उत्तर प्रदेश

UP. में एक महीने का मेगा अभियान प्रभारी मंत्रियों की बढ़ी जिम्मेदारी

Ratna Netam
10 Sept 2026 7:29 PM IST
UP.  में एक महीने का मेगा अभियान प्रभारी मंत्रियों की बढ़ी जिम्मेदारी
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सरकार और संगठन को जमीनी स्तर पर और सक्रिय करने की तैयारी तेज कर दी है। इसी रणनीति के तहत प्रभारी मंत्रियों को अपने-अपने प्रभार वाले क्षेत्रों में जाने और विधानसभा क्षेत्रों तक पहुंचकर सरकार की योजनाओं, विकास कार्यों तथा जनता से जुड़े मुद्दों की समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही 17 सितंबर से बड़े स्तर पर अभियान शुरू करने की तैयारी है। अभियान के दौरान मंत्री, जनप्रतिनिधि और संगठन से जुड़े पदाधिकारी अलग-अलग कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों तक पहुंचेंगे।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंत्रियों से स्पष्ट कहा है कि सरकार की योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचना चाहिए और इसकी वास्तविक स्थिति केवल अधिकारियों की रिपोर्ट के आधार पर नहीं बल्कि जमीनी स्तर पर जाकर भी देखी जाए। इसके लिए प्रभारी मंत्रियों को जिलों के साथ विधानसभा क्षेत्रों तक जाने और स्थानीय जनप्रतिनिधियों तथा अधिकारियों के साथ समन्वय बढ़ाने पर जोर दिया गया है।
यह कवायद ऐसे समय में तेज हुई है जब उत्तर प्रदेश में आगामी राजनीतिक और चुनावी चुनौतियों को देखते हुए भाजपा सरकार और संगठन दोनों बूथ से लेकर विधानसभा क्षेत्र तक अपनी सक्रियता बढ़ाने में जुटे हैं।
17 सितंबर से शुरू होगा अभियान
17 सितंबर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिन है। भाजपा हर साल इस अवसर से अलग-अलग सामाजिक और जनसेवा कार्यक्रमों की शुरुआत करती रही है। इस बार भी 17 सितंबर से बड़े स्तर पर **सेवा पखवाड़ा** चलाने की तैयारी है।
यह अभियान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन 17 सितंबर से शुरू होकर 2 अक्टूबर तक चलाया जाता रहा है। इस दौरान रक्तदान शिविर, स्वास्थ्य शिविर, स्वच्छता अभियान, पौधरोपण और सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
उत्तर प्रदेश में इस अभियान को सरकार और संगठन की जमीनी सक्रियता से भी जोड़ा जा रहा है।
प्रभारी मंत्रियों को कहा गया है कि वे केवल जिला मुख्यालय तक अपनी गतिविधियां सीमित न रखें, बल्कि विधानसभा क्षेत्रों तक पहुंचें।
विधानसभा क्षेत्रों में जाएंगे प्रभारी मंत्री
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का सबसे महत्वपूर्ण निर्देश प्रभारी मंत्रियों के दौरों से जुड़ा है।
अब मंत्री अपने प्रभार वाले जिलों में जाकर अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों का दौरा करेंगे। यहां विकास कार्यों की स्थिति देखने के साथ स्थानीय समस्याओं की जानकारी भी ली जाएगी।
सरकार की मंशा है कि मंत्री जनता और कार्यकर्ताओं के साथ सीधा संवाद बढ़ाएं।
इससे एक तरफ सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय स्तर पर ऐसी समस्याओं की पहचान हो सकेगी जिनका समाधान लंबे समय से नहीं हुआ है।
प्रभारी मंत्रियों के सामने स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के बीच बेहतर तालमेल बनाने की जिम्मेदारी भी होगी।
सिर्फ बैठकों तक सीमित नहीं रहें मंत्री
योगी सरकार की कोशिश है कि मंत्रियों के दौरे औपचारिक बैठकों तक सीमित न रहें।
मंत्री क्षेत्र में जाकर विकास परियोजनाओं का निरीक्षण करें, लाभार्थियों से बात करें और यह पता लगाएं कि सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तव में लोगों तक पहुंच रहा है या नहीं।
अधिकारियों द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों और जमीनी वास्तविकता के बीच अंतर होने पर मंत्री सीधे इसकी जानकारी सरकार तक पहुंचा सकेंगे।
मुख्यमंत्री पहले भी कई मौकों पर मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों को फील्ड विजिट बढ़ाने के निर्देश देते रहे हैं।
