उत्तर प्रदेश

Shiv Sena यूबीटी की याचिका पर SC का रुख साफ

Ratna Netam
22 July 2026 2:52 PM IST
Shiv Sena  यूबीटी की याचिका पर SC का रुख साफ
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Uttar Pradesh उत्तर प्रदेश : दल बदल कानून को लेकर सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को दो अहम घटनाक्रम सामने आए। एक ओर जहां वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दल बदल कानून को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है, वहीं दूसरी ओर अदालत ने शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) यानी शिवसेना यूबीटी की याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जताई है। हालांकि, अदालत ने फिलहाल विलय के फैसले पर तत्काल रोक लगाने से इनकार कर दिया है।

कपिल सिब्बल की ओर से दायर याचिका में दल बदल कानून यानी संविधान की 10वीं अनुसूची को लेकर चिंता जताई गई है। याचिका में कहा गया है कि मौजूदा व्यवस्था के कारण दल बदल कानून कमजोर हो रहा है और इसका गलत इस्तेमाल किया जा रहा है। सिब्बल ने अदालत के सामने कहा कि अगर यह स्थिति जारी रही तो संविधान की 10वीं अनुसूची का महत्व खत्म हो जाएगा।

सिब्बल ने अपनी दलील में कहा कि अलग होने वाले राजनीतिक गुट विलय का रास्ता अपनाकर दल बदल कानून से बच निकलते हैं। उनकी याचिका में 10वीं अनुसूची की व्याख्या को चुनौती दी गई है। उनका कहना है कि कानून में मौजूद खामियों के कारण राजनीतिक दलों में टूट और फिर विलय की प्रक्रिया को बढ़ावा मिल रहा है।

यह याचिका मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाला बागची और जस्टिस वी मोहाना की पीठ के सामने पेश की गई। सुनवाई के दौरान पीठ ने मामले को सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई। अदालत ने कहा कि इस मामले पर आगे सुनवाई की जाएगी।

वहीं, शिवसेना यूबीटी की ओर से दायर याचिका पर भी सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के लिए हामी भर दी है। जस्टिस एस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने इस मामले में नोटिस जारी करते हुए लोकसभा अध्यक्ष के कार्यालय और अन्य संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद तय की है।

दरअसल, शिवसेना यूबीटी ने लोकसभा अध्यक्ष के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें शिवसेना यूबीटी के छह सांसदों के शिंदे गुट वाली शिवसेना में विलय को मंजूरी दी गई थी। लोकसभा अध्यक्ष ने 18 जुलाई को यह अनुमति दी थी। इस फैसले के खिलाफ उद्धव ठाकरे गुट ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल इस विलय के फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। इससे शिवसेना यूबीटी को एक ओर जहां सुनवाई का अवसर मिला है, वहीं तत्काल राहत नहीं मिल पाई है।

मामले का संबंध महाराष्ट्र की राजनीति में लंबे समय से चले आ रहे शिवसेना विवाद से जुड़ा है। शिवसेना में विभाजन के बाद एकनाथ शिंदे गुट और उद्धव ठाकरे गुट के बीच राजनीतिक और कानूनी लड़ाई जारी है। दल बदल कानून और विधायकों-सांसदों के विलय को लेकर दोनों पक्षों के अपने-अपने दावे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट में चल रही इन सुनवाइयों का असर देश की राजनीति में दल बदल से जुड़े मामलों पर पड़ सकता है। अगर अदालत 10वीं अनुसूची की व्याख्या को लेकर कोई महत्वपूर्ण फैसला देती है, तो भविष्य में राजनीतिक दलों में टूट और विलय की प्रक्रिया पर बड़ा प्रभाव पड़ सकता है।

फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने दोनों मामलों में सुनवाई का रास्ता खोल दिया है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि अदालत दल बदल कानून को लेकर क्या रुख अपनाती है और शिवसेना यूबीटी की याचिका पर आगे क्या निर्णय लिया जाता है।

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