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- इजरायली आम से बदलेगी...

मेरठ। आम को फलों का राजा कहा जाता है और इसकी कई देसी किस्मों ने उत्तर प्रदेश के पश्चिमी जिलों को खास पहचान दिलाई है। दशहरी, लंगड़ा, चौसा और रटौल जैसे प्रसिद्ध आमों का स्वाद देशभर में पसंद किया जाता है। अब आम प्रेमियों और किसानों के लिए एक नई खुशखबरी सामने आई है। आने वाले समय में वेस्ट यूपी के बागों में इजरायल और थाईलैंड की विदेशी आम की किस्में भी देखने को मिल सकती हैं।
उद्यान विभाग ने विदेशी प्रजातियों के आमों को बढ़ावा देने की दिशा में कदम उठाया है। इसके तहत इजरायल की प्रसिद्ध आम प्रजाति ‘माया’ के मातृ पौधे को हाइटेक नर्सरी में रोपा गया है। इसकी कलम तैयार कर किसानों को पौधे उपलब्ध कराने की योजना है।
हाइटेक नर्सरी में लगाया गया इजरायल का माया आम
इजरायल के माया आम की प्रजाति को दौराला-सरधना रोड स्थित मछरी की हाइटेक नर्सरी में लगाया गया है।
उद्यान विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस पौधे से कलम तैयार की जाएगी और इसके बाद इसी प्रजाति के पौधे किसानों को उपलब्ध कराए जाएंगे।
इसका उद्देश्य किसानों को नई और बेहतर गुणवत्ता वाली आम की किस्मों से जोड़ना है, ताकि वे पारंपरिक खेती के साथ नई प्रजातियों का उत्पादन कर सकें।
स्वाद और रंग के लिए खास है माया आम
माया आम को रंगीन आम की श्रेणी में रखा जाता है। यह अपनी आकर्षक बनावट, मिठास और सुगंध के लिए जाना जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस किस्म के आम में मिठास के साथ स्वाद का बेहतर संतुलन होता है। इसका रंग और आकार भी इसे अन्य किस्मों से अलग बनाता है।
आम की यह प्रजाति बाजार में अच्छी मांग पैदा कर सकती है, जिससे किसानों को आर्थिक लाभ मिलने की संभावना है।
किसानों को मिलेंगे नई किस्मों के विकल्प
वेस्ट यूपी के किसान लंबे समय से दशहरी, चौसा, लंगड़ा और अन्य पारंपरिक किस्मों की खेती करते आ रहे हैं।
अब विदेशी किस्मों के पौधे उपलब्ध होने से किसानों के पास उत्पादन के लिए नए विकल्प होंगे।
उद्यान विभाग का मानना है कि नई किस्मों की खेती से किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
थाईलैंड की किस्मों पर भी तैयारी
इजरायल के माया आम के अलावा थाईलैंड की कुछ लोकप्रिय आम प्रजातियों को भी क्षेत्र में बढ़ावा देने की योजना है।
इन किस्मों को स्थानीय जलवायु के अनुसार विकसित करने और किसानों तक पहुंचाने पर काम किया जा रहा है।
यदि ये विदेशी किस्में वेस्ट यूपी की मिट्टी और मौसम में बेहतर प्रदर्शन करती हैं तो आने वाले वर्षों में यहां के आम उत्पादन में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
वेस्ट यूपी की पहले से है आमों में पहचान
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिले आम उत्पादन के लिए पहले से प्रसिद्ध हैं।
दशहरी, लंगड़ा, चौसा और रटौल जैसी किस्मों ने यहां के आमों को अलग पहचान दिलाई है। इन किस्मों की मांग देश के कई हिस्सों में रहती है।
अब विदेशी प्रजातियों के जुड़ने से क्षेत्र की आम विविधता और बढ़ सकती है।
हाइटेक नर्सरी की भूमिका अहम
उद्यान विभाग की हाइटेक नर्सरी में आधुनिक तकनीक के माध्यम से पौधों को तैयार किया जा रहा है।
मदर प्लांट से गुणवत्तापूर्ण कलम तैयार कर किसानों को उपलब्ध कराई जाएगी। इससे किसानों को अच्छी गुणवत्ता वाले पौधे मिल सकेंगे।
अधिकारियों का कहना है कि पौधों की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए वैज्ञानिक तरीके अपनाए जा रहे हैं।
बागवानी क्षेत्र को मिलेगा बढ़ावा
विदेशी आम की किस्मों का उत्पादन शुरू होने से क्षेत्र में बागवानी को नई दिशा मिल सकती है।
किसान पारंपरिक फसलों के साथ-साथ उच्च मूल्य वाली बागवानी फसलों की ओर भी आकर्षित हो सकते हैं।
इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने और रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है।
बाजार में बढ़ सकती है मांग
आज के समय में उपभोक्ता नए स्वाद और अलग-अलग किस्मों के फलों को पसंद कर रहे हैं।
ऐसे में इजरायल और थाईलैंड की आम प्रजातियां बाजार में अपनी जगह बना सकती हैं।
यदि इनका उत्पादन सफल रहता है तो वेस्ट यूपी के किसान देशी के साथ विदेशी आमों की आपूर्ति भी कर सकेंगे।
नई पहचान की ओर बढ़ रहा वेस्ट यूपी
वेस्ट यूपी पहले से ही आम उत्पादन के लिए जाना जाता है। अब विदेशी किस्मों के प्रयोग से यहां के आम बाजार को नई पहचान मिल सकती है।
उद्यान विभाग की यह पहल किसानों के लिए नए अवसर खोलने वाली मानी जा रही है। आने वाले समय में संभव है कि इजरायल का माया और थाईलैंड की प्रजातियों के आम भी वेस्ट यूपी के बागों में अपनी खुशबू बिखेरते नजर आएं।