सरकार का जोर इस बात पर है कि शासन की योजनाओं का मूल्यांकन केवल कागजी प्रगति से नहीं बल्कि लाभार्थियों के अनुभव के आधार पर भी किया जाए।
जनता की शिकायतों पर रहेगा फोकस
प्रभारी मंत्रियों के विधानसभा क्षेत्रवार दौरों में जनता की शिकायतों को भी प्राथमिकता दिए जाने की तैयारी है।
स्थानीय स्तर पर सड़क, बिजली, पेयजल, आवास, राशन, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार से जुड़े मुद्दे सबसे ज्यादा सामने आते हैं।
ऐसे में मंत्रियों को स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों से बातचीत कर समस्याओं की जानकारी लेने को कहा गया है।
जहां तत्काल समाधान संभव होगा, वहां अधिकारियों को निर्देश दिए जा सकते हैं। बड़ी समस्याओं या नीतिगत मामलों को शासन स्तर तक पहुंचाया जाएगा।
इस व्यवस्था का उद्देश्य सरकार और आम लोगों के बीच दूरी कम करना भी है।
जनप्रतिनिधियों के साथ बढ़ेगा समन्वय
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सरकार और संगठन के बीच बेहतर समन्वय पर लगातार जोर दिया है।
प्रभारी मंत्रियों के विधानसभा क्षेत्रों में जाने से स्थानीय सांसद, विधायक, पार्टी पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं के साथ संवाद बढ़ने की संभावना है।
कई बार स्थानीय जनप्रतिनिधि शिकायत करते हैं कि उनके क्षेत्र की समस्याएं अधिकारियों तक पहुंचने के बावजूद समय पर हल नहीं होतीं।
प्रभारी मंत्री ऐसे मामलों में सरकार और स्थानीय प्रशासन के बीच महत्वपूर्ण कड़ी की भूमिका निभा सकते हैं।
विधानसभा स्तर पर बैठक और संवाद होने से स्थानीय राजनीतिक तथा प्रशासनिक परिस्थितियों की रिपोर्ट भी सीधे सरकार तक पहुंच सकेगी।
विकास कार्यों की होगी समीक्षा
प्रभारी मंत्रियों को अपने दौरों के दौरान प्रमुख विकास परियोजनाओं की स्थिति देखने पर भी जोर दिया गया है।
सड़क निर्माण, अस्पताल, स्कूल, पेयजल परियोजनाएं, आवास योजनाएं और दूसरी बुनियादी सुविधाओं से जुड़े कामों की समीक्षा की जा सकती है।
जिन परियोजनाओं में देरी हो रही है, उनके कारणों की जानकारी ली जाएगी।
अगर किसी परियोजना में बजट या प्रशासनिक स्वीकृति से जुड़ी समस्या है तो उसे शासन के सामने रखा जा सकेगा।
सरकार की कोशिश है कि पहले से स्वीकृत विकास कार्यों को तय समय के भीतर पूरा कराया जाए और उनकी गुणवत्ता भी सुनिश्चित की जाए।
लाभार्थियों तक पहुंचने की रणनीति
योगी सरकार की कई योजनाएं सीधे लाभार्थियों से जुड़ी हैं।
प्रधानमंत्री आवास योजना, मुख्यमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना, आयुष्मान भारत, किसान सम्मान निधि, राशन वितरण और विभिन्न पेंशन योजनाओं से बड़ी संख्या में लोग जुड़े हैं।
प्रभारी मंत्रियों के दौरों में इन योजनाओं के लाभार्थियों से संवाद भी महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता है।
इसके जरिए सरकार यह जान सकेगी कि योजनाओं का लाभ मिलने में लोगों को किसी तरह की परेशानी तो नहीं हो रही है।
अगर पात्र व्यक्ति योजना से वंचित मिलता है तो उसके कारणों की जानकारी लेकर संबंधित विभाग को कार्रवाई के निर्देश दिए जा सकते हैं।
17 सितंबर से सेवा कार्यक्रमों की शुरुआत
17 सितंबर से शुरू होने वाले अभियान में सामाजिक सरोकार से जुड़े कार्यक्रमों पर खास जोर रहने की संभावना है।
भाजपा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन से महात्मा गांधी की जयंती तक सेवा पखवाड़ा आयोजित करती रही है।
इस दौरान स्वास्थ्य जांच, रक्तदान, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण जैसे कार्यक्रमों के जरिए पार्टी कार्यकर्ता जनता से सीधे जुड़ते हैं।
उत्तर प्रदेश में इस बार इन कार्यक्रमों को विधानसभा स्तर तक प्रभावी बनाने की तैयारी दिखाई दे रही है।
मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी से अभियान को बड़े स्तर पर चलाया जाएगा।
स्वच्छता अभियान पर रहेगा जोर
2 अक्टूबर महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री की जयंती है। इसलिए सेवा पखवाड़े में स्वच्छता से जुड़े कार्यक्रमों को विशेष महत्व दिया जाता है।
नगरों से लेकर गांवों तक सार्वजनिक स्थलों पर सफाई अभियान चलाए जा सकते हैं।
