उत्तर प्रदेश

वाराणसी में सपा की बड़ी बढ़त, आशुतोष सिन्हा की जीत की उम्मीद के बीच मतगणना पर विवाद

Ratna Netam
29 Oct 2026 2:37 PM IST
वाराणसी में सपा की बड़ी बढ़त, आशुतोष सिन्हा की जीत की उम्मीद के बीच मतगणना पर विवाद
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वाराणसी : 29 अक्टूबर 2026। उत्तर प्रदेश विधान परिषद चुनाव की मतगणना के बीच वाराणसी खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार आशुतोष सिन्हा की बढ़त ने राजनीतिक हलचल तेज कर दी है। भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार केदारनाथ सिंह के मुकाबले आशुतोष सिन्हा लगातार आगे चल रहे हैं। इस बीच समाजवादी पार्टी के नेता मनोज सिंह काका ने प्रदेश के शिक्षकों, स्नातकों और शिक्षित युवाओं के प्रति आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि इन वर्गों ने समाजवादी पार्टी पर भरोसा जताया है। हालांकि, उन्होंने वाराणसी में मतगणना प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल भी उठाए और निर्धारित नियमों का पालन नहीं किए जाने का आरोप लगाया।गुरुवार को समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में मनोज सिंह काका ने कहा कि समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की ओर से उत्तर प्रदेश के शिक्षकों और शिक्षित युवाओं का आभार व्यक्त किया जाता है, जिन्होंने विधान परिषद चुनाव में पार्टी को मजबूत समर्थन दिया है। उन्होंने मतगणना के दौरान पारदर्शिता बनाए रखने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
आशुतोष सिन्हा ने बनाई 16 हजार से अधिक वोटों की बढ़त
वाराणसी खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की मतगणना के दौरान समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार आशुतोष सिन्हा ने शुरुआती दौर से ही बढ़त बनाए रखी। गुरुवार सुबह सामने आए नौवें चक्र के आंकड़ों के अनुसार, आशुतोष सिन्हा को प्रथम वरीयता के 50,462 मत मिले, जबकि भाजपा उम्मीदवार केदारनाथ सिंह को 33,478 वोट प्राप्त हुए।इस प्रकार समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार ने 16,984 मतों की बढ़त बना ली। इससे पहले आठवें चक्र में भी आशुतोष सिन्हा 16 हजार से अधिक वोटों से आगे चल रहे थे।हालांकि, विधान परिषद चुनाव में वरीयता आधारित मतदान व्यवस्था होने के कारण प्रथम वरीयता के मतों की गणना के बाद भी अंतिम परिणाम घोषित होने में समय लग सकता है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, गुरुवार को द्वितीय वरीयता के मतों की गिनती भी शुरू हो गई थी।
मनोज सिंह काका ने मतगणना की प्रक्रिया पर उठाए सवाल
समाजवादी पार्टी के नेता मनोज सिंह काका ने आरोप लगाया कि वाराणसी में मतगणना के लिए निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) का सही तरीके से पालन नहीं किया जा रहा है।उन्होंने कहा कि मतगणना के प्रत्येक चक्र के बाद प्राप्त मतों की जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए। इससे उम्मीदवारों, उनके एजेंटों और राजनीतिक दलों को मतगणना की प्रगति स्पष्ट रूप से पता चल सकेगी।मनोज सिंह काका ने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत निर्धारित मतगणना प्रक्रिया का उल्लेख करते हुए कहा कि चुनावी व्यवस्था में पारदर्शिता और नियमों का पालन बेहद जरूरी है।उन्होंने यह भी कहा कि मतगणना के दौरान कई तरह के आरोप सामने आए हैं। हालांकि, उनके द्वारा लगाए गए एसओपी उल्लंघन के आरोपों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध रिपोर्टों में नहीं हुई है।
मतगणना रोकने पर हुआ विवाद, भाजपा कार्यकर्ताओं ने दिया धरना
