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उत्तर प्रदेश
‘गरबा पार्टनर’ के नाम पर नया खेल, एक क्लिक पड़ सकता है भारी
Alisha
4 Oct 2026 4:24 PM IST

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उत्तर प्रदेश:लखनऊ नवरात्रि और गरबा के उत्साह के बीच साइबर ठग लोगों को निशाना बनाने के लिए नए-नए तरीके अपना रहे हैं। सोशल मीडिया पर गरबा इवेंट, एंट्री पास और पार्टनर उपलब्ध कराने से जुड़े ऑफर दिखाई देने के बीच उत्तर प्रदेश पुलिस ने लोगों को ऑनलाइन धोखाधड़ी से सावधान रहने की सलाह दी है। पुलिस ने चेतावनी दी है कि अनजान वेबसाइट, सोशल मीडिया अकाउंट या संदिग्ध लिंक के जरिए ऑनलाइन गरबा पार्टनर बुक करने की कोशिश लोगों को आर्थिक नुकसान में डाल सकती है।
सोशल मीडिया पर इन दिनों 'रेंट ए गरबा पार्टनर', 'गरबा पार्टनर बुकिंग' और इसी तरह के आकर्षक ऑफर देखने को मिल सकते हैं। साइबर अपराधी ऐसे ऑफर का फायदा उठाकर लोगों को अपने जाल में फंसाने की कोशिश कर सकते हैं। इसके लिए आकर्षक प्रोफाइल, फोटो और कम कीमत में पार्टनर उपलब्ध कराने जैसे दावे किए जा सकते हैं। इसके बाद रजिस्ट्रेशन या बुकिंग के नाम पर व्यक्तिगत और बैंकिंग जानकारी मांगी जा सकती है।
ठगी का तरीका काफी सामान्य लेकिन खतरनाक हो सकता है। सबसे पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आकर्षक विज्ञापन या पोस्ट दिखाई जाती है। इसमें गरबा कार्यक्रम के लिए पार्टनर उपलब्ध कराने का दावा किया जाता है। इच्छुक व्यक्ति जैसे ही दिए गए लिंक पर क्लिक करता है, उसे किसी वेबसाइट या फॉर्म पर भेजा जा सकता है। यहां नाम, मोबाइल नंबर, ईमेल और दूसरी व्यक्तिगत जानकारी भरने के लिए कहा जा सकता है।
इसके बाद बुकिंग फीस, सिक्योरिटी डिपॉजिट, रजिस्ट्रेशन फीस या अन्य शुल्क के नाम पर ऑनलाइन भुगतान करने को कहा जा सकता है। ठग भुगतान के लिए QR कोड, UPI लिंक या संदिग्ध पेमेंट पेज भेज सकते हैं। जल्द बुकिंग करने पर छूट मिलने या सीमित स्लॉट बचे होने जैसी बातें कहकर व्यक्ति पर जल्दी भुगतान करने का दबाव भी बनाया जा सकता है।
साइबर ठगी के मामलों में सबसे बड़ा खतरा तब पैदा होता है, जब लोग बिना जांच किए अपनी संवेदनशील जानकारी साझा कर देते हैं। बैंक अकाउंट नंबर, डेबिट या क्रेडिट कार्ड की जानकारी, OTP, UPI PIN और पासवर्ड जैसी जानकारियां किसी भी परिस्थिति में अनजान व्यक्ति या संदिग्ध वेबसाइट पर साझा नहीं करनी चाहिए। साइबर अपराधी इन जानकारियों का इस्तेमाल बैंक खाते से पैसे निकालने या दूसरे ऑनलाइन अपराधों में कर सकते हैं।
लोगों को QR कोड से जुड़े धोखे को लेकर भी सतर्क रहने की जरूरत है। किसी व्यक्ति से पैसे प्राप्त करने के लिए आम तौर पर UPI PIN डालने की आवश्यकता नहीं होती। अगर कोई व्यक्ति पैसे भेजने का दावा करते हुए QR कोड स्कैन करने या UPI PIN दर्ज करने के लिए कहता है, तो सावधानी बरतनी चाहिए। किसी भी भुगतान से पहले प्राप्तकर्ता का नाम और भुगतान की रकम अच्छी तरह जांचना जरूरी है।
ऑनलाइन बुकिंग करते समय वेबसाइट की प्रामाणिकता की जांच करना भी जरूरी है। केवल सोशल मीडिया विज्ञापन देखकर किसी प्लेटफॉर्म को विश्वसनीय नहीं माना जाना चाहिए। वेबसाइट के बारे में जानकारी, आयोजक का विवरण और आधिकारिक संपर्क माध्यम की पुष्टि करने के बाद ही आगे बढ़ना बेहतर है। बेहद सस्ते ऑफर या तुरंत भुगतान करने का दबाव साइबर ठगी का संकेत हो सकता है।
सोशल मीडिया पर अनजान लोगों की ओर से भेजे गए लिंक को खोलने से भी बचना चाहिए। कई बार ऐसे लिंक असली वेबसाइट की तरह दिखाई देते हैं, लेकिन उनका उद्देश्य लॉगिन जानकारी या बैंकिंग डेटा हासिल करना होता है। इसी तरह अनजान स्रोत से कोई ऐप या APK फाइल डाउनलोड करना भी मोबाइल फोन की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है।
साइबर ठग लोगों का भरोसा जीतने के लिए फर्जी प्रोफाइल और तस्वीरों का सहारा भी ले सकते हैं। किसी आकर्षक प्रोफाइल फोटो या सोशल मीडिया अकाउंट को देखकर सामने वाले व्यक्ति की पहचान वास्तविक मान लेना सुरक्षित नहीं है। फोटो और दूसरी जानकारियां इंटरनेट से चोरी की गई हो सकती हैं। इसलिए ऑनलाइन मिले किसी अनजान व्यक्ति को निजी तस्वीरें, पहचान पत्र या वित्तीय जानकारी भेजने से बचना चाहिए।
अगर किसी व्यक्ति के साथ ऑनलाइन धोखाधड़ी हो जाती है तो समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। भारत में साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायत के लिए राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन **1930** पर संपर्क किया जा सकता है। इसके अलावा आधिकारिक नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज की जा सकती है। जितनी जल्दी शिकायत दर्ज होती है, संबंधित एजेंसियों के लिए संदिग्ध लेनदेन पर कार्रवाई की संभावना उतनी बेहतर हो सकती है।
त्योहारों के समय साइबर अपराधी लोगों के उत्साह और जल्दबाजी का फायदा उठाने की कोशिश करते हैं। गरबा पास, डांडिया इवेंट टिकट, पार्टनर बुकिंग या भारी डिस्काउंट जैसे ऑफर देखकर तुरंत भुगतान करने के बजाय पहले उसकी सत्यता जांचना जरूरी है।
UP पुलिस की साइबर जागरूकता का मुख्य संदेश यही है कि इंटरनेट पर आकर्षक दिखाई देने वाला हर ऑफर असली नहीं होता। किसी भी ऑनलाइन सेवा का इस्तेमाल करते समय अपनी व्यक्तिगत और बैंकिंग जानकारी सुरक्षित रखें, अनजान लिंक पर क्लिक न करें, OTP और UPI PIN किसी को न बताएं और संदिग्ध भुगतान अनुरोध को स्वीकार न करें। थोड़ी सी सतर्कता ऑनलाइन गरबा पार्टनर बुकिंग जैसे नए तरीकों से होने वाली साइबर ठगी से बचाने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
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