उत्तर प्रदेश

69 साल बाद खुलेगा 2800 साल पुराने कंकाल का राज, BHU में होगी जांच

Kavita2
4 Aug 2026 3:23 PM IST
69 साल बाद खुलेगा 2800 साल पुराने कंकाल का राज, BHU में होगी जांच
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वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के पुरातत्व विभाग में पिछले 69 वर्षों से सुरक्षित रखा गया लगभग 2800 वर्ष पुराना मानव कंकाल मंगलवार को पहली बार संदूक से बाहर निकाला जाएगा। यह ऐतिहासिक कंकाल 1957 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा वाराणसी के राजघाट क्षेत्र में किए गए शुरुआती उत्खनन के दौरान प्राप्त हुआ था। इतने लंबे समय तक सुरक्षित रखे गए इस पुरातात्विक अवशेष की अब वैज्ञानिक जांच की जाएगी, जिससे प्राचीन मानव जीवन और उस समय की सभ्यता से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्यों का पता चलने की उम्मीद है।

जानकारी के अनुसार, राजघाट में 1957 में किए गए उत्खनन के दौरान एएसआई को कई पुरातात्विक अवशेष मिले थे। इन्हीं अवशेषों में करीब छह फीट लंबे मानव कंकाल का भी पता चला था। कंकाल को विशेष सावधानी के साथ संरक्षित किया गया और बाद में इसे बीएचयू के पुरातत्व विभाग को सौंप दिया गया।

बीएचयू के पुरातत्व विभाग में यह कंकाल पिछले कई दशकों से एक विशेष संदूक में सुरक्षित रखा हुआ था। समय के साथ यह कंकाल शोधकर्ताओं और पुरातत्वविदों के लिए जिज्ञासा का विषय बना रहा, लेकिन इसकी विस्तृत वैज्ञानिक जांच नहीं हो सकी थी। अब विभाग ने इसे अध्ययन के लिए बाहर निकालने का निर्णय लिया है।

विभागाध्यक्ष प्रो. एमपी अहिरवार ने इस प्राचीन कंकाल की वैज्ञानिक जांच कराने का फैसला लिया है। जांच के दौरान कंकाल की उम्र, मानव जीवन शैली, स्वास्थ्य स्थिति और उस समय के सामाजिक एवं सांस्कृतिक परिवेश से जुड़े पहलुओं का अध्ययन किया जाएगा।

वैज्ञानिक जांच में आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किए जाने की संभावना है। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे प्राचीन कंकालों के अध्ययन से उस कालखंड के लोगों के खान-पान, शारीरिक संरचना, जीवन प्रत्याशा और बीमारियों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है।

पुरातत्व विशेषज्ञों का मानना है कि करीब 2800 वर्ष पुराने इस कंकाल का अध्ययन वाराणसी और आसपास के प्राचीन इतिहास को समझने में मददगार साबित हो सकता है। राजघाट क्षेत्र को प्राचीन सभ्यता और सांस्कृतिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। यहां समय-समय पर हुए उत्खननों में कई ऐतिहासिक अवशेष सामने आए हैं।

राजघाट का पुरातात्विक महत्व काफी पुराना है। यह क्षेत्र प्राचीन काशी के इतिहास से जुड़ा हुआ है और यहां मिले अवशेषों से हजारों वर्ष पुराने मानव जीवन और संस्कृति की जानकारी मिलती है। ऐसे में इस कंकाल की जांच से इतिहास के कई अनछुए पहलुओं पर रोशनी पड़ सकती है।

बीएचयू के पुरातत्व विभाग के अधिकारियों के अनुसार, कंकाल को संदूक से निकालने के दौरान पूरी सावधानी बरती जाएगी, ताकि इतने वर्षों से सुरक्षित इस अवशेष को किसी प्रकार का नुकसान न पहुंचे। विशेषज्ञों की टीम इसके संरक्षण और जांच की प्रक्रिया को वैज्ञानिक तरीके से पूरा करेगी।

इतिहासकारों और शोधकर्ताओं में भी इस जांच को लेकर उत्सुकता है। उनका मानना है कि लंबे समय से सुरक्षित इस कंकाल से मिलने वाली जानकारी प्राचीन काशी के सामाजिक और जैविक इतिहास को समझने में अहम भूमिका निभा सकती है।

कंकाल की जांच के बाद यह पता लगाने का प्रयास किया जाएगा कि यह किस कालखंड के व्यक्ति का है और उस समय के लोगों की जीवन परिस्थितियां कैसी थीं। इसके अलावा यह भी जानने की कोशिश होगी कि व्यक्ति की मृत्यु किन परिस्थितियों में हुई थी।

बीएचयू का पुरातत्व विभाग पहले भी कई महत्वपूर्ण पुरातात्विक शोधों से जुड़ा रहा है। अब इस 2800 वर्ष पुराने कंकाल की वैज्ञानिक जांच विभाग के लिए एक महत्वपूर्ण शोध परियोजना बन गई है।

करीब सात दशक तक एक संदूक में बंद रहने के बाद यह प्राचीन अवशेष अब शोध की नई दिशा खोलने जा रहा है। विशेषज्ञों को उम्मीद है कि इस जांच के परिणाम प्राचीन काशी के इतिहास और उस समय की मानव सभ्यता को समझने में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।

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