उत्तर प्रदेश

वाराणसी स्नातक से केदारनाथ सिंह और शिक्षक सीट से डॉ. प्रमोद मिश्रा को BJP का टिकट

Kavita2
29 Sept 2026 4:24 PM IST
वाराणसी स्नातक से केदारनाथ सिंह और शिक्षक सीट से डॉ. प्रमोद मिश्रा को BJP का टिकट
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वाराणसी। भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश विधान परिषद चुनाव 2026 के लिए वाराणसी खंड की स्नातक और शिक्षक सीटों पर अपने प्रत्याशियों के नाम घोषित कर दिए हैं। पार्टी ने वाराणसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से केदारनाथ सिंह और वाराणसी शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से डॉ. प्रमोद मिश्रा को उम्मीदवार बनाया है। मंगलवार दोपहर पार्टी की ओर से जारी सूची में उत्तर प्रदेश की कुल छह सीटों के प्रत्याशियों के नाम शामिल किए गए। उत्तर प्रदेश विधान परिषद वर्तमान में सक्रिय है और उसके आधिकारिक पोर्टल पर 2026 से जुड़ी परिषद की सूचनाएं उपलब्ध हैं।

पार्टी की ओर से राष्ट्रीय मुख्यालय से जारी पत्र में दोनों वाराणसी सीटों के उम्मीदवारों के नाम शामिल किए गए हैं। सूची सामने आने के बाद वाराणसी में स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। भाजपा संगठन अब दोनों उम्मीदवारों के समर्थन में चुनावी तैयारी को आगे बढ़ाएगा।

वाराणसी स्नातक सीट से प्रत्याशी बनाए गए केदारनाथ सिंह का विधान परिषद चुनाव से पुराना संबंध रहा है। वह इससे पहले तीन बार वाराणसी खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से विधान परिषद सदस्य रह चुके हैं। इस बार पार्टी ने एक बार फिर उनके अनुभव पर भरोसा जताया है।

केदारनाथ सिंह ने पहली बार 2004 में इस सीट से उपचुनाव में जीत हासिल की थी। इसके बाद वह 2008 और 2014 में भी लगातार चुनाव जीतकर विधान परिषद पहुंचे। इस तरह वह तीन बार वाराणसी खंड स्नातक सीट का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।

लंबे समय तक इस निर्वाचन क्षेत्र से जुड़े रहने के कारण केदारनाथ सिंह की पहचान स्नातक मतदाताओं के बीच पुराने चेहरे के रूप में रही है। भाजपा ने इस बार फिर उन्हें मैदान में उतारकर अनुभव और संगठनात्मक पकड़ को महत्व दिया है।

स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव सामान्य विधानसभा चुनाव से अलग होता है। यहां केवल निर्धारित योग्यता पूरी करने वाले और मतदाता सूची में पंजीकृत स्नातक मतदाता ही मतदान करते हैं। इसी वजह से उम्मीदवारों के लिए मतदाता सूची, व्यक्तिगत संपर्क और संगठनात्मक नेटवर्क की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।

वाराणसी शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा ने डॉ. प्रमोद मिश्रा को उम्मीदवार बनाया है। शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में पंजीकृत शिक्षक मतदाता अपने प्रतिनिधि का चुनाव करते हैं। भाजपा की ओर से डॉ. प्रमोद मिश्रा के नाम की घोषणा के बाद शिक्षक वर्ग में भी चुनावी गतिविधियां तेज होने की संभावना है।

दोनों सीटों के लिए पार्टी संगठन अलग-अलग स्तर पर मतदाता संपर्क अभियान चला सकता है। स्नातक सीट पर विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों और पंजीकृत स्नातकों के बीच संपर्क महत्वपूर्ण होगा, जबकि शिक्षक सीट पर शिक्षण संस्थानों और पंजीकृत शिक्षक मतदाताओं से सीधा संवाद प्रमुख रहेगा।

भाजपा की ओर से जारी सूची में केवल वाराणसी की दोनों सीटें ही नहीं, बल्कि प्रदेश की अन्य स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के प्रत्याशी भी शामिल हैं। इस तरह पार्टी ने विधान परिषद चुनाव को लेकर अपनी तैयारी का बड़ा हिस्सा स्पष्ट कर दिया है।

वाराणसी की दोनों सीटों को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां स्नातक और शिक्षक दोनों वर्गों का अलग-अलग मतदाता आधार है और सामान्य चुनावों की तुलना में मतदाताओं की संख्या सीमित तथा विशेष श्रेणी की होती है।

