उत्तर प्रदेश

ग्राहक से जबरन कैरी बैग का पैसा नहीं वसूल सकते स्टोर

Ratna Netam
15 Aug 2026 3:18 PM IST
ग्राहक से जबरन कैरी बैग का पैसा नहीं वसूल सकते स्टोर
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आगरा। मॉल या मार्ट में खरीदारी के बाद बिलिंग के समय ग्राहकों से कैरी बैग के नाम पर अतिरिक्त रकम लेना आम बात हो गई है। कई दुकानों पर कर्मचारी पांच से दस रुपये या इससे अधिक कीमत वसूलते हैं। आगरा के जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग प्रथम ने पांच मामलों में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि किसी ग्राहक को कैरी बैग खरीदने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। दबाव बनाकर उससे कैरी बैग का शुल्क वसूलना अनुचित व्यापार व्यवहार माना जा सकता है।
आयोग ने संबंधित मार्ट को ग्राहकों से कैरी बैग के लिए ली गई रकम ब्याज सहित लौटाने का आदेश दिया है। इसके साथ ही मानसिक उत्पीड़न और मुकदमे पर हुए खर्च के लिए प्रत्येक शिकायतकर्ता को 15 हजार रुपये अलग से देने का निर्देश भी दिया गया है। इस फैसले को उपभोक्ता अधिकारों की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मामला आगरा के कमला नगर स्थित एक मार्ट से जुड़ा है। कमला नगर निवासी दीपक त्यागी और रोहित अग्रवाल, बल्केश्वर निवासी शीतल बंसल, अयोध्या कुंज शाहगंज निवासी सौरभ अग्रवाल तथा गांधी नगर निवासी आशीष ने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग प्रथम में अलग-अलग शिकायतें दाखिल की थीं।
शिकायतकर्ताओं के अनुसार वे दिसंबर 2023 और जनवरी 2024 में अलग-अलग तारीखों पर अपने परिवार के सदस्यों के साथ घरेलू सामान खरीदने के लिए संबंधित मार्ट गए थे। सामान चुनने के बाद जब वे भुगतान करने के लिए बिलिंग काउंटर पर पहुंचे तो वहां तैनात कर्मचारियों ने उनके सामने कैरी बैग रख दिए। आरोप है कि कर्मचारियों ने कहा कि सामान ले जाने के लिए यह कैरी बैग खरीदना जरूरी है।
ग्राहकों ने कैरी बैग लेने से मना किया, लेकिन कर्मचारियों के कथित दबाव के कारण उन्हें छह रुपये देकर बैग खरीदना पड़ा। ग्राहकों का कहना था कि उन्हें पहले से यह जानकारी नहीं दी गई थी कि खरीदे गए सामान को ले जाने के लिए कैरी बैग का अलग से भुगतान करना होगा। बिलिंग के अंतिम चरण में ऐसी शर्त रखे जाने के कारण उनके पास भुगतान करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा।
शिकायतकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि कैरी बैग के लिए वसूली गई छह रुपये की रकम को बिल में स्पष्ट रूप से नहीं दिखाया गया। बैग पर संबंधित मार्ट का नाम और विज्ञापन भी छपा हुआ था। ग्राहकों का तर्क था कि किसी प्रतिष्ठान के प्रचार वाला बैग खरीदने के लिए उन्हें मजबूर करना गलत है। मार्ट अपने ब्रांड का प्रचार करने के साथ ग्राहक से उसकी कीमत भी वसूल रहा था।
पांचों ग्राहकों ने इस मामले को सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार बताते हुए उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई। मामलों की सुनवाई आयोग के अध्यक्ष सर्वेश कुमार और सदस्य राजीव कुमार ने की। दोनों पक्षों को सुनने और उपलब्ध दस्तावेजों का परीक्षण करने के बाद आयोग ने ग्राहकों के पक्ष में फैसला सुनाया।
आयोग ने गुरुग्राम स्थित मार्ट के निदेशक और आगरा के कमला नगर स्टोर के प्रबंधक को पांचों ग्राहकों से कैरी बैग के लिए ली गई रकम छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ वापस करने का आदेश दिया। इसके अतिरिक्त प्रत्येक ग्राहक को मानसिक उत्पीड़न और वाद व्यय के रूप में 15 हजार रुपये देने का निर्देश दिया गया।
फैसले के बाद कई ग्राहकों ने संतोष जताते हुए कहा कि मॉल और बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में कैरी बैग के नाम पर मनमाने तरीके से रकम वसूलने पर रोक लगनी चाहिए। उपभोक्ताओं को बिलिंग से पहले सभी अतिरिक्त शुल्कों की स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए। यदि किसी ग्राहक से जबरन या बिना सूचना के शुल्क लिया जाता है तो वह बिल और अन्य प्रमाण सुरक्षित रखकर संबंधित उपभोक्ता आयोग में शिकायत कर सकता है।
आगरा उपभोक्ता आयोग का यह निर्णय ग्राहकों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने वाला है। यह भी स्पष्ट करता है कि प्रतिष्ठान खरीदारी पूरी होने के बाद ग्राहक पर अचानक अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं डाल सकते और प्रत्येक शुल्क को पारदर्शी तरीके से बिल में दिखाना जरूरी है।
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