उत्तर प्रदेश

22 जिलों में मिट्टी की जांच किसानों को सात दिन में मिलेगी रिपोर्ट

nidhi
3 Sept 2026 8:43 AM IST
22 जिलों में मिट्टी की जांच किसानों को सात दिन में मिलेगी रिपोर्ट
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खेत की मिट्टी बताएगी फसल का हाल

कानपुर: किसानों को अपनी जमीन की मिट्टी की वास्तविक स्थिति जानने के लिए अब लंबे समय तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय यानी CSA कानपुर की ओर से 22 जिलों में मिट्टी की जांच की जाएगी। जांच के बाद किसानों को करीब पांच से सात दिनों में रिपोर्ट उपलब्ध कराने की योजना है। इससे किसानों को यह समझने में मदद मिलेगी कि उनके खेत की मिट्टी में किन पोषक तत्वों की कमी है और फसल के लिए कितनी मात्रा में खाद या उर्वरक की जरूरत है।मिट्टी की जांच खेती के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। कई बार किसान बिना मिट्टी की वास्तविक स्थिति जाने ही नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश और दूसरे उर्वरकों का इस्तेमाल करते हैं। आवश्यकता से ज्यादा उर्वरक डालने पर खेती की लागत बढ़ती है और लंबे समय में मिट्टी की गुणवत्ता भी प्रभावित हो सकती है। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद किसान जरूरत के अनुसार पोषक तत्वों का इस्तेमाल कर सकेंगे।

22 जिलों से लिए जाएंगे मिट्टी के नमूने
CSA कानपुर के विशेषज्ञों की निगरानी में 22 जिलों के खेतों से मिट्टी के नमूने लेकर उनकी जांच की जाएगी। वैज्ञानिक तरीके से लिए गए नमूनों को प्रयोगशाला में भेजा जाएगा जहां मिट्टी के अलग-अलग गुणों का परीक्षण किया जाएगा। जांच के दौरान मिट्टी में मौजूद प्रमुख पोषक तत्वों के साथ उसकी उर्वरता और फसल उत्पादन से जुड़े महत्वपूर्ण मानकों का आकलन किया जा सकता है। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि किसी खेत में कौन से पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में मौजूद हैं और किनकी कमी को पूरा करने की जरूरत है।
पांच से सात दिन में रिपोर्ट
इस अभियान की खास बात यह है कि किसानों को मिट्टी जांच की रिपोर्ट के लिए ज्यादा इंतजार नहीं करना होगा। नमूना प्रयोगशाला पहुंचने और जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद करीब पांच से सात दिनों में रिपोर्ट उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। रिपोर्ट के आधार पर किसानों को फसल के अनुरूप उर्वरकों के इस्तेमाल के बारे में सलाह दी जा सकेगी। इससे अनुमान के आधार पर खाद डालने के बजाय वैज्ञानिक तरीके से खेती करने को बढ़ावा मिलेगा।
खाद पर होने वाला खर्च हो सकता है कम
मिट्टी की जांच का सबसे बड़ा फायदा किसानों की उत्पादन लागत कम करने में मिल सकता है। अगर मिट्टी में पहले से किसी पोषक तत्व की पर्याप्त मात्रा मौजूद है तो उसकी अतिरिक्त मात्रा डालने की जरूरत नहीं होगी। इससे खाद और उर्वरकों पर होने वाला अनावश्यक खर्च बचाया जा सकता है। दूसरी ओर किसी जरूरी तत्व की कमी मिलने पर किसान समय रहते उसकी पूर्ति कर सकेंगे। इससे फसल की वृद्धि और उत्पादन बेहतर करने में मदद मिल सकती है।
मिट्टी की बिगड़ती सेहत बड़ी चिंता
लगातार एक जैसी फसल उगाने, असंतुलित उर्वरक इस्तेमाल और जैविक पदार्थों की कमी के कारण कई क्षेत्रों में मिट्टी की उर्वरता प्रभावित होती है। मिट्टी की नियमित जांच से समय रहते इन बदलावों की पहचान की जा सकती है। कृषि विशेषज्ञ संतुलित उर्वरक इस्तेमाल के साथ जैविक खाद, फसल चक्र और मिट्टी की प्रकृति के अनुरूप खेती पर जोर देते हैं। इसके लिए सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि खेत की मौजूदा स्थिति क्या है।
CSA कानपुर की इस पहल से किसानों को अपने खेत की मिट्टी के बारे में वैज्ञानिक जानकारी उपलब्ध होगी। पांच से सात दिनों में रिपोर्ट मिलने से किसान अगली फसल की तैयारी और उर्वरक प्रबंधन के फैसले समय पर ले सकेंगे। 22 जिलों में होने वाली मिट्टी की जांच का उद्देश्य केवल पोषक तत्वों की कमी पता लगाना नहीं बल्कि किसानों को वैज्ञानिक खेती की ओर बढ़ाना भी है। सही जांच और उसके आधार पर उर्वरकों का संतुलित इस्तेमाल उत्पादन लागत कम करने के साथ मिट्टी की सेहत को लंबे समय तक बनाए रखने में मददगार साबित हो सकता है।
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