वाराणसी में बुधवार को मतगणना के दौरान उस समय विवाद खड़ा हो गया, जब भाजपा उम्मीदवार केदारनाथ सिंह और उनके समर्थकों ने गणना प्रक्रिया पर आपत्ति जताई।भाजपा की ओर से आरोप लगाया गया कि मतगणना एजेंटों के साथ उचित व्यवहार नहीं किया जा रहा है। पार्टी नेताओं ने चुनाव प्रेक्षक से संबंधित शिकायतें भी उठाईं।विवाद बढ़ने के बाद बुधवार शाम करीब साढ़े चार बजे मतगणना रोक दी गई। इस दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं ने पहड़िया स्थित मतगणना केंद्र के बाहर धरना-प्रदर्शन किया। कुछ कार्यकर्ताओं और पुलिसकर्मियों के बीच नोकझोंक की खबर भी सामने आई।बाद में निर्वाचन आयोग के निर्देश और प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद रात करीब नौ बजे मतगणना दोबारा शुरू की गई। भाजपा की आपत्तियों के बाद कुछ मतों का पुनः सत्यापन किए जाने की भी जानकारी सामने आई।
अखिलेश यादव ने कार्यकर्ताओं से की सतर्क रहने की अपील
वाराणसी में मतगणना को लेकर उत्पन्न विवाद के बीच समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पार्टी कार्यकर्ताओं से मतगणना केंद्र पर डटे रहने की अपील की।उन्होंने कार्यकर्ताओं को संदेश दिया कि अंतिम परिणाम और जीत का प्रमाणपत्र प्राप्त होने तक सतर्कता बनाए रखें। अखिलेश यादव ने वाराणसी के स्थानीय कार्यकर्ताओं से मतगणना केंद्र पर मौजूद साथियों के लिए भोजन, पानी और अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था करने को भी कहा।सपा अध्यक्ष ने सोशल मीडिया पर मतगणना में देरी और संभावित गड़बड़ी को लेकर भी आशंका जताई। हालांकि, ये आरोप समाजवादी पार्टी की ओर से लगाए गए हैं और इन्हें किसी प्रमाणित प्रशासनिक निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
वाराणसी शिक्षक सीट पर भी समाजवादी पार्टी को मिली सफलता
वाराणसी में समाजवादी पार्टी के लिए एक और महत्वपूर्ण घटनाक्रम शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के परिणाम के रूप में सामने आया है। इस सीट पर पार्टी उम्मीदवार लाल बिहारी यादव ने जीत दर्ज की हैवाराणसी खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में आशुतोष सिन्हा की बढ़त के साथ शिक्षक सीट पर मिली सफलता ने पार्टी कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ाया है।समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने विधान परिषद चुनाव के परिणामों को लेकर खुशी व्यक्त करते हुए पार्टी प्रत्याशियों और समर्थकों को बधाई दी। उन्होंने दावा किया कि चुनाव में मिला समर्थन वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक बदलाव का संकेत है। यह उनका राजनीतिक आकलन है, न कि आगामी चुनाव परिणाम का कोई निश्चित संकेत।
2027 विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक महत्व
उत्तर प्रदेश विधान परिषद की शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की कुल 11 सीटों पर चुनावी मुकाबला हुआ है। इनमें पांच स्नातक और छह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं।इन चुनावों में मुख्य मुकाबला भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच देखने को मिला है। शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के मतदाता सामान्य विधानसभा चुनाव के मतदाताओं से अलग पात्रता के आधार पर चुने जाते हैं। ऐसे में इन परिणामों को सीधे पूरे प्रदेश के मतदाताओं की राजनीतिक राय का प्रतिनिधित्व करने वाला नहीं माना जा सकता।इसके बावजूद राजनीतिक दल चुनावी परिणामों को संगठनात्मक समर्थन और कार्यकर्ताओं के उत्साह से जोड़कर देख रहे हैं।
अंतिम परिणाम और आधिकारिक घोषणा पर टिकी निगाहें
वाराणसी खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की मतगणना लंबे समय तक जारी रहने के कारण राजनीतिक दलों और समर्थकों की निगाहें अंतिम परिणाम पर टिकी हुई हैं।समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार आशुतोष सिन्हा ने शुरुआती दौर से मजबूत बढ़त बनाई है, लेकिन समाचार लिखे जाने तक उपलब्ध रिपोर्टों में अंतिम आधिकारिक परिणाम की पुष्टि नहीं हुई थी।वहीं, मनोज सिंह काका द्वारा मतगणना नियमों के उल्लंघन को लेकर उठाए गए सवालों ने निर्वाचन प्रक्रिया की पारदर्शिता को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।अब अंतिम परिणाम के साथ यह भी महत्वपूर्ण होगा कि निर्वाचन अधिकारी विभिन्न राजनीतिक दलों की शिकायतों और आपत्तियों का किस तरह निस्तारण करते हैं।
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