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राज्यमंत्री ने की पेंटिंग की तारीफ तो रो पड़ी छात्रा, पुरस्कार सूची में नहीं था नाम

बाराबंकी। जीआईसी के ऑडिटोरियम में सोमवार को आयोजित जिला स्तरीय चित्रकला प्रदर्शनी एवं प्रतियोगिता के दौरान एक भावुक दृश्य देखने को मिला। ‘विकसित भारत-2047’ थीम पर आयोजित इस कार्यक्रम में पुरस्कारों की घोषणा के बाद जब राज्यमंत्री सतीश चंद्र शर्मा प्रदर्शनी का अवलोकन कर रहे थे, तभी उनकी नजर प्रतिभा इंटर कॉलेज नरैनी की कक्षा 10 की छात्रा शुभि यादव की बनाई पेंटिंग पर पड़ी। चित्र देखकर मंत्री ने खुशी जाहिर की और उसकी जमकर तारीफ की। यह सुनते ही छात्रा फफक कर रो पड़ी, क्योंकि उसका नाम पुरस्कार पाने वाले प्रतिभागियों में शामिल नहीं था।
कार्यक्रम में जिले के विभिन्न विद्यालयों से आए छात्र-छात्राओं ने विकसित भारत की कल्पना को अपने चित्रों के माध्यम से प्रस्तुत किया था। प्रतियोगिता में छात्रों ने आधुनिक भारत, तकनीकी प्रगति, पर्यावरण संरक्षण, शिक्षा, ग्रामीण विकास, महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता जैसे विषयों को रंगों के जरिए उकेरा।
प्रतियोगिता के बाद निर्णायकों ने विजेता प्रतिभागियों के नाम घोषित किए। पुरस्कार वितरण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद राज्यमंत्री सतीश चंद्र शर्मा ने प्रदर्शनी में लगी पेंटिंग्स को देखा। इसी दौरान वह शुभि यादव की पेंटिंग के सामने रुके और उसकी कलात्मकता तथा विषय प्रस्तुति की तारीफ करने लगे।
मंत्री की सराहना सुनकर शुभि अपनी भावनाओं पर नियंत्रण नहीं रख सकी। वह अचानक रोने लगी। आसपास मौजूद लोगों ने जब उसकी परेशानी का कारण पूछा तो सामने आया कि वह अपनी पेंटिंग को लेकर काफी उम्मीद लगाए बैठी थी, लेकिन पुरस्कार सूची में उसका नाम नहीं आया था।
छात्रा की आंखों में आंसू देखकर वहां मौजूद शिक्षक और अन्य लोग भी भावुक हो गए। राज्यमंत्री को भी जब इस बात की जानकारी मिली तो उन्होंने छात्रा को समझाया और उसके प्रयास की सराहना की।
शुभि ने अपनी पेंटिंग में विकसित भारत-2047 की अपनी कल्पना को चित्रों के जरिए दिखाने की कोशिश की थी। उसने देश के विकास, आधुनिक तकनीक, शिक्षा और अन्य विषयों को एक साथ जोड़कर प्रस्तुति तैयार की थी। उसकी कलाकृति को देखकर मंत्री ने इसे प्रभावी और आकर्षक बताया।
छात्रा के लिए मंत्री की प्रशंसा गर्व का विषय थी, लेकिन पुरस्कार न मिलने की निराशा भी उसके चेहरे पर साफ दिखाई दी। यही वजह रही कि तारीफ सुनते ही उसकी भावनाएं आंसुओं के रूप में बाहर आ गईं।
इस घटना ने प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले विद्यार्थियों की भावनाओं और मेहनत को भी सामने रखा। कई छात्र लंबे समय तक तैयारी करके ऐसी प्रतियोगिताओं में भाग लेते हैं और उन्हें उम्मीद रहती है कि उनकी मेहनत को पहचान मिलेगी।
शिक्षकों का कहना है कि प्रतियोगिता में पुरस्कार मिलना महत्वपूर्ण जरूर है, लेकिन उससे भी अधिक जरूरी छात्रों की प्रतिभा और प्रयास को पहचानना है। हर प्रतियोगिता में सीमित संख्या में पुरस्कार दिए जा सकते हैं, लेकिन बाकी प्रतिभागियों की मेहनत भी कम नहीं होती।
‘विकसित भारत-2047’ विषय पर आयोजित प्रदर्शनी का उद्देश्य छात्रों को देश के भविष्य को लेकर अपनी सोच और कल्पना व्यक्त करने का अवसर देना था। बच्चों ने अलग-अलग दृष्टिकोण से यह दिखाने की कोशिश की कि वे वर्ष 2047 में भारत को किस रूप में देखना चाहते हैं।
कुछ चित्रों में स्मार्ट शहरों की कल्पना दिखाई गई, तो कुछ में स्वच्छता और हरित ऊर्जा पर जोर दिया गया। कई विद्यार्थियों ने शिक्षा, विज्ञान और तकनीक को देश के विकास का आधार बताया।
शुभि की पेंटिंग भी इसी श्रेणी में थी और उसने अपनी सोच को रंगों के जरिए प्रस्तुत किया था। उसकी कलाकृति मंत्री का ध्यान खींचने में सफल रही, जो अपने आप में छात्रा के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा सकती है।
राज्यमंत्री ने छात्रा का हौसला बढ़ाया और उसे भविष्य में भी इसी तरह मेहनत करते रहने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि प्रतिभा को केवल पुरस्कार से नहीं आंका जाना चाहिए और लगातार प्रयास करने वाले विद्यार्थी आगे जाकर बेहतर उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं।
कार्यक्रम में उपस्थित अन्य छात्रों और शिक्षकों ने भी शुभि को समझाया और उसकी पेंटिंग की प्रशंसा की। छात्रा को यह भरोसा दिलाया गया कि उसकी मेहनत बेकार नहीं गई है और उसकी कला ने लोगों का ध्यान खींचा है।
यह घटना पूरे कार्यक्रम की सबसे भावुक क्षणों में से एक बन गई। पुरस्कार वितरण के बाद जहां विजेता छात्र खुशी मना रहे थे, वहीं शुभि की भावनाएं सभी का ध्यान अपनी ओर खींच रही थीं।
प्रतियोगिता का उद्देश्य केवल विजेता चुनना नहीं बल्कि विद्यार्थियों में रचनात्मकता, कल्पनाशीलता और देश के भविष्य के प्रति सोच विकसित करना भी था।
इस अवसर पर अधिकारियों और शिक्षकों ने कहा कि इस तरह के आयोजन बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ाते हैं और उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच प्रदान करते हैं।
फिलहाल शुभि यादव की पेंटिंग और उसके भावुक होने की चर्चा पूरे कार्यक्रम में रही। पुरस्कार न मिलने के बावजूद उसकी कला ने राज्यमंत्री का ध्यान खींचा और सार्वजनिक रूप से प्रशंसा पाई।