केदारनाथ सिंह की उम्मीदवारी इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि वह इस क्षेत्र से पहले तीन बार विधान परिषद पहुंच चुके हैं। उनके पिछले चुनावी अनुभव और स्थानीय संपर्क को देखते हुए पार्टी ने उन्हें फिर से मौका दिया है।

2004 के उपचुनाव में पहली जीत हासिल करने के बाद उन्होंने 2008 और फिर 2014 में लगातार सफलता हासिल की थी। लंबे समय तक इस सीट से जुड़े रहने के कारण वह वाराणसी खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की चुनावी प्रक्रिया और मतदाता वर्ग से परिचित माने जाते हैं।

वहीं डॉ. प्रमोद मिश्रा की उम्मीदवारी शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा की रणनीति का हिस्सा है। पार्टी शिक्षक वर्ग के बीच अपनी उपस्थिति मजबूत करने के उद्देश्य से प्रचार अभियान को आगे बढ़ाएगी।

प्रत्याशियों के नाम घोषित होने के बाद अब नामांकन, मतदाता संपर्क और प्रचार की अगली प्रक्रिया शुरू होगी। उम्मीदवार अपने-अपने क्षेत्रों में बैठकें, संवाद और संपर्क अभियान के जरिए मतदाताओं तक पहुंचेंगे।

विधान परिषद की स्नातक और शिक्षक सीटों के चुनाव में बड़े जनसभा अभियान की तुलना में लक्षित मतदाता संपर्क ज्यादा महत्वपूर्ण माना जाता है। उम्मीदवारों को मतदाता सूची में दर्ज लोगों से सीधे संपर्क स्थापित करना होता है।

भाजपा संगठन की ओर से भी दोनों उम्मीदवारों के लिए अलग-अलग स्तर पर कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी तय की जा सकती है। वार्ड, ब्लॉक और जिला स्तर से लेकर शिक्षण संस्थानों तक कार्यकर्ताओं को सक्रिय किया जाएगा।

वाराणसी स्नातक सीट पर केदारनाथ सिंह का पुराना चुनावी रिकॉर्ड पार्टी के लिए महत्वपूर्ण आधार रहेगा। वह पहले भी इसी क्षेत्र में व्यापक संपर्क अभियान चला चुके हैं और तीन बार चुनाव जीत चुके हैं।

शिक्षक सीट पर डॉ. प्रमोद मिश्रा को टिकट देकर भाजपा ने नए सिरे से शिक्षक मतदाताओं के बीच अपनी रणनीति स्पष्ट की है। अब उनकी प्राथमिकता शिक्षक संगठनों और शिक्षण संस्थानों से जुड़े मतदाताओं तक पहुंच बनाना होगी।

उत्तर प्रदेश विधान परिषद राज्य की द्विसदनीय विधानमंडल व्यवस्था का उच्च सदन है। परिषद में अलग-अलग माध्यमों से सदस्य चुने जाते हैं, जिनमें स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र भी शामिल हैं। उत्तर प्रदेश विधान परिषद की आधिकारिक वेबसाइट परिषद की संरचना और सदस्य संबंधी सूचनाएं उपलब्ध कराती है।

भाजपा की सूची जारी होने के बाद वाराणसी की दोनों सीटों पर मुकाबले की तस्वीर अधिक स्पष्ट होने लगी है। अन्य दलों और उम्मीदवारों की रणनीति सामने आने के साथ चुनावी समीकरण और साफ होंगे।

पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए भी उम्मीदवारों की घोषणा के बाद चुनाव प्रचार की दिशा तय हो गई है। अब संगठन का जोर मतदाता सूची के सत्यापन, संपर्क और उम्मीदवारों के समर्थन में अभियान पर रहेगा।

केदारनाथ सिंह के लिए यह चुनाव एक बार फिर पुराने निर्वाचन क्षेत्र में वापसी का अवसर है। उनकी पिछली तीन जीतें उनके राजनीतिक परिचय का अहम हिस्सा हैं।

वहीं डॉ. प्रमोद मिश्रा के लिए शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव संगठनात्मक और व्यक्तिगत संपर्क की बड़ी परीक्षा होगा। शिक्षक मतदाताओं तक पहुंच और उनकी मांगों को सामने रखना उनके प्रचार का मुख्य आधार हो सकता है।

फिलहाल भाजपा ने वाराणसी की दोनों महत्वपूर्ण विधान परिषद सीटों पर प्रत्याशियों के नाम घोषित कर चुनावी प्रक्रिया में बढ़त लेते हुए संगठन को सक्रिय कर दिया है। वाराणसी स्नातक से केदारनाथ सिंह और शिक्षक सीट से डॉ. प्रमोद मिश्रा अब पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार के रूप में चुनावी मैदान में उतरेंगे।

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