उत्तर प्रदेश

गंगा एक्सप्रेसवे पर पहली ही बारिश में धंसी सड़क: अमरोहा के बाद अब उन्नाव में बही मिट्टी

Kavita2
18 Aug 2026 9:33 AM IST
गंगा एक्सप्रेसवे पर पहली ही बारिश में धंसी सड़क: अमरोहा के बाद अब उन्नाव में बही मिट्टी
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उन्नाव/लखनऊ। उत्तर प्रदेश में लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के बाद अब राज्य की महात्वाकांक्षी परियोजना गंगा एक्सप्रेसवे (Ganga Expressway) पर निर्माण कार्य की गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मानसून की पहली ही बारिश ने एक्सप्रेसवे के निर्माण दावों की पोल खोलकर रख दी है। अमरोहा के बाद अब उन्नाव जिले में एक्सप्रेसवे के किनारे की मिट्टी अचानक धंस जाने से हड़कंप मच गया है।

उन्नाव के दही थाना क्षेत्र अंतर्गत बशीरतगंज के पास सोमवार सुबह एक्सप्रेसवे के किनारे की ढलान (इम्बैंकमेंट) की मिट्टी अचानक खिसक गई, जिससे करीब 10 मीटर का हिस्सा बुरी तरह प्रभावित हो गया। घटना की सूचना मिलते ही कार्यदायी संस्था और निर्माण एजेंसी की टीमें आनन-फानन में मौके पर पहुंचीं और आनद-फानन में मरम्मत का काम शुरू कराया गया।

उन्नाव के बशीरतगंज में 10 मीटर तक खिसकी मिट्टी

प्राप्त जानकारी के अनुसार, उन्नाव के दही क्षेत्र में बशीरतगंज गांव के पास बीते 24 घंटों से हो रही तेज बारिश के कारण कटान शुरू हो गया। सोमवार तड़के बारिश का पानी सड़क के किनारे बनी ढलान में घुस गया, जिससे मिट्टी में धंसाव आ गया और सड़क के किनारे का लगभग 10 मीटर हिस्सा प्रभावित हो गया।

सड़क धंसने और मिट्टी कटने की खबर फैलते ही प्रशासनिक अमले में खलबली मच गई। कार्यदायी संस्था ने तुरंत जेसीबी (JCB) मशीनों और भारी तादाद में मजदूरों को मौके पर तैनात किया। धंसी हुई ढलान के पास पानी के और अधिक रिसाव को रोकने के लिए प्लास्टिक की शीटें बिछाई गईं और मिट्टी की मजबूत मेड़बंदी (बंधा) कराई गई ताकि सड़क का मुख्य हिस्सा क्षतिग्रस्त होने से बचाया जा सके।

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो, उठे सवाल

गंगा एक्सप्रेसवे पर मिट्टी धंसने और मरम्मत कार्य का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में सड़क के किनारे बड़े-बड़े गड्ढे और खिसकती मिट्टी को साफ देखा जा सकता है, जबकि कर्मचारी प्लास्टिक डालकर पानी रोकने की कोशिश करते नजर आ रहे हैं।

सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद स्थानीय नागरिकों और विपक्षी दलों ने एक्सप्रेसवे के निर्माण में इस्तेमाल सामग्री की गुणवत्ता पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि अगर पहली ही सामान्य बारिश में यह हाल है, तो पूरी बरसात के मौसम में गाड़ियों की आवाजाही के दौरान कितना बड़ा खतरा पैदा हो सकता है।

अमरोहा में भी सामने आ चुकी है ऐसी ही घटना

यह पहला मौका नहीं है जब गंगा एक्सप्रेसवे पर इस तरह की लापरवाही सामने आई हो। इससे ठीक कुछ दिन पहले अमरोहा जिले के सीमावर्ती इलाके में भी तेज बारिश के बाद एक्सप्रेसवे के किनारे की मिट्टी बह गई थी और सड़क का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया था।

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर भी हाल ही में जगह-जगह गड्ढे और दरारें देखने को मिली थीं। अब गंगा एक्सप्रेसवे पर एक के बाद एक अमरोहा और उन्नाव में मिट्टी धंसने की घटनाओं ने उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPEIDA) और निर्माण कंपनियों की कार्यशैली पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

विशेषज्ञ क्या मानते हैं वजह?

सिविल इंजीनियरों और इंफ्रास्ट्रक्चर विशेषज्ञों के मुताबिक, किसी भी हाईवे या एक्सप्रेसवे के किनारे की ढलान (Embankment Slope) को बारिश के पानी के कटान से बचाने के लिए उचित 'टर्फिंग' (घास लगाना) और 'पिचिंग' (पत्थरों या कंक्रीट की कोटिंग) की जाती है।

उन्नाव और अमरोहा की घटनाओं से यह स्पष्ट होता है कि:

बारिश से पहले मिट्टी के कटाव को रोकने के लिए जल निकासी (Drainage System) का सही इंतजाम नहीं किया गया।

ढलान की कम्पेक्शन (सघनता) कमजोर थी, जिससे पानी का रिसाव होते ही मिट्टी खिसक गई।

यूपीडा और कार्यदायी संस्था की सफाई

घटना के संबंध में यूपीडा और कार्यदायी संस्था के अधिकारियों का कहना है कि जहां भी मिट्टी खिसकने या धंसाव की सूचना मिल रही है, वहां तुरंत मरम्मत कराई जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक, बारिश के पानी का तेज बहाव होने के कारण किनारे की कच्ची मिट्टी बही है, लेकिन एक्सप्रेसवे के मुख्य कैरिजवे (मुख्य सड़क जिस पर गाड़ियां चलती हैं) को कोई बड़ा नुकसान नहीं पहुंचा है। सुरक्षा के दृष्टिकोण से प्रभावित हिस्से के पास संकेतक (Signages) और बैरिकेडिंग लगा दिए गए हैं।

यात्रियों की सुरक्षा पर मंडराया खतरा

गंगा एक्सप्रेसवे राज्य की सबसे महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में से एक है, जिसे राज्य के पश्चिमी हिस्से को सीधे पूर्वी यूपी से जोड़ने के लिए बनाया जा रहा है। मानसून के शुरुआती दौर में ही इस तरह से ढांचागत कमियां सामने आने से इस पर सफर करने वाले वाहन चालकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। स्थानीय प्रशासन ने दावा किया है कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और मरम्मत का कार्य युद्धस्तर पर पूरा किया जा रहा है।

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