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उत्तर प्रदेश
अयोध्या राम मंदिर में शरद पूर्णिमा की खास तैयारी
Rajeshwari Nishad
24 Oct 2026 7:46 PM IST

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अयोध्या। भगवान श्रीराम की पावन नगरी अयोध्या में शरद पूर्णिमा के अवसर पर विशेष धार्मिक आयोजन की तैयारियां की जा रही हैं। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से रविवार, 25 अक्टूबर को श्रीरामजन्मभूमि मंदिर में विशेष धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इस अवसर पर प्रभु श्रीरामलला सरकार का विधि-विधान से विशेष पूजन-अर्चन किया जाएगा। वहीं, परंपरा के अनुसार रात्रि में भगवान को खीर का विशेष भोग अर्पित किया जाएगा। इसके साथ ही पारंपरिक पदगायन का आयोजन भी होगा, जिससे मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण से सराबोर रहेगा।
शरद पूर्णिमा का पर्व हिंदू धर्म में विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व रखता है। इस दिन भगवान की आराधना, भोग अर्पण और भजन-कीर्तन की परंपरा रही है। अयोध्या के श्रीरामजन्मभूमि मंदिर में आयोजित होने वाला यह कार्यक्रम धार्मिक परंपराओं के संरक्षण और भगवान श्रीराम के प्रति श्रद्धा का विशेष अवसर होगा।
रामलला सरकार का होगा विशेष पूजन-अर्चन
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, शरद पूर्णिमा के अवसर पर मंदिर में प्रभु श्रीरामलला सरकार की विशेष पूजा की जाएगी। इस दौरान धार्मिक परंपराओं के अनुसार भगवान की आराधना होगी।
श्रीरामजन्मभूमि मंदिर देशभर के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। यहां आयोजित होने वाले धार्मिक कार्यक्रमों का विशेष महत्व होता है। पर्व और त्योहारों के अवसर पर भगवान रामलला की पूजा-अर्चना को लेकर भक्तों में विशेष उत्साह रहता है।
शरद पूर्णिमा पर होने वाला यह आयोजन भी इसी धार्मिक परंपरा का हिस्सा है। इस अवसर पर भगवान श्रीराम की आराधना के साथ भक्ति और आध्यात्मिकता का विशेष वातावरण रहेगा।
रात में रामलला को अर्पित होगा खीर का भोग
इस आयोजन का प्रमुख आकर्षण रात्रि में भगवान रामलला को अर्पित किया जाने वाला खीर का विशेष भोग होगा। शरद पूर्णिमा के अवसर पर खीर बनाने और भगवान को अर्पित करने की परंपरा प्राचीन समय से चली आ रही है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा अपनी पूर्ण कलाओं के साथ दिखाई देता है। इस अवसर पर खीर को चांदनी में रखने की भी परंपरा है। लोकमान्यता है कि इस रात चंद्रमा की किरणों का विशेष महत्व होता है।
हालांकि, चंद्रमा की किरणों से खीर में औषधीय गुण आने की मान्यता का वैज्ञानिक प्रमाण स्थापित नहीं है। धार्मिक दृष्टि से यह परंपरा श्रद्धा और आस्था से जुड़ी हुई है।
श्रीरामजन्मभूमि मंदिर में भी परंपरा के अनुसार भगवान को रात्रि में खीर का भोग अर्पित किया जाएगा। यह आयोजन मंदिर की धार्मिक परंपराओं को आगे बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण अवसर होगा।
पारंपरिक पदगायन से भक्तिमय होगा वातावरण
शरद पूर्णिमा के विशेष आयोजन में पारंपरिक पदगायन भी किया जाएगा। भगवान श्रीराम की भक्ति से जुड़े पदों और धार्मिक रचनाओं के गायन का भारतीय भक्ति परंपरा में विशेष स्थान है।
अयोध्या की धार्मिक संस्कृति में भजन, कीर्तन और पदगायन की समृद्ध परंपरा रही है। भगवान राम के जीवन, उनके आदर्शों और उनकी महिमा का वर्णन करने वाले भक्ति पद श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभूति प्रदान करते हैं।
मंदिर में आयोजित होने वाला पारंपरिक पदगायन इस धार्मिक कार्यक्रम को और विशेष बनाएगा। भगवान रामलला की आराधना के साथ भक्ति संगीत का यह संगम शरद पूर्णिमा के पर्व को आध्यात्मिक स्वरूप प्रदान करेगा।
शरद पूर्णिमा का हिंदू धर्म में विशेष महत्व
हिंदू पंचांग के अनुसार, आश्विन मास की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहा जाता है। इस पर्व को कोजागरी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। देश के अलग-अलग हिस्सों में इसे विभिन्न धार्मिक परंपराओं के साथ मनाया जाता है।
शरद पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। कई स्थानों पर इस अवसर पर व्रत, पूजा और रात्रि जागरण की परंपरा भी है।धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस रात माता लक्ष्मी की आराधना करने से घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली आती है। श्रद्धालु अपने परिवार की मंगलकामना के लिए पूजा-अर्चना करते हैं।भगवान श्रीराम को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है। इसी कारण शरद पूर्णिमा के अवसर पर रामलला की विशेष आराधना का धार्मिक महत्व और बढ़ जाता है।
अयोध्या की धार्मिक परंपराओं को मिलेगा नया उत्साह
अयोध्या भगवान श्रीराम की जन्मभूमि होने के कारण सनातन धर्म की प्रमुख धार्मिक नगरियों में शामिल है। यहां वर्षभर विभिन्न धार्मिक पर्वों और उत्सवों का आयोजन होता रहता है।रामनवमी, दीपोत्सव और अन्य प्रमुख त्योहारों की तरह शरद पूर्णिमा भी श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखती है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से अयोध्या की प्राचीन धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को आगे बढ़ाया जाता है।श्रीरामजन्मभूमि मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद धार्मिक आयोजनों को लेकर श्रद्धालुओं की रुचि और बढ़ी है। मंदिर में होने वाले विशेष पूजन और उत्सव देशभर के रामभक्तों के लिए आस्था का विषय बने हुए हैं।
श्रद्धालुओं के लिए खास होगा धार्मिक अवसर
शरद पूर्णिमा पर आयोजित होने वाला यह कार्यक्रम भगवान रामलला के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का विशेष अवसर होगा। मंदिर में विशेष पूजन, खीर भोग और पारंपरिक पदगायन के माध्यम से धार्मिक परंपराओं का निर्वहन किया जाएगा।
हालांकि, आयोजन के दौरान दर्शन व्यवस्था, कार्यक्रम की विस्तृत समय-सारिणी और श्रद्धालुओं के प्रवेश संबंधी विशेष निर्देशों की जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है। श्रद्धालुओं को मंदिर ट्रस्ट की आधिकारिक सूचनाओं के अनुसार ही अपनी यात्रा की योजना बनानी चाहिए।
रामलला की भक्ति में सराबोर होगी रामनगरी
शरद पूर्णिमा के अवसर पर अयोध्या में आयोजित होने वाला यह विशेष धार्मिक कार्यक्रम भगवान श्रीराम की भक्ति और भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं का सुंदर संगम होगा।रविवार, 25 अक्टूबर को श्रीरामजन्मभूमि मंदिर में प्रभु श्रीरामलला सरकार का विशेष पूजन-अर्चन, रात्रि में खीर का भोग और पारंपरिक पदगायन किया जाएगा। इस आयोजन के माध्यम से भगवान श्रीराम की आराधना के साथ शरद पूर्णिमा की धार्मिक परंपराओं को आगे बढ़ाया जाएगा।
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