स्कूल, अस्पताल, धार्मिक स्थल, बाजार और दूसरे सार्वजनिक स्थानों पर स्वच्छता कार्यक्रम आयोजित करने की योजना भी अभियान का हिस्सा रह सकती है।
सरकार पहले से ही स्वच्छता और कचरा प्रबंधन को लेकर स्थानीय निकायों को निर्देश देती रही है।
अभियान के जरिए इन प्रयासों को जनभागीदारी से जोड़ने पर जोर होगा।
स्वास्थ्य शिविर और रक्तदान कार्यक्रम
सेवा पखवाड़े में स्वास्थ्य से जुड़े कार्यक्रम भी प्रमुख रूप से आयोजित किए जाते हैं।
अलग-अलग क्षेत्रों में स्वास्थ्य जांच शिविर और रक्तदान कार्यक्रम लगाए जा सकते हैं।
सरकार की कोशिश ऐसे आयोजनों में युवाओं, सामाजिक संस्थाओं और स्वयंसेवी संगठनों की भागीदारी बढ़ाने की रहती है।
स्वास्थ्य शिविरों के जरिए लोगों की सामान्य जांच के साथ उन्हें सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के बारे में जानकारी भी दी जा सकती है।
आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं के पात्र लाभार्थियों को आवश्यक दस्तावेज और कार्ड से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया जा सकता है।
सरकार की उपलब्धियां भी पहुंचेंगी जनता तक
इस पूरे अभियान का एक महत्वपूर्ण राजनीतिक पहलू भी है।
भाजपा सरकार अपनी विकास और कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी लोगों तक पहुंचाना चाहती है।
मंत्री और जनप्रतिनिधि अपने दौरों में केंद्र तथा राज्य सरकार की योजनाओं के बारे में लोगों को जानकारी देंगे।
पार्टी कार्यकर्ता घर-घर संपर्क और स्थानीय कार्यक्रमों के माध्यम से सरकार की उपलब्धियों को सामने रख सकते हैं।
इससे सरकार को अपनी योजनाओं पर सीधे जनता की प्रतिक्रिया भी मिलेगी।
संगठन को भी मिलेगा जमीनी फीडबैक
प्रभारी मंत्रियों के दौरे केवल प्रशासनिक समीक्षा तक सीमित नहीं रहेंगे। इससे संगठन को भी विधानसभा क्षेत्रों की वास्तविक स्थिति समझने में मदद मिल सकती है।
स्थानीय कार्यकर्ताओं की समस्याएं, संगठन की सक्रियता और जनता का रुख जैसे विषय भी सामने आएंगे।
भाजपा लंबे समय से बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करने की रणनीति पर काम करती रही है।
विधानसभा क्षेत्रों में मंत्रियों और वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी से कार्यकर्ताओं को सक्रिय रखने और स्थानीय स्तर पर समन्वय बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
अधिकारियों की जवाबदेही भी बढ़ेगी
मंत्रियों के नियमित फील्ड दौरे से जिला और तहसील स्तर के अधिकारियों की जवाबदेही भी बढ़ेगी।
अगर कोई विकास परियोजना लंबे समय से अटकी है या पात्र लाभार्थियों को योजना का लाभ नहीं मिल रहा है तो संबंधित विभाग से जवाब मांगा जा सकता है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले भी अधिकारियों को जनता की शिकायतों का समयबद्ध समाधान करने के निर्देश देते रहे हैं।
ऐसे में प्रभारी मंत्रियों के दौरे प्रशासनिक कामकाज की जमीनी निगरानी का अतिरिक्त माध्यम बन सकते हैं।
सरकार और संगठन दोनों की बड़ी तैयारी
17 सितंबर से शुरू होने वाला अभियान सामाजिक कार्यक्रमों के साथ राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
एक तरफ सेवा पखवाड़े के माध्यम से जनता के बीच कार्यक्रम होंगे तो दूसरी तरफ प्रभारी मंत्रियों के विधानसभा क्षेत्रों में जाने से विकास योजनाओं और स्थानीय समस्याओं की समीक्षा होगी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का संदेश स्पष्ट है कि मंत्री अपने विभाग और राजधानी की बैठकों तक सीमित न रहें बल्कि क्षेत्र में जाकर लोगों से संवाद करें।
सरकार की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना, विकास कार्यों की प्रगति देखना और स्थानीय स्तर की शिकायतों का समाधान कराना इस कवायद के प्रमुख उद्देश्य होंगे।
अब नजर 17 सितंबर से शुरू होने वाले अभियान पर है। मंत्री कितने विधानसभा क्षेत्रों तक पहुंचते हैं और उनके दौरों के बाद जमीनी समस्याओं के समाधान में कितना बदलाव दिखाई देता है, यही इस अभियान की वास्तविक परीक्षा होगी।
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