उत्तर प्रदेश

सरकारी जमीनों की बिक्री का खेल उजागर राजस्व विभाग में मचा हड़कंप

Ratna Netam
4 Sept 2026 3:39 PM IST
सरकारी जमीनों की बिक्री का खेल उजागर राजस्व विभाग में मचा हड़कंप
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लखनऊ : उत्तर प्रदेश में सरकारी जमीनों की सुरक्षा को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। राजस्व विभाग की जांच में सरकारी भूमि से जुड़े मामलों में कई अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। आरोप है कि कुछ लेखपालों की मिलीभगत से सरकारी जमीनों पर कब्जे और खरीद-फरोख्त का खेल चल रहा था। जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद विभाग में हड़कंप मच गया है और जिम्मेदार कर्मचारियों पर कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी गई है।
सरकारी जमीनों को आम जनता के हितों के लिए सुरक्षित रखा जाता है। इन जमीनों का इस्तेमाल स्कूल, अस्पताल, सड़क, पंचायत भवन और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं के लिए किया जाता है। लेकिन कुछ मामलों में राजस्व कर्मचारियों की लापरवाही या मिलीभगत के कारण ऐसी जमीनों पर अवैध कब्जे और फर्जी दस्तावेजों के जरिए सौदे किए जाने की शिकायतें सामने आती रही हैं।
जांच में सामने आया जमीनों का खेल
राजस्व विभाग को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि कई इलाकों में सरकारी जमीनों की स्थिति में हेरफेर किया जा रहा है। शिकायतों के आधार पर अधिकारियों ने जांच शुरू की। जांच के दौरान रिकॉर्ड और मौके की स्थिति में अंतर पाया गया।
कई मामलों में आरोप है कि सरकारी जमीनों को निजी भूमि दिखाने की कोशिश की गई। कुछ जगहों पर खतौनी और राजस्व अभिलेखों में बदलाव करने की शिकायतें भी सामने आईं। अधिकारियों ने दस्तावेजों की जांच के बाद संबंधित कर्मचारियों की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।
लेखपालों की भूमिका पर उठे सवाल
राजस्व व्यवस्था में लेखपाल की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। गांव स्तर पर जमीनों का रिकॉर्ड तैयार करना, सीमांकन करना और भूमि से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराना लेखपाल की जिम्मेदारी होती है।
ऐसे में अगर किसी स्तर पर रिकॉर्ड में गड़बड़ी होती है तो इसका सीधा असर जमीन के स्वामित्व और उपयोग पर पड़ता है। जांच में कुछ लेखपालों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने के बाद विभाग ने मामले को गंभीरता से लिया है।
सरकारी जमीनों पर कब्जे की शिकायतें
प्रदेश के कई जिलों में समय-समय पर सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे की शिकायतें सामने आती रही हैं। तालाब, चारागाह, ग्राम समाज और अन्य सरकारी भूमि पर कब्जे को लेकर प्रशासन अभियान भी चलाता है।
अधिकारियों का कहना है कि सरकारी जमीनों को किसी भी कीमत पर निजी हाथों में जाने नहीं दिया जाएगा। अवैध कब्जों को हटाने के साथ-साथ दोषी लोगों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
रिकॉर्ड में हेरफेर का आरोप
जांच में यह भी देखा जा रहा है कि क्या सरकारी जमीनों के रिकॉर्ड में जानबूझकर बदलाव किया गया। राजस्व अभिलेखों में किसी भी तरह की छेड़छाड़ गंभीर मामला माना जाता है।
अगर जांच में रिकॉर्ड बदलने या गलत रिपोर्ट लगाने की पुष्टि होती है तो संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।
अधिकारियों ने कड़ा रुख अपनाया
मामला सामने आने के बाद वरिष्ठ अधिकारियों ने राजस्व कर्मचारियों को सख्त निर्देश दिए हैं। सभी सरकारी जमीनों की स्थिति की समीक्षा करने और संदिग्ध मामलों की दोबारा जांच कराने की तैयारी की जा रही है।
प्रशासन का कहना है कि सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा। दोषी पाए जाने वाले कर्मचारियों और जमीन माफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
जमीन माफियाओं पर भी शिकंजा
सरकारी जमीनों की हेराफेरी में अक्सर जमीन माफियाओं की भूमिका भी सामने आती है। ऐसे लोग फर्जी दस्तावेजों और अधिकारियों की मिलीभगत से जमीनों पर कब्जा करने की कोशिश करते हैं।
प्रशासन अब ऐसे लोगों की पहचान करने और उनके नेटवर्क को तोड़ने की तैयारी कर रहा है। कई स्थानों पर पहले भी जमीन माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है।
आम लोगों से अपील
प्रशासन ने आम लोगों से अपील की है कि सरकारी जमीनों से जुड़े किसी भी संदिग्ध लेन-देन से बचें। जमीन खरीदने से पहले दस्तावेजों की पूरी जांच कर लें।
लोगों से यह भी कहा गया है कि अगर कहीं सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे या फर्जीवाड़े की जानकारी मिलती है तो तुरंत प्रशासन को इसकी सूचना दें।
पारदर्शिता बढ़ाने की तैयारी
राजस्व विभाग जमीनों के रिकॉर्ड को डिजिटल करने और प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने पर भी काम कर रहा है। ऑनलाइन रिकॉर्ड व्यवस्था से जमीनों से जुड़े विवादों और फर्जीवाड़े को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
अधिकारियों का कहना है कि तकनीक के इस्तेमाल से जमीनों के रिकॉर्ड में होने वाली गड़बड़ियों पर बेहतर निगरानी रखी जा सकेगी।
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