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एक किलो मिठाई के दाम में खरीद लेंगे सोने की अंगूठी!
गुजरात। गुजरात के सूरत में पारंपरिक चंडी पड़वा पर्व को लेकर बाजारों में जबरदस्त रौनक देखने को मिल रही है। शरद पूर्णिमा के अवसर पर मनाए जाने वाले इस खास त्योहार में घारी मिठाई का विशेष महत्व है। त्योहार के मद्देनजर मिठाई कारोबारियों ने बड़े पैमाने पर तैयारियां की हैं। इस बार बाजार में सबसे ज्यादा चर्चा 21 हजार रुपये प्रति किलो की कीमत वाली 'गोल्डन घारी' की हो रही है। सोने की परत और महंगी सामग्री से तैयार इस मिठाई को देखने और खरीदने के लिए ग्राहक दुकानों पर पहुंच रहे हैं।
Surat, Gujarat: Gujarat is gearing up for the traditional festival of Chandi Padwa, celebrated on Sharad Purnima. With demand for ghari sweets rising in Surat, sweet makers have made extensive preparations. This year, the ₹21,000-per-kg “Golden Ghari,” made with gold foil and premium ingredients, is a major attraction. Regular ghari prices start at around ₹900 per kg. Surat’s ghari is in demand as far as Canada, the US and Europe, with people buying it despite its high price to uphold the festival’s tradition.
— IANS (@ians_india) October 24, 2026
21 हजार रुपये किलो की मिठाई बनी आकर्षण
सूरत की मशहूर घारी मिठाई इस बार अपने अनोखे और महंगे अवतार के कारण सुर्खियों में है। गोल्डन घारी को खास तरीके से तैयार किया गया है। इसमें सोने की परत के साथ प्रीमियम सामग्री का इस्तेमाल किया गया है। इसकी कीमत 21 हजार रुपये प्रति किलो रखी गई है। वहीं, सामान्य घारी मिठाई की कीमत करीब 900 रुपये प्रति किलो से शुरू होती है। बाजार में ग्राहकों के लिए अलग-अलग स्वाद और कीमत वाली 10 से 15 किस्मों की घारी उपलब्ध हैं।
ग्राहक बोले- एक किलो नहीं, एक पीस खरीद सकते हैं
मिठाई खरीदने पहुंचे एक ग्राहक ने बताया कि वे त्योहार के लिए खरीदारी करने आए हैं। दुकान में घारी की 10 से 15 किस्में उपलब्ध हैं, लेकिन सोने की परत से सजी गोल्डन घारी ने उनका ध्यान सबसे ज्यादा खींचा। ग्राहक ने कहा, "गोल्डन घारी की कीमत 21 हजार रुपये प्रति किलो है। हम एक किलो तो नहीं खरीद सकते, लेकिन इसका एक पीस जरूर खरीद सकते हैं। हम आमतौर पर कम कीमत वाली घारी खरीदते हैं।
विदेशों तक पहुंची सूरत की घारी
सूरत की घारी मिठाई की लोकप्रियता केवल गुजरात या भारत तक सीमित नहीं है। कनाडा, अमेरिका और यूरोप के कई देशों में भी इसकी मांग बनी हुई है। विदेशों में रहने वाले गुजराती परिवार चंडी पड़वा के अवसर पर इस पारंपरिक मिठाई को विशेष रूप से पसंद करते हैं। त्योहार के दौरान बढ़ती मांग को देखते हुए मिठाई निर्माताओं ने उत्पादन और बिक्री की तैयारियां तेज कर दी हैं।
महंगाई के बावजूद परंपरा का उत्साह
चंडी पड़वा पर्व पर घारी खाने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। इस दिन परिवार और रिश्तेदार एक-दूसरे को मिठाइयां खिलाकर त्योहार मनाते हैं। महंगी गोल्डन घारी जहां ग्राहकों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है, वहीं सामान्य कीमत वाली घारी की भी खरीदारी हो रही है। कारोबारियों को उम्मीद है कि त्योहार के दौरान मिठाई की बिक्री में अच्छी बढ़ोतरी होगी।
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