पर जोर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रकृति किसी व्यक्ति के साथ भेदभाव नहीं करती और इसी प्रकार समाज में भी भेदभाव की जगह समानता का भाव होना चाहिए।
कार्यक्रम के दौरान भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन करने वाले स्कूलों को सम्मानित भी किया गया। कार्यशाला में अखिल विश्व गायत्री परिवार के डॉ. चिन्मय पंड्या, उत्तर प्रदेश के जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह और विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह समेत कई प्रतिनिधि मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री के संबोधन का प्रमुख केंद्र युवा पीढ़ी और शिक्षक रहे। उन्होंने शिक्षकों से कहा कि विद्यार्थियों को आधुनिक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करने के साथ उन्हें अपनी संस्कृति, सामाजिक जिम्मेदारी और नागरिक कर्तव्यों से भी परिचित कराना जरूरी है। उनके अनुसार आज के विद्यार्थी ही आने वाले वर्षों में डॉक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक, शिक्षक, उद्यमी और अन्य क्षेत्रों में देश का नेतृत्व करेंगे।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए शिक्षा और युवा शक्ति महत्वपूर्ण आधार हैं। उन्होंने शिक्षकों से विद्यार्थियों में सकारात्मक सोच, सामाजिक समरसता और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी विकसित करने की अपील की। मुख्यमंत्री के मुताबिक शिक्षा केवल रोजगार हासिल करने का माध्यम न रहकर जिम्मेदार नागरिक और मजबूत समाज तैयार करने का आधार भी बननी चाहिए।
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