उत्तर प्रदेश

माता-पिता नहीं रहे, राशन के लिए भटक रहीं तीन बहनें; अफसर की आंखें हुईं नम

Kavita2
6 Oct 2026 3:01 PM IST
माता-पिता नहीं रहे, राशन के लिए भटक रहीं तीन बहनें; अफसर की आंखें हुईं नम
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हाथरस। हाथरस में गरीबी और बेबसी की एक ऐसी तस्वीर सामने आई, जिसने विकास भवन में मौजूद अधिकारियों को भी भावुक कर दिया। माता-पिता को खो चुकी तीन बहनों के पास न खाने के लिए पर्याप्त अनाज है और न इलाज के लिए पैसे। दो वक्त की रोटी का इंतजाम करने के लिए राशन कार्ड बनवाने पहुंचीं इन बहनों की आपबीती सुनकर जिला विकास अधिकारी पीएन यादव की आंखें भी नम हो गईं। उन्होंने तुरंत जिला प्रोवेशन अधिकारी सीमा मौर्य को फोन कर हर संभव सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

मामला हाथरस नगर के सीयल मोहल्ला का है। यहां रहने वाली एक लड़की अपनी छोटी बहन के साथ विकास भवन पहुंची और जिला विकास अधिकारी पीएन यादव के सामने हाथ जोड़कर अपनी समस्या बताई। उसने कहा कि उनके पिता करीब तीन साल पहले दुनिया छोड़ गए थे और एक महीने पहले उनकी मां का भी निधन हो गया। परिवार में अब तीन बहनें ही बची हैं और घर चलाने वाला कोई नहीं है।

लड़की ने अधिकारी से कहा कि घर में खाने तक की व्यवस्था नहीं है। राशन खत्म हो चुका है और रोजाना दो वक्त का भोजन जुटाना भी मुश्किल हो रहा है। दवा की जरूरत पड़े तो उसके लिए भी पैसे नहीं हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर है कि छोटी-छोटी जरूरतें पूरी करना भी चुनौती बन गया है।

उसने बताया कि माता-पिता के निधन के बाद परिवार पूरी तरह बेसहारा हो गया है। तीनों बहनों के सामने सबसे बड़ी चिंता भोजन और रोजमर्रा के खर्च की है। राशन कार्ड नहीं होने के कारण उन्हें सरकारी खाद्यान्न योजना का लाभ भी नहीं मिल पा रहा है।

इसी उम्मीद में दोनों बहनें विकास भवन पहुंचीं कि शायद अधिकारी उनकी बात सुनें और राशन की व्यवस्था हो सके। उनकी हालत और भावुक अपील सुनकर जिला विकास अधिकारी पीएन यादव भी गंभीर हो गए।

उन्होंने तत्काल जिला प्रोवेशन अधिकारी सीमा मौर्य से फोन पर संपर्क किया और पूरे मामले की जानकारी दी। अधिकारी ने निर्देश दिया कि परिवार की स्थिति की जांच कर जल्द से जल्द सरकारी योजनाओं से जोड़ा जाए और हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाए।

अधिकारियों ने इस बात पर भी जोर दिया कि तीनों बहनों को केवल राशन कार्ड तक सीमित मदद न दी जाए, बल्कि यह भी देखा जाए कि वे किन-किन सरकारी योजनाओं की पात्र हैं। यदि उन्हें निराश्रित, महिला कल्याण, शिक्षा, स्वास्थ्य या अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ मिल सकता है तो उसके लिए भी आवश्यक प्रक्रिया पूरी कराई जाए।

माता-पिता के निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारी अचानक बेटियों पर आ जाने से उनकी स्थिति बेहद कठिन हो गई है। खासकर छोटी बहनों की पढ़ाई, भोजन और स्वास्थ्य से जुड़ी जरूरतों को पूरा करना बड़ी चुनौती बन गया है।

स्थानीय स्तर पर भी इस परिवार की स्थिति को लेकर चिंता जताई जा रही है। लोगों का कहना है कि सरकार की कई योजनाएं गरीब और बेसहारा परिवारों के लिए हैं, लेकिन जरूरतमंदों तक उनकी जानकारी और लाभ समय पर नहीं पहुंच पाता।

ऐसे मामलों में प्रशासन की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। यदि पात्र परिवारों की पहचान कर उन्हें राशन कार्ड, पेंशन, छात्रवृत्ति और अन्य सहायता योजनाओं से जोड़ा जाए तो उनकी मुश्किलें काफी हद तक कम हो सकती हैं।

इस परिवार की सबसे बड़ी जरूरत फिलहाल नियमित भोजन की है। इसलिए अधिकारियों ने राशन कार्ड बनाने की प्रक्रिया को प्राथमिकता देने की बात कही है। राशन कार्ड बन जाने के बाद तीनों बहनों को सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत सस्ता या मुफ्त खाद्यान्न मिलने का रास्ता खुल सकता है।

इसके अलावा परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए अन्य विभागों को भी जोड़ा जा सकता है। जिला प्रोवेशन विभाग महिला और बाल कल्याण से जुड़ी योजनाओं के तहत सहायता की संभावनाएं तलाश सकता है।

जिला विकास अधिकारी ने मामले को संवेदनशीलता से लेते हुए अधीनस्थ अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने को कहा कि बहनों को कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। संबंधित विभाग उनकी पात्रता की जांच कर आवश्यक दस्तावेज तैयार कराने में मदद करे।

अधिकारियों की इस पहल से पीड़ित बहनों को राहत की उम्मीद जगी है। उन्होंने अधिकारियों से केवल इतना कहा कि उन्हें दो वक्त का खाना और जरूरी मदद मिल जाए, ताकि वे सम्मान के साथ जीवन चला सकें।

यह मामला समाज और प्रशासन दोनों के सामने कई सवाल खड़े करता है। माता-पिता की मौत के बाद यदि किसी परिवार में कमाने वाला सदस्य न बचे तो ऐसी बेटियों के सामने आर्थिक संकट के साथ सामाजिक असुरक्षा भी खड़ी हो जाती है।

ऐसे परिवारों को समय पर सरकारी योजनाओं से जोड़ना बेहद जरूरी है। राशन, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी जरूरतें पूरी होने पर ही वे अपने भविष्य को लेकर आगे बढ़ सकती हैं।

विकास भवन में हुई इस मुलाकात ने अधिकारियों को भी झकझोर दिया। बहनों की आपबीती सुनने के बाद जिला विकास अधिकारी ने तुरंत कार्रवाई का निर्देश देकर संकेत दिया कि मामले को सामान्य आवेदन की तरह नहीं देखा जाएगा।

फिलहाल प्रशासन ने परिवार की सहायता की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही है। अब उम्मीद की जा रही है कि तीनों बहनों को जल्द राशन कार्ड और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ मिलेगा।

गरीबी और माता-पिता के निधन से जूझ रही इन बेटियों की कहानी ने एक बार फिर यह दिखाया है कि सरकारी सहायता उन लोगों तक समय पर पहुंचना कितनी जरूरी है, जिनके पास वास्तव में कोई दूसरा सहारा नहीं है।

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