उत्तर प्रदेश

यूपी में 2000 पुलिसवालों का होगा तबादला, IPS से इंस्पेक्टर तक शामिल

Rajeshwari Nishad
29 Oct 2026 2:30 PM IST
यूपी में 2000 पुलिसवालों का होगा तबादला, IPS से इंस्पेक्टर तक शामिल
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव 2027 से पहले पुलिस विभाग में बड़े प्रशासनिक फेरबदल की तैयारी शुरू हो गई है। भारत निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के बाद पुलिस मुख्यालय ने एक ही जिले में लंबे समय से तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों का रिकॉर्ड जुटाना शुरू कर दिया है। इस प्रक्रिया के तहत 2000 से अधिक पुलिसकर्मियों और 20 से ज्यादा आईपीएस अधिकारियों के तबादले होने की संभावना जताई जा रही है। सिपाही से लेकर अपर पुलिस अधीक्षक स्तर तक के कर्मचारियों और अधिकारियों की तैनाती की समीक्षा की जा रही है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि चुनाव से जुड़े अधिकारियों की तैनाती निष्पक्षता और पारदर्शिता के मानकों के अनुरूप होनी चाहिए।
तीन साल से एक ही जिले में तैनात पुलिसकर्मियों का होगा तबादला
निर्वाचन आयोग ने वर्ष 2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए अधिकारियों की स्थानांतरण नीति जारी की है। इसके तहत चुनाव संबंधी कार्यों से सीधे जुड़े ऐसे अधिकारियों को दूसरे जिले में भेजा जाएगा, जिन्होंने निर्धारित अवधि में एक ही जिले में तीन वर्ष की सेवा पूरी कर ली है।आयोग ने इस नियम के लिए 31 मई 2027 की कटऑफ तारीख निर्धारित की है। यानी पिछले चार वर्षों की अवधि में इस तारीख तक किसी जिले में तीन वर्ष की सेवा पूरी करने वाले संबंधित अधिकारी स्थानांतरण के दायरे में आएंगे।इस व्यवस्था का उद्देश्य चुनाव के दौरान प्रशासनिक निष्पक्षता बनाए रखना और स्थानीय स्तर पर लंबे समय से तैनात अधिकारियों के संभावित प्रभाव को कम करना है।
पुलिस मुख्यालय ने सभी जिलों से मांगी रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश पुलिस मुख्यालय की स्थापना शाखा ने सभी पुलिस कमिश्नरेट और जिलों से कर्मचारियों की तैनाती का विवरण मांगा है।इसमें पुलिसकर्मियों के वर्तमान जिले, तैनाती की अवधि, पूर्व पदस्थापना और अन्य संबंधित जानकारियों का रिकॉर्ड जुटाया जा रहा है।इन दस्तावेजों के आधार पर ऐसे अधिकारियों और कर्मचारियों की पहचान की जाएगी, जो निर्वाचन आयोग के निर्धारित मानकों के अंतर्गत आते हैं।सूची तैयार होने के बाद संबंधित स्तर पर तबादलों की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकती है। इसके लिए स्क्रीनिंग कमेटी के गठन की भी संभावना जताई जा रही है।हालांकि, अभी 2000 से अधिक पुलिसकर्मियों के तबादलों का आंकड़ा संभावित है। अंतिम संख्या सभी जिलों से जानकारी मिलने और रिकॉर्ड की जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
20 से ज्यादा IPS अफसर भी आ सकते हैं दायरे में
इस बार तबादलों की प्रक्रिया केवल निचले स्तर के पुलिसकर्मियों तक सीमित नहीं रहने वाली है।रिपोर्टों के अनुसार, 20 से अधिक आईपीएस अधिकारी भी निर्धारित मानकों के अंतर्गत आ सकते हैं। इनमें लंबे समय से एक ही जिले में तैनात वरिष्ठ अधिकारियों की स्थिति की समीक्षा की जाएगी।इसके अलावा पुलिस निरीक्षक, उपनिरीक्षक और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों पर भी निर्वाचन आयोग की स्थानांतरण नीति लागू होगी।
आयोग की व्यवस्था के अनुसार, उपनिरीक्षक और उससे ऊपर के उन अधिकारियों का स्थानांतरण जरूरी होगा, जो चुनाव संबंधी जिम्मेदारियों से जुड़े हैं और निर्धारित सेवा अवधि या गृह जिले संबंधी नियमों के दायरे में आते हैं।
गृह जिले में तैनात अधिकारियों को भी हटाया जाएगा
निर्वाचन आयोग ने यह भी निर्देश दिया है कि चुनावी जिम्मेदारियों से जुड़े अधिकारी अपने गृह जिले में तैनात नहीं रहने चाहिए।आयोग के अनुसार, निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए अधिकारियों की तैनाती ऐसी होनी चाहिए, जिससे उनके स्थानीय संबंधों या अन्य संभावित प्रभावों को लेकर सवाल न उठें।इसके अलावा ऐसे अधिकारी भी स्थानांतरण नीति के दायरे में आ सकते हैं, जो पिछले विधानसभा चुनाव या उसके बाद हुए उपचुनाव के दौरान संबंधित जिले अथवा विधानसभा क्षेत्र में चुनावी
