उत्तर प्रदेश

सरकार की एथनॉल नीति का समर्थन, किसानों को होगा फायदा

Ratna Netam
4 Aug 2026 3:34 PM IST
सरकार की एथनॉल नीति का समर्थन, किसानों को होगा फायदा
x

मेरठ : भारतीय किसान यूनियन धनसिंह कोतवाल ने एथनॉल नीति को लेकर फैल रही कथित भ्रामक सूचनाओं पर चिंता जताते हुए कहा कि किसानों से जुड़े इस महत्वपूर्ण विषय पर सही और तथ्यात्मक जानकारी लोगों तक पहुंचनी चाहिए। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष पवन गुर्जर ने प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि एथनॉल उत्पादन को बढ़ावा देना केवल ऊर्जा क्षेत्र के लिए ही नहीं, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने सरकार से आगामी पेराई सत्र में गन्ने का समर्थन मूल्य कम से कम 600 रुपये प्रति क्विंटल घोषित करने और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने की मांग की।

प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए पवन गुर्जर ने कहा कि भारत एक कृषि प्रधान देश है और देश की अर्थव्यवस्था की मजबूती किसानों की आर्थिक स्थिति पर निर्भर करती है। उनका कहना था कि यदि किसानों की आय बढ़ेगी तो इसका सीधा सकारात्मक प्रभाव देश के समग्र विकास पर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि एथनॉल उत्पादन में वृद्धि से गन्ना, मक्का और धान जैसे प्रमुख फसलों की मांग बढ़ेगी, जिससे किसानों को बेहतर मूल्य मिलने की संभावना बनेगी।

उन्होंने विशेष रूप से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों का उल्लेख करते हुए कहा कि एथनॉल नीति उनके लिए काफी लाभदायक साबित हो सकती है। यदि चीनी मिलों में एथनॉल उत्पादन बढ़ता है तो गन्ने की खपत बढ़ेगी, जिससे किसानों की उपज की मांग में इजाफा होगा। इसके साथ ही चीनी मिलों की आर्थिक स्थिति मजबूत होने से किसानों के बकाया भुगतान की समस्या में भी कमी आने की उम्मीद है। उनका कहना था कि वर्षों से गन्ना भुगतान में होने वाली देरी किसानों के लिए बड़ी समस्या रही है और एथनॉल उत्पादन इस स्थिति में सुधार ला सकता है।

पवन गुर्जर ने कहा कि एथनॉल केवल किसानों की आय बढ़ाने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह देश को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि जैव ईंधन के रूप में एथनॉल के उपयोग से पेट्रोलियम उत्पादों पर निर्भरता कम होगी, विदेशी मुद्रा की बचत होगी और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। उनका मानना है कि स्वच्छ ईंधन के रूप में एथनॉल का बढ़ता उपयोग प्रदूषण कम करने में भी सहायक होगा।

संगठन ने सरकार से किसानों के हित में कई अन्य मांगें भी रखीं। पवन गुर्जर ने कहा कि आगामी पेराई सत्र के लिए गन्ने का समर्थन मूल्य कम से कम 600 रुपये प्रति क्विंटल तय किया जाना चाहिए। इसके अलावा सभी प्रमुख कृषि उपजों के लिए घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य का पारदर्शी और प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए ताकि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सके। उन्होंने कहा कि केवल एमएसपी घोषित करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी जरूरी है कि किसानों को वास्तव में उस मूल्य पर अपनी उपज बेचने का अवसर मिले।

उन्होंने जानकारी दी कि भारतीय किसान यूनियन धनसिंह कोतवाल का एक प्रतिनिधिमंडल जल्द ही केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से मुलाकात करेगा। इस दौरान एथनॉल नीति के समर्थन में ज्ञापन सौंपा जाएगा और नीति को अधिक किसान हितैषी बनाने के लिए सुझाव भी दिए जाएंगे। प्रतिनिधिमंडल में विभिन्न राज्यों के प्रदेश अध्यक्ष, वरिष्ठ पदाधिकारी और किसान प्रतिनिधि शामिल होंगे।

पवन गुर्जर ने भविष्य की योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि आने वाले समय में वाहन निर्माताओं को ई-50 या उससे अधिक एथनॉल मिश्रित ईंधन पर चलने वाले आधुनिक और उच्च गुणवत्ता वाले वाहनों के निर्माण के लिए भी प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। उनका कहना था कि इससे एथनॉल की मांग और बढ़ेगी तथा किसानों को लंबे समय तक इसका लाभ मिलेगा।

उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय किसान यूनियन धनसिंह कोतवाल किसी भी राजनीतिक दल से संबद्ध संगठन नहीं है। संगठन का उद्देश्य केवल किसानों, मजदूरों और युवाओं के हितों की रक्षा करना है। उन्होंने कहा कि सरकार यदि किसानों के हित में कोई निर्णय लेती है तो संगठन उसका समर्थन करेगा, लेकिन यदि भविष्य में कोई नीति किसान, मजदूर या नौजवानों के हितों के विरुद्ध जाती है तो लोकतांत्रिक तरीके से उसका विरोध भी किया जाएगा।

प्रेस वार्ता में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए संगठन के पदाधिकारी, किसान प्रतिनिधि, मजदूर और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे। सभी ने एथनॉल नीति के समर्थन में अपनी सहमति व्यक्त करते हुए सरकार से किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की अपील की।

अंत में पवन गुर्जर ने मीडिया से भी आग्रह किया कि एथनॉल नीति जैसे महत्वपूर्ण विषय पर केवल प्रमाणिक और तथ्यात्मक जानकारी ही जनता तक पहुंचाई जाए। उनका कहना था कि गलत या भ्रामक सूचनाओं से किसानों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा होती है, जिससे वे अपने भविष्य से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय लेने में कठिनाई महसूस करते हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि सरकार, किसान संगठनों और समाज के सहयोग से एथनॉल नीति किसानों की आय बढ़ाने और देश को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

Next Story