- Home
- /
- राज्य
- /
- उत्तर प्रदेश
- /
- पूर्वांचल...
पूर्वांचल विश्वविद्यालय में छात्रों ने कुलपति को सौंपा 12 सूत्रीय ज्ञापन

जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों की शैक्षणिक और मूलभूत समस्याओं को लेकर मंगलवार को छात्र-छात्राओं ने कुलपति प्रो. राकेश कुमार सिंह को 12 सूत्रीय ज्ञापन सौंपा। छात्रा नेत्री ईश्विका सिंह के नेतृत्व में पहुंचे प्रतिनिधिमंडल ने विश्वविद्यालय में कक्षाओं, प्रयोगशालाओं और शिक्षकों से जुड़ी समस्याओं को कुलपति के सामने रखा। विद्यार्थियों से बातचीत के बाद कुलपति स्वयं प्रबंध अध्ययन संकाय पहुंचे और वहां छात्र-छात्राओं से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं की जानकारी ली।
विद्यार्थियों ने ज्ञापन में व्यवसाय प्रशासन के छात्रों के लिए पर्याप्त कक्ष उपलब्ध कराने की मांग प्रमुखता से रखी। छात्रों का कहना था कि कक्षों की संख्या पर्याप्त नहीं होने से नियमित पढ़ाई प्रभावित हो रही है। संख्या के अनुसार कक्ष उपलब्ध कराए जाने से विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल सकेगा।
वाणिज्य के द्वितीय और तृतीय वर्ष में छात्रों की संख्या अधिक होने के कारण अलग-अलग वर्ग संचालित करने की मांग भी उठाई गई। विद्यार्थियों का कहना था कि बड़ी संख्या में एक ही कक्षा में पढ़ाई होने से शिक्षण व्यवस्था प्रभावित होती है और सभी छात्रों तक शिक्षक की बात प्रभावी तरीके से नहीं पहुंच पाती।
प्रतिनिधिमंडल ने संगणक विषय के लिए कार्यशील प्रयोगशाला उपलब्ध कराने की मांग की। छात्रों ने बताया कि प्रायोगिक पढ़ाई के लिए कंप्यूटर लैब की जरूरत है, लेकिन मौजूदा व्यवस्था पर्याप्त नहीं है। खराब पड़े कंप्यूटरों की मरम्मत कराने या जरूरत के मुताबिक उन्हें बदलने की मांग भी ज्ञापन में शामिल की गई।
विद्यार्थियों ने कहा कि केवल पाठ्यक्रम की सैद्धांतिक पढ़ाई से संगणक जैसे विषय की तैयारी पूरी नहीं हो सकती। विद्यार्थियों को नियमित रूप से प्रयोगशाला में अभ्यास करने का अवसर मिलना चाहिए। इसके लिए पर्याप्त संख्या में कार्यशील कंप्यूटर होना जरूरी है।
इसके साथ ही संगणक विषय के लिए विषय विशेषज्ञ शिक्षक नियुक्त करने या उपलब्ध कराने की मांग भी रखी गई। विद्यार्थियों का कहना था कि संबंधित विषय की पढ़ाई विशेषज्ञ शिक्षक से होने पर पाठ्यक्रम को समझने और प्रायोगिक कार्य करने में आसानी होगी।
छात्रा नेत्री ईश्विका सिंह ने कुलपति के सामने विद्यार्थियों की समस्याओं को विस्तार से रखा। उन्होंने कहा कि छात्रों की मांगें सीधे उनकी पढ़ाई और परिसर में मिलने वाली बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी हैं।
ज्ञापन मिलने के बाद कुलपति प्रो. राकेश कुमार सिंह ने छात्र प्रतिनिधिमंडल से बातचीत की। उन्होंने विद्यार्थियों से अलग-अलग समस्याओं के बारे में जानकारी ली और संबंधित व्यवस्थाओं की स्थिति समझी।
इसके बाद कुलपति स्वयं प्रबंध अध्ययन संकाय पहुंचे। उन्होंने वहां मौजूद विद्यार्थियों से बातचीत कर यह जानने का प्रयास किया कि कक्षाओं, प्रयोगशालाओं और शिक्षण व्यवस्था में उन्हें किन परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
कुलपति के अचानक संकाय पहुंचने के बाद विद्यार्थियों ने उनके सामने अपनी समस्याएं सीधे रखीं। छात्रों ने कक्षों की कमी और कंप्यूटर लैब की स्थिति से संबंधित जानकारी दी।
छात्रों ने कहा कि खराब कंप्यूटरों के कारण प्रायोगिक पढ़ाई प्रभावित हो रही है। ऐसे कंप्यूटर जिनकी मरम्मत संभव है, उन्हें जल्द ठीक कराया जाए और जो उपकरण उपयोग योग्य नहीं रह गए हैं, उन्हें आवश्यकता के अनुसार बदल दिया जाए।