जिम्मेदारियों
पर तैनात थे।इन निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी राज्य सरकार और संबंधित विभागों को सौंपी गई है।
राजनीतिक पक्षपात की शिकायतों पर भी नजर
निर्वाचन आयोग ने प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिसकर्मियों की निष्पक्ष भूमिका पर विशेष जोर दिया है।यदि किसी अधिकारी के खिलाफ किसी राजनीतिक दल के पक्ष में काम करने या पक्षपात संबंधी शिकायतें सामने आती हैं, तो संबंधित नियमों के तहत उनके मामलों की समीक्षा की जा सकती है।चुनाव के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने और सभी राजनीतिक दलों को समान अवसर देने में पुलिस की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।ऐसे में आयोग चाहता है कि चुनाव ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों की निष्पक्षता को लेकर किसी तरह का संदेह उत्पन्न न हो।
30 नवंबर तक भेजनी होगी कार्रवाई की रिपोर्ट
भारत निर्वाचन आयोग ने उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को स्थानांतरण एवं तैनाती संबंधी निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने को कहा है।इसके साथ ही संबंधित कार्रवाई की समेकित रिपोर्ट 30 नवंबर 2026 तक निर्वाचन आयोग को भेजने का निर्देश दिया गया है।उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने बताया कि आयोग के दिशा-निर्देश आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों को ध्यान में रखकर जारी किए गए हैं।उन्होंने कहा कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए इन निर्देशों का कड़ाई से पालन किया जाना आवश्यक है।
इन विभागों में भी होंगे तबादले
पुलिस विभाग के अतिरिक्त निर्वाचन आयोग की स्थानांतरण नीति का असर प्रशासनिक, आबकारी और परिवहन विभाग के अधिकारियों पर भी पड़ेगा।जिला निर्वाचन अधिकारी, रिटर्निंग ऑफिसर, सहायक रिटर्निंग ऑफिसर, अपर जिलाधिकारी, उपजिलाधिकारी, तहसीलदार और खंड विकास अधिकारी सहित चुनाव कार्यों से जुड़े विभिन्न पदों को इस व्यवस्था में शामिल किया गया है।इसके अलावा मंडलायुक्त, नगर आयुक्त और विकास प्राधिकरणों में कार्यरत संबंधित अधिकारियों की तैनाती की भी समीक्षा की जाएगी।परिवहन विभाग में आरटीओ और एआरटीओ सहित चुनावी जिम्मेदारियों से जुड़े अधिकारियों पर भी नियम लागू होंगे।
कुछ श्रेणियों को मिलेगी नियमों से छूट
निर्वाचन आयोग ने स्थानांतरण संबंधी दिशा-निर्देशों में कुछ विशेष परिस्थितियों के लिए छूट का प्रावधान भी रखा है।राज्य मुख्यालय में कार्यरत कुछ कर्मचारियों, चुनाव कार्यों से सीधे संबंधित नहीं होने वाले तकनीकी कर्मचारियों और निर्धारित अवधि तक सेवानिवृत्त होने वाले अधिकारियों के लिए अलग व्यवस्था लागू हो सकती है।हालांकि, छूट मिलने का अर्थ यह नहीं है कि संबंधित अधिकारी चुनाव में सभी प्रकार की जिम्मेदारियां संभाल सकेंगे।आयोग ने संवेदनशील चुनावी पदों पर तैनाती के संबंध में अलग शर्तें निर्धारित की हैं।
विधानसभा चुनाव से पहले प्रशासनिक तैयारियां तेज
उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। ऐसे में चुनाव आयोग ने प्रशासनिक व्यवस्था को समय रहते तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।मतदाता सूची, चुनावी अधिकारियों की तैनाती, सुरक्षा व्यवस्था और चुनाव प्रबंधन से जुड़ी तैयारियों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।पुलिस विभाग में संभावित फेरबदल इसी चुनावी तैयारी का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।राज्य के विभिन्न जिलों में लंबे समय से कार्यरत अधिकारियों की पहचान होने के बाद नई तैनाती व्यवस्था तैयार की जाएगी।
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