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सीएचसी गोधना में बड़ी लापरवाही, छह डॉक्टर समेत 20 कर्मचारी मिले अनुपस्थित

मैनपुरी। सीएचसी गोधना में कर्मचारियों की ड्यूटी को लेकर लापरवाही का मामला सामने आया है। सोमवार को सीएमओ डॉ. आरसी गुप्ता के औचक निरीक्षण के दौरान छह डॉक्टर समेत कुल 20 कर्मचारी अनुपस्थित मिले। बड़ी संख्या में कर्मचारियों के ड्यूटी से गायब मिलने पर सीएमओ ने कड़ी नाराजगी जताई और सभी अनुपस्थित कर्मचारियों का एक दिन का वेतन काटने के निर्देश दिए।
जानकारी के मुताबिक, सीएमओ डॉ. आरसी गुप्ता सोमवार को अचानक सीएचसी गोधना पहुंचे। निरीक्षण के दौरान उन्होंने उपस्थिति रजिस्टर, ओपीडी व्यवस्था, चिकित्सकों की मौजूदगी और अन्य स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति का जायजा लिया। जांच के दौरान कई डॉक्टर और कर्मचारी ड्यूटी पर मौजूद नहीं मिले।
सीएमओ के निरीक्षण में छह डॉक्टरों समेत 20 कर्मचारियों की गैरमौजूदगी सामने आने के बाद स्वास्थ्य केंद्र में हड़कंप मच गया। सीएमओ ने इस स्थिति को गंभीर लापरवाही माना और अनुपस्थित कर्मचारियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए।
उन्होंने साफ कहा कि सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में ड्यूटी के प्रति इस तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मरीजों को समय पर इलाज और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना कर्मचारियों की जिम्मेदारी है। यदि डॉक्टर और कर्मचारी ही ड्यूटी से अनुपस्थित रहेंगे तो आम लोगों को इलाज के लिए परेशानी उठानी पड़ेगी।
निरीक्षण के दौरान सीएचसी के चिकित्साधीक्षक डॉ. प्रवीण कुमार से भी कर्मचारियों की अनुपस्थिति के बारे में जवाब मांगा गया। बताया जा रहा है कि कई डॉक्टर और स्टाफ के ड्यूटी से गायब मिलने पर सीएमओ ने उनसे कड़ी नाराजगी जताई।
संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर सीएमओ ने विभागीय कार्रवाई की चेतावनी भी दी। उन्होंने चिकित्साधीक्षक को व्यवस्था सुधारने और सभी कर्मचारियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से सरकारी अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में लगातार निगरानी की जा रही है। इसके बावजूद कई स्थानों पर कर्मचारियों की मनमानी और ड्यूटी में लापरवाही की शिकायतें सामने आती रहती हैं।
सीएचसी गोधना में भी कर्मचारियों की उपस्थिति को लेकर पहले से सवाल उठते रहे हैं। सीएमओ की ओर से व्यवस्था सुधारने के लिए प्रयास किए गए, लेकिन सोमवार के निरीक्षण ने एक बार फिर लापरवाही की स्थिति सामने ला दी।
छह डॉक्टरों का एक साथ अनुपस्थित मिलना विशेष रूप से गंभीर माना जा रहा है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ग्रामीण और आसपास के क्षेत्रों के लोगों के लिए इलाज का महत्वपूर्ण केंद्र होता है। यहां डॉक्टरों की गैरमौजूदगी से मरीजों को निजी अस्पतालों या दूर स्थित दूसरे सरकारी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ सकता है।
सीएमओ ने निर्देश दिया कि अनुपस्थित पाए गए सभी कर्मचारियों का एक दिन का वेतन काटा जाए। इसके साथ ही उनकी अनुपस्थिति का कारण भी पूछा जाएगा। यदि संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं मिलता है तो आगे विभागीय कार्रवाई की जा सकती है।
निरीक्षण के दौरान सीएमओ ने अस्पताल की अन्य व्यवस्थाओं का भी जायजा लिया। उन्होंने मरीजों को मिलने वाली दवाओं, साफ-सफाई, ओपीडी और अन्य सेवाओं की स्थिति की जानकारी ली।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि मरीजों को किसी भी स्थिति में इलाज के लिए अनावश्यक रूप से परेशान न किया जाए। डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी निर्धारित समय पर अस्पताल पहुंचे और अपनी जिम्मेदारियों का ठीक तरीके से निर्वहन करें।
सीएमओ ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही का सीधा असर आम जनता पर पड़ता है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी स्वास्थ्य केंद्र ही लोगों के इलाज का पहला सहारा होते हैं।
ऐसे में यदि डॉक्टर और कर्मचारी ड्यूटी से गायब रहते हैं तो पूरे स्वास्थ्य तंत्र की विश्वसनीयता प्रभावित होती है। उन्होंने चेतावनी दी कि भविष्य में भी औचक निरीक्षण जारी रहेंगे और लापरवाही मिलने पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी।
चिकित्साधीक्षक को भी निर्देश दिया गया है कि वह कर्मचारियों की उपस्थिति की नियमित निगरानी करें। बिना उचित कारण छुट्टी या अनुपस्थिति की स्थिति में संबंधित कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
सीएमओ के निरीक्षण के बाद सीएचसी गोधना के कर्मचारियों में भी हलचल है। माना जा रहा है कि स्वास्थ्य विभाग आने वाले दिनों में यहां की व्यवस्था पर और कड़ी नजर रखेगा।
ग्रामीणों ने भी उम्मीद जताई है कि कार्रवाई के बाद अस्पताल की व्यवस्था में सुधार होगा और डॉक्टर नियमित रूप से मौजूद रहेंगे। मरीजों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में समय पर चिकित्सक मिलना सबसे जरूरी है।
फिलहाल सीएमओ ने एक दिन का वेतन काटने के निर्देश देकर स्पष्ट संदेश दिया है कि ड्यूटी में लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
सीएचसी गोधना में छह डॉक्टर समेत 20 कर्मचारियों की अनुपस्थिति ने स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं। अब देखना होगा कि विभागीय कार्रवाई के बाद कर्मचारियों की उपस्थिति और मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं में कितना सुधार आता है।





