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योगी कैबिनेट विस्तार की अटकलें तेज, राज्यपाल से मिले CM, 6 नए मंत्रियों की हो सकती है एंट्री

Uttar Pradesh: उत्तर प्रदेश की राजनीति में शनिवार शाम उस समय हलचल तेज हो गई जब मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने लखनऊ स्थित जनभवन पहुंचकर राज्यपाल Anandiben Patel से मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद प्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर चर्चाएं और तेज हो गई हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि रविवार शाम करीब तीन बजे मंत्रिमंडल विस्तार किया जा सकता है और इसमें छह नए चेहरों को शामिल किए जाने की संभावना है।
मुख्यमंत्री की राज्यपाल से मुलाकात को आधिकारिक तौर पर शिष्टाचार भेंट बताया गया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने राज्यपाल को लालचंद राम द्वारा लिखित ‘भारतीय ज्ञान परंपरा अवधारणा’ पुस्तक भी भेंट की। हालांकि राजनीतिक हलकों में इस मुलाकात को संभावित मंत्रिमंडल विस्तार से जोड़कर देखा जा रहा है। पिछले कुछ घंटों में राजधानी लखनऊ में राजनीतिक गतिविधियां अचानक बढ़ गई हैं और कई संभावित चेहरों की चर्चा शुरू हो गई है।
सूत्रों के मुताबिक जिन नेताओं को मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है, उन्हें राजधानी में ही रहने के संकेत दिए गए हैं। इससे यह अटकलें और मजबूत हो गई हैं कि सरकार जल्द विस्तार कर सकती है। बताया जा रहा है कि इस बार कैबिनेट विस्तार में सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन साधने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। मंत्रिमंडल में जिन नामों की सबसे ज्यादा चर्चा है उनमें पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष Bhupendra Chaudhary का नाम प्रमुख माना जा रहा है। पार्टी संगठन में लंबे समय तक सक्रिय रहने और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में प्रभाव रखने के कारण उन्हें मजबूत दावेदार माना जा रहा है। इसके अलावा पूजा पाल, मनोज पांडेय और सुरेंद्र दिलेर के नाम भी राजनीतिक चर्चाओं में शामिल हैं।
पूजा पाल का नाम खास तौर पर इसलिए चर्चा में है क्योंकि उन्हें शामिल कर भाजपा महिला और पिछड़ा वर्ग दोनों समीकरणों को साधने की कोशिश कर सकती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम समाजवादी पार्टी के प्रभाव वाले क्षेत्रों में भाजपा की रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है। इसके अलावा पूर्व मंत्री महेंद्र सिंह, कृष्णा पासवान, संतोष सिंह, हंसराज विश्वकर्मा और आशा मौर्य के नाम भी संभावित सूची में बताए जा रहे हैं। संगठन से जुड़े कुछ ब्राह्मण नेताओं और ब्रज क्षेत्र के एक विधायक का नाम भी चर्चा में है।
हालांकि सूत्रों का कहना है कि यह विस्तार सीमित दायरे में ही होगा। माना जा रहा है कि किसी मौजूदा मंत्री को हटाए जाने की संभावना फिलहाल कम है। विभागों में बड़े फेरबदल के संकेत भी नहीं मिले हैं। सरकार और संगठन दोनों स्तरों पर यह राय बनी बताई जा रही है कि विधानसभा चुनाव नजदीक होने के कारण बड़े बदलाव से बचना बेहतर होगा।
राजनीतिक जानकारों के अनुसार भाजपा इस समय ऐसा कोई संदेश नहीं देना चाहती जिससे सरकार या संगठन में असंतोष की चर्चा बढ़े। यही वजह है कि मौजूदा मंत्रियों को हटाने के बजाय केवल नए चेहरों को जोड़कर सामाजिक और राजनीतिक संतुलन मजबूत करने की रणनीति अपनाई जा सकती है। बीते कुछ दिनों से कई मंत्रियों के विभाग बदले जाने और कुछ चेहरों को बाहर किए जाने की चर्चाएं भी चल रही थीं। बताया जा रहा था कि कुछ मंत्रियों की कार्यशैली को लेकर केंद्रीय नेतृत्व और मुख्यमंत्री स्तर पर नाराजगी है। हालांकि चुनाव नजदीक होने के कारण किसी बड़े बदलाव पर सहमति नहीं बन सकी। पार्टी के भीतर एक वर्ग ने यह तर्क भी रखा कि चुनाव से पहले किसी मंत्री को हटाने का संदेश कार्यकर्ताओं और जनता के बीच गलत असर डाल सकता है।
इन चर्चाओं के बीच कई मौजूदा मंत्रियों को राहत मिलने की बात भी कही जा रही है। उम्रदराज नेताओं और उन मंत्रियों को भी राहत महसूस हो रही है जिनके विभाग बदले जाने की अटकलें लगाई जा रही थीं। पिछले कुछ समय में कई नेताओं की दिल्ली में पार्टी नेतृत्व से मुलाकातों को भी इसी राजनीतिक कवायद से जोड़कर देखा जा रहा था। भाजपा के लिए यह संभावित विस्तार राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा राज्य है और आने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए पार्टी संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर संतुलन साधने की कोशिश कर रही है। सामाजिक समीकरण, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और संगठनात्मक अनुभव को ध्यान में रखते हुए नए चेहरों को मौका दिए जाने की संभावना जताई जा रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यदि विस्तार होता है तो इसका मुख्य उद्देश्य सरकार की छवि मजबूत करना और चुनाव से पहले विभिन्न सामाजिक वर्गों को साधना होगा। भाजपा पहले भी उत्तर प्रदेश में जातीय और क्षेत्रीय संतुलन को लेकर रणनीतिक फैसले लेती रही है। ऐसे में इस विस्तार को भी उसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
हालांकि अभी तक सरकार या भाजपा की ओर से मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। लेकिन मुख्यमंत्री और राज्यपाल की मुलाकात, संभावित नेताओं की लखनऊ में मौजूदगी और राजनीतिक हलचल ने इस चर्चा को और तेज कर दिया है। अब सभी की नजर रविवार पर टिकी हुई है कि क्या वास्तव में योगी सरकार अपने मंत्रिमंडल का विस्तार करती है या फिर यह चर्चाएं कुछ और समय तक जारी रहेंगी।