विद्यार्थियों ने इस बात पर भी जोर दिया कि विश्वविद्यालय में उपलब्ध संसाधनों का नियमित निरीक्षण होना चाहिए, ताकि किसी उपकरण में खराबी आने पर उसे लंबे समय तक अनुपयोगी न छोड़ना पड़े।
व्यवसाय प्रशासन के विद्यार्थियों ने पर्याप्त क्लासरूम की मांग करते हुए कहा कि उनकी संख्या के हिसाब से शिक्षण कक्ष उपलब्ध होने चाहिए। इससे नियमित समय-सारिणी के अनुसार कक्षाओं का संचालन किया जा सकेगा।
वाणिज्य संकाय के छात्रों ने द्वितीय और तृतीय वर्ष में छात्र संख्या के अनुरूप अलग वर्ग बनाने की आवश्यकता बताई। उनका कहना था कि एक कक्षा में ज्यादा विद्यार्थी होने से बैठने और पढ़ाई दोनों में कठिनाई होती है।
विद्यार्थियों की मांगों में शैक्षणिक सुविधाओं के साथ मूलभूत व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने पर भी जोर दिया गया है। 12 सूत्रीय ज्ञापन में छात्रहित से जुड़े अलग-अलग बिंदुओं को शामिल किया गया।
कुलपति ने छात्रों की बात सुनते हुए संबंधित अधिकारियों से व्यवस्थाओं की जानकारी लेने की बात कही। विद्यार्थियों ने अपेक्षा जताई कि उनकी समस्याओं पर जल्द कार्रवाई होगी।
विश्वविद्यालय परिसर में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं का कहना है कि शिक्षण गुणवत्ता बेहतर बनाने के लिए कक्षा और प्रयोगशाला दोनों का व्यवस्थित होना जरूरी है। खासकर ऐसे पाठ्यक्रम जिनमें प्रायोगिक अध्ययन शामिल है, उनमें आवश्यक उपकरण उपलब्ध होने चाहिए।
कंप्यूटर आधारित विषयों में नियमित अभ्यास के लिए प्रत्येक विद्यार्थी को पर्याप्त समय मिलना चाहिए। यदि लैब में कंप्यूटरों की संख्या कम या मशीनें खराब हों तो विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होती है।
छात्र प्रतिनिधियों ने विषय विशेषज्ञ शिक्षकों की उपलब्धता को भी महत्वपूर्ण बताया। उनका कहना है कि संबंधित विषय की गहराई से पढ़ाई के लिए विशेषज्ञ शिक्षक जरूरी हैं।
विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की कि सभी समस्याओं के समाधान के लिए स्पष्ट व्यवस्था बनाई जाए और समयबद्ध तरीके से आवश्यक सुधार किए जाएं।
कुलपति के प्रबंध अध्ययन संकाय पहुंचकर सीधे विद्यार्थियों से बातचीत करने को छात्रों ने सकारात्मक पहल के रूप में देखा। इससे छात्र अपनी समस्याओं को बिना किसी मध्यस्थ के सीधे कुलपति के सामने रख सके।
इस दौरान विद्यार्थियों ने उन समस्याओं का भी उल्लेख किया जिनका उन्हें रोजाना कक्षाओं के संचालन के दौरान सामना करना पड़ रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने उनकी बातों को सुना और संबंधित स्तर पर कार्रवाई का भरोसा दिलाया।
छात्रों का कहना है कि शैक्षणिक सुविधाओं की कमी का सीधा असर उनकी पढ़ाई और परीक्षा की तैयारी पर पड़ता है। इसलिए इन समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर दूर किया जाना चाहिए।
मंगलवार को हुए इस घटनाक्रम के बाद विश्वविद्यालय में छात्रों की 12 सूत्रीय मांगें चर्चा में आ गई हैं। अब विद्यार्थियों की नजर प्रशासन की ओर से उठाए जाने वाले कदमों पर है।
छात्र प्रतिनिधिमंडल ने साफ किया कि उनकी मांगों का उद्देश्य परिसर में बेहतर शैक्षणिक माहौल और जरूरी सुविधाएं सुनिश्चित कराना है। पर्याप्त कक्ष, अलग-अलग वर्ग, कार्यशील कंप्यूटर लैब और विशेषज्ञ शिक्षकों की व्यवस्था उनकी प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है।
फिलहाल कुलपति प्रो. राकेश कुमार सिंह ने विद्यार्थियों की समस्याओं को सीधे सुना है और प्रबंध अध्ययन संकाय पहुंचकर वास्तविक स्थिति की जानकारी ली है। छात्र-छात्राओं को उम्मीद है कि 12 सूत्रीय ज्ञापन में रखी गई मांगों पर विश्वविद्यालय प्रशासन जल्द ठोस कदम उठाएगा।





