उत्तर प्रदेश

हादसों पर अंकुश लगाने के लिए राजमार्गों पर विशेष जांच

Ratna Netam
16 Aug 2026 7:47 PM IST
हादसों पर अंकुश लगाने के लिए राजमार्गों पर विशेष जांच
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं और यातायात नियमों के उल्लंघन को रोकने के लिए परिवहन विभाग ने प्रवर्तन कार्रवाई तेज कर दी है। विभाग के आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 और चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 के शुरुआती चार महीनों में प्रदेशभर में 20 लाख से अधिक वाहनों के चालान किए गए हैं। इन कार्रवाइयों के माध्यम से करीब 646 करोड़ रुपये का प्रशमन शुल्क यानी जुर्माना वसूला गया है।
प्रदेश में वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इसके साथ सड़कों पर यातायात दबाव, तेज रफ्तार, ओवरलोडिंग और नियमों के उल्लंघन की घटनाएं भी चुनौती बनी हुई हैं। राज्य सरकार सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को कम करने और शून्य मृत्यु दर के लक्ष्य की दिशा में अलग-अलग विभागों को मिलकर काम करने के निर्देश देती रही है। इसी क्रम में परिवहन विभाग की प्रवर्तन टीमें प्रदेश के अलग-अलग जिलों में लगातार जांच अभियान चला रही हैं।
अपर परिवहन आयुक्त प्रवर्तन केडी सिंह गौर ने बताया कि सड़क पर सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करना और वाहन चालकों से यातायात नियमों का पालन कराना विभाग की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। प्रवर्तन कार्रवाई का उद्देश्य केवल जुर्माना वसूलना नहीं, बल्कि वाहन चालकों को उनकी जिम्मेदारी के प्रति जागरूक करना और सड़क सुरक्षा व्यवस्था मजबूत बनाना है।
वित्तीय वर्ष 2025-26 में परिवहन विभाग की प्रवर्तन टीमों ने प्रदेशभर में करीब 15 लाख वाहनों के चालान किए थे। इन कार्रवाइयों से करीब 474 करोड़ रुपये का प्रशमन शुल्क प्राप्त हुआ। उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग ने भी अपने आधिकारिक सोशल मीडिया खाते पर इन आंकड़ों की जानकारी साझा की है।
चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 के शुरुआती चार महीनों में भी अभियान जारी रहा। इस अवधि में करीब पांच लाख वाहनों का चालान किया गया और 172 करोड़ रुपये प्रशमन शुल्क के रूप में वसूले गए। दोनों अवधियों को मिलाकर चालानों की संख्या 20 लाख और वसूली की राशि 646 करोड़ रुपये तक पहुंचती है।
परिवहन विभाग की कार्रवाई मुख्य रूप से ओवरलोडिंग, निर्धारित क्षमता से अधिक यात्रियों को बैठाने, बिना परमिट वाहन चलाने, फिटनेस प्रमाणपत्र समाप्त होने और आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने जैसे मामलों में की जाती है। इसके अलावा टैक्स बकाया, प्रदूषण प्रमाणपत्र, वाहन की असुरक्षित स्थिति और नियमों के खिलाफ व्यावसायिक संचालन की भी जांच की जाती है।
तेज रफ्तार सड़क दुर्घटनाओं का एक प्रमुख कारण है। विभाग और यातायात पुलिस की टीमें स्पीड जांच उपकरण तथा कैमरों की मदद से ऐसे वाहनों की पहचान करती हैं। टोल प्लाजा पर स्वचालित ई-डिटेक्शन प्रणाली के माध्यम से वाहन डेटाबेस की जांच करके फिटनेस, परमिट और अन्य दस्तावेजों की वैधता का पता लगाने की तैयारी भी की जा रही है। इस व्यवस्था के पायलट प्रोजेक्ट इटौंजा और बाराबंकी-अहमदपुर टोल प्लाजा से शुरू किए जाने की योजना सामने आई है।
अधिकारियों के मुताबिक, प्रवर्तन कार्रवाई से नियम तोड़ने वाले वाहन चालकों पर दबाव बनता है और दूसरों को भी यातायात नियमों का पालन करने का संदेश मिलता है। हालांकि केवल चालान और जुर्माना सड़क दुर्घटनाओं को पूरी तरह नहीं रोक सकते। इसके लिए बेहतर सड़क निर्माण, दुर्घटना संभावित स्थानों में सुधार, प्रभावी संकेतक, आपातकालीन चिकित्सा सुविधा और वाहन चालकों का जिम्मेदार व्यवहार भी आवश्यक है।
सड़क सुरक्षा में आम नागरिकों की भागीदारी को परिवहन विभाग ने बेहद जरूरी बताया है। दोपहिया वाहन चालकों को मानक हेलमेट पहनने, कार सवारों को सीट बेल्ट लगाने और वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं करने की सलाह दी गई है। शराब पीकर वाहन चलाना, तेज रफ्तार और गलत दिशा में ड्राइविंग स्वयं के साथ दूसरे लोगों के जीवन को भी खतरे में डाल सकती है।
विभाग का कहना है कि चालान और जुर्माने की बड़ी संख्या को सफलता का अंतिम पैमाना नहीं माना जाना चाहिए। प्रवर्तन का वास्तविक उद्देश्य नियमों का पालन बढ़ाना और दुर्घटनाओं में कमी लाना है। सरकार को उम्मीद है कि तकनीक, जागरूकता और सख्त कार्रवाई के संयुक्त प्रयास से प्रदेश में सड़क सुरक्षा व्यवस्था बेहतर होगी।
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