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Uttar Pradesh: उत्तर प्रदेश में 6 दिसंबर को लेकर सुरक्षा एजेंसियों ने व्यापक तैयारियाँ की हैं। बाबरी मस्जिद की बरसी को देखते हुए राज्य के कई प्रमुख जिलों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है। प्रशासन, पुलिस और खुफिया विभाग ने मिलकर उन इलाकों में सुरक्षा को कई स्तरों तक बढ़ाया है, जहाँ भीड़ जुटने, अफवाह फैलने या किसी अप्रिय स्थिति की आशंका रहती है। मथुरा, संभल और अयोध्या जैसे संवेदनशील जिलों में सुरक्षा का दायरा विस्तार किया गया है और अधिकारियों ने स्वयं मैदान में जाकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया है।
धार्मिक महत्व वाले मथुरा शहर में जिला प्रशासन ने हाई अलर्ट जारी करते हुए विशेष निगरानी की व्यवस्था की है। श्रीकृष्ण जन्मस्थान परिसर और शाही ईदगाह मस्जिद के आसपास सुरक्षा घेरा और मजबूत किया गया है। शहर के प्रमुख चौराहों, बाजारों, संकरी गलियों और मिश्रित आबादी वाले इलाकों में पुलिस बल को तैनात किया गया है। ड्रोन कैमरों की मदद से भीड़भाड़ वाले स्थानों की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। नगर क्षेत्र में पुलिस की फुट पेट्रोलिंग का दायरा बढ़ाया गया है ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई हो सके।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि भीड़ नियंत्रण की स्थिति में PAC और RRF की कंपनियों को पहले से सक्रिय रखा गया है। उच्च अधिकारियों—एसएसपी, एडीएम और डीएम—ने कई स्थानों पर स्वयं गश्त की और सुरक्षा व्यवस्था की अगुवाई की। कमांड कंट्रोल रूम में मिनट-टू-मिनट निगरानी की जा रही है। शहर के CCTV नेटवर्क को पूरी तरह एक्टिव किया गया है और पुराने कैमरों की तकनीकी जांच भी कराई गई है ताकि कोई खामी न रह जाए।
अयोध्या में भीड़ नियंत्रण को लेकर पुलिस ने सख्त प्रोटोकॉल लागू किए हैं। रामनगरी में आने-जाने वाले मार्गों पर अतिरिक्त बैरिकेडिंग की गई है। मंदिर परिसर और आस-पास के क्षेत्रों में विशेष सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ाई गई है। संवेदनशील चौराहों पर अतिरिक्त महिला पुलिस कर्मियों को भी लगाया गया है। खुफिया विभाग ने स्थानीय प्रशासन को संभावित जोखिम वाले बिंदुओं की सूची साझा की है, जिसके आधार पर गश्ती दलों की संख्या बढ़ाई गई है।
संभल जिले में भीड़भाड़ वाले बाजार, धार्मिक स्थल और प्रमुख मार्गों पर सुरक्षा एजेंसियाँ पैनी नजर बनाए हुए हैं। जिला प्रशासन ने शांति समिति की बैठकों के दौर भी बढ़ा दिए हैं ताकि स्थानीय स्तर पर संवाद स्थापित रहे और किसी भी तरह की गलत सूचना को फैलने से रोका जा सके। सोशल मीडिया मॉनिटरिंग सेल को विशेष निर्देश दिए गए हैं कि किसी भ्रामक पोस्ट या उकसावे वाली सामग्री को तुरंत चिन्हित किया जाए।
राज्यभर में लागू इस सुरक्षा ढांचे में पुलिस टुकड़ियों, PAC, RRF और इंटेलिजेंस यूनिट का समन्वय लगातार बना हुआ है। मुख्यालय से जिलों को यह निर्देश दिया गया है कि किसी भी स्थिति में प्रतिक्रिया समय कम से कम रखा जाए और हर गतिविधि की रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखी जाए। अधिकारी यह भी सुनिश्चित कर रहे हैं कि सामान्य जनजीवन प्रभावित न हो और लोग स्वतंत्र रूप से आवाजाही कर सकें।
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