- Home
- /
- राज्य
- /
- उत्तर प्रदेश
- /
- Bulldozer कार्रवाई पर...

Uttar Pradesh उत्तर प्रदेश : उत्तर प्रदेश के रामपुर स्थित आजम खां के जौहर विश्वविद्यालय को लेकर चल रहा विवाद अब राजनीतिक रूप से और गरमा गया है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के बाद अब कांग्रेस नेता और तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर ने भी इस मामले में प्रतिक्रिया दी है। थरूर ने जौहर विश्वविद्यालय की 40 में से 38 इमारतों को ध्वस्त करने के आदेश पर सवाल उठाते हुए इसे ‘विवेकहीन’ फैसला करार दिया है।
शशि थरूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट के जरिए अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में जब उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में अच्छे उच्च शिक्षा संस्थानों की जरूरत है, तब किसी सक्रिय विश्वविद्यालय को इस तरह नष्ट करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर निर्माण कार्य नियमों के खिलाफ था तो इसके लिए अन्य कानूनी कदम उठाए जा सकते हैं।
थरूर ने अपने पोस्ट में लिखा कि अगर इमारतों का निर्माण अवैध पाया गया है तो सरकार जुर्माना लगा सकती है, अन्य दंडात्मक कार्रवाई कर सकती है या फिर विश्वविद्यालय को अपने नियंत्रण में ले सकती है। लेकिन शिक्षा के क्षेत्र में काम कर रहे एक संस्थान को पूरी तरह खत्म करना सही कदम नहीं होगा।
दरअसल, रामपुर विकास प्राधिकरण ने आजम खां के मौलाना मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय की 40 में से 38 इमारतों को बिना स्वीकृत नक्शे के निर्माण के चलते अवैध घोषित किया है। प्राधिकरण की ओर से विश्वविद्यालय प्रबंधन को नोटिस जारी कर इन इमारतों को खुद हटाने के निर्देश दिए गए हैं। नोटिस में चेतावनी दी गई है कि अगर विश्वविद्यालय प्रबंधन ने निर्धारित समय में कार्रवाई नहीं की तो प्रशासन बुलडोजर के जरिए अवैध निर्माण को हटाएगा और इसका खर्च भी वसूला जाएगा।
इस मामले को लेकर समाजवादी पार्टी पहले ही विरोध दर्ज करा चुकी है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने विश्वविद्यालय को बचाने के लिए 28 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का गठन किया है। यह टीम रामपुर जाकर जिलाधिकारी से मुलाकात करेगी और प्रशासन की कार्रवाई का विरोध जताएगी। सपा का कहना है कि जौहर विश्वविद्यालय पर बुलडोजर कार्रवाई शिक्षा व्यवस्था और शिक्षा के अधिकार की भावना के खिलाफ है।
सपा नेताओं का दावा है कि जौहर विश्वविद्यालय में विभिन्न धर्मों और वर्गों के हजारों छात्र-छात्राएं कम फीस में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। पार्टी का कहना है कि प्रशासन की कार्रवाई से गरीब, पिछड़े और दलित वर्ग के छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो सकती है।
वहीं, इस मामले में आजाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमिताभ ठाकुर की शिकायत पर भी कार्रवाई हुई है। उनकी शिकायत के आधार पर संबंधित मामले में वाद दर्ज किया गया है। इससे पहले भी जौहर विश्वविद्यालय को लेकर कई विवाद सामने आ चुके हैं।
शशि थरूर के बयान के बाद यह मामला एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आ गया है। जहां विपक्षी दल प्रशासन की कार्रवाई का विरोध कर रहे हैं, वहीं सरकारी स्तर पर इसे नियमों के पालन से जुड़ा मामला बताया जा रहा है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि प्रशासन और विश्वविद्यालय प्रबंधन के बीच आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